वॉशिंगटन में हाई-प्रोफाइल बैठक: भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने राष्ट्रपति ट्रंप से की मुलाकात, मध्य पूर्व संकट के बीच भारत को बताया 'अपरिहार्य साथी'।

मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध के बादलों और ईरान के साथ जारी भीषण तनाव के बीच, भारत में संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर एक महत्वपूर्ण

Apr 1, 2026 - 13:58
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वॉशिंगटन में हाई-प्रोफाइल बैठक: भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने राष्ट्रपति ट्रंप से की मुलाकात, मध्य पूर्व संकट के बीच भारत को बताया 'अपरिहार्य साथी'।
वॉशिंगटन में हाई-प्रोफाइल बैठक: भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने राष्ट्रपति ट्रंप से की मुलाकात, मध्य पूर्व संकट के बीच भारत को बताया 'अपरिहार्य साथी'।
  • ईरान-अमेरिका युद्ध की आहट के बीच कूटनीतिक हलचल तेज: राजदूत सर्जियो गोर का बड़ा बयान— 'ट्रंप-मोदी की दोस्ती वैश्विक स्थिरता के लिए सबसे मजबूत स्तंभ'
  • होर्मुज जलडमरूमध्य संकट और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा: अमेरिकी राजदूत ने द्विपक्षीय वार्ता के बाद भारत की रणनीतिक भूमिका पर दिया विशेष जोर

मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध के बादलों और ईरान के साथ जारी भीषण तनाव के बीच, भारत में संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर एक महत्वपूर्ण मिशन पर वॉशिंगटन पहुंचे हैं। 31 मार्च 2026 को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ उनकी यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब खाड़ी देशों में स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है। इस बैठक का मुख्य केंद्र न केवल ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष रहा, बल्कि भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को और अधिक प्रगाढ़ करना भी शामिल था। राजदूत गोर ने बैठक के बाद स्पष्ट रूप से कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप भारत के साथ संबंधों को "गहराई से महत्व" देते हैं। वर्तमान भू-राजनीतिक अस्थिरता के दौर में, अमेरिका भारत को एक ऐसे विश्वसनीय सहयोगी के रूप में देख रहा है जो न केवल दक्षिण एशिया बल्कि वैश्विक शांति बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य तनातनी ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक मार्गों पर संकट पैदा कर दिया है। इस संदर्भ में, राजदूत सर्जियो गोर ने हाल ही में हुए राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच के टेलीफोनिक संवाद का हवाला देते हुए भारत की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने विशेष रूप से 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को खुला रखने की आवश्यकता पर बल दिया। गोर के अनुसार, ईरान द्वारा अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की नाकेबंदी करने के प्रयासों के बीच अमेरिका अपने सबसे महत्वपूर्ण साझेदारों को एकजुट कर रहा है, और इस सूची में भारत शीर्ष पर है। उन्होंने आगाह किया कि यदि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित होती है, तो इसके परिणाम विनाशकारी होंगे, और ऐसे में भारत-अमेरिका का रक्षा और कूटनीतिक समन्वय ही दुनिया को बड़े आर्थिक झटके से बचा सकता है।

राजदूत गोर ने वॉशिंगटन में पत्रकारों से चर्चा करते हुए भारत-अमेरिका संबंधों के "स्वर्ण युग" का जिक्र किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच की व्यक्तिगत केमिस्ट्री केवल प्रोटोकॉल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वास्तविक और क्रियाशील है। गोर ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में रक्षा और सुरक्षा सहयोग द्विपक्षीय संबंधों का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा। उनके अनुसार, भारत अब केवल एक व्यापारिक भागीदार नहीं है, बल्कि एक "प्रमुख रक्षा भागीदार" (Major Defence Partner) के रूप में अमेरिका की रणनीतिक गणनाओं का केंद्र है। नए 10-वर्षीय रक्षा ढांचे और उन्नत रक्षा औद्योगिक सहयोग के माध्यम से दोनों देश अपनी सैन्य क्षमताओं को और अधिक एकीकृत करने की दिशा में काम कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर चीन और ईरान जैसे क्षेत्रीय खतरों के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा तैयार करता है।

क्वाड और इंडो-पैसिफिक की सुरक्षा

राजदूत सर्जियो गोर ने अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान 'क्वाड' (Quad) गठबंधन की प्रासंगिकता पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के सुरक्षा हित अब पूरी तरह से संरेखित (Aligned) हैं। मालाबार, टाइगर ट्रायम्फ और कोप इंडिया जैसे सैन्य अभ्यासों के जरिए दोनों देशों की सेनाओं के बीच 'इंटरोपरेबिलिटी' बढ़ी है। गोर ने स्पष्ट किया कि चाहे वह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का क्षेत्र हो या क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन, अमेरिका अब भारत के बिना अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा नीति की कल्पना नहीं कर सकता। 'पैक्स सिलिका' (Pax Silica) समझौता इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।

आर्थिक मोर्चे पर भी राजदूत गोर ने भारत के लिए सकारात्मक संकेत दिए हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप का लक्ष्य द्विपक्षीय व्यापार को इस तरह सुगम बनाना है जिससे अमेरिकी व्यवसायों के साथ-साथ भारतीय अर्थव्यवस्था को भी अभूतपूर्व अवसर मिलें। एक साल के भीतर पूरे किए गए हालिया व्यापार समझौते का श्रेय उन्होंने दोनों शीर्ष नेताओं की मित्रता को दिया। राजदूत ने संकेत दिए कि आने वाले महीनों में ऊर्जा, विमानन और डिजिटल बुनियादी ढांचे में अमेरिकी निवेश भारत में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है। उन्होंने यह भी साझा किया कि ट्रंप प्रशासन भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था को अपनी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के जोखिमों को कम करने के लिए "एकमात्र विकल्प" मानता है, जिससे एक 'विन-विन' स्थिति पैदा हो रही है।

ईरान के साथ युद्ध की स्थिति पर बात करते हुए सर्जियो गोर ने कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर वैश्विक व्यापारिक मार्गों पर ईरान के एकाधिकार को स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने भारत की नौसेना और कूटनीतिक प्रभाव की सराहना करते हुए कहा कि नई दिल्ली की संतुलित विदेश नीति ने उसे इस संकट में एक प्रभावशाली मध्यस्थ और रक्षक बना दिया है। राजदूत ने जोर दिया कि भारत का रूस और मध्य पूर्व के अन्य देशों के साथ संवाद अमेरिका के लिए भी सहायक साबित हो सकता है। यह बैठक दर्शाती है कि वॉशिंगटन में अब इस बात पर पूर्ण सहमति है कि भारत की सुरक्षा और समृद्धि अमेरिका की अपनी वैश्विक रणनीति का एक अभिन्न हिस्सा है।

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