मुंबई के कालाचौकी में जैन मंदिर की करोड़ों की चोरी का पर्दाफाश, 48 घंटे के भीतर सलाखों के पीछे पहुँचा मुख्य आरोपी।
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के कालाचौकी इलाके में स्थित एक प्रतिष्ठित जैन मंदिर में हुई सनसनीखेज चोरी की वारदात को सुलझाने में मुंबई
- पूर्व चौकीदार ही निकला जैन मंदिर का गुनहगार, पुलिस ने बरामद किए 1.75 करोड़ रुपये के आभूषण और नकद
- आस्था पर प्रहार करने वाले 'बंटी' की चालाकी नहीं आई काम, सीसीटीवी और तकनीकी सर्विलांस से पुलिस ने सुलझाया गुत्थी
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के कालाचौकी इलाके में स्थित एक प्रतिष्ठित जैन मंदिर में हुई सनसनीखेज चोरी की वारदात को सुलझाने में मुंबई पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। करीब 1.75 करोड़ रुपये मूल्य के बेशकीमती आभूषणों और नकदी पर हाथ साफ करने वाले शातिर चोर को पुलिस ने महज 48 घंटे के भीतर दबोच लिया है। पकड़े गए आरोपी की पहचान जितेंद्र उर्फ जीतन उर्फ बंटी उर्फ पिंटू लांबड़े के रूप में हुई है, जो इसी मंदिर और संबंधित सोसायटी परिसर में पूर्व में चौकीदार के रूप में काम कर चुका था। इस घटना ने न केवल स्थानीय जैन समुदाय को झकझोर कर रख दिया था, बल्कि शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने मंदिर की पवित्रता और जनता के विश्वास को बहाल करने का काम किया है।
घटना के क्रम को विस्तार से देखें तो यह वारदात 30 मार्च 2026 की दरमियानी रात को अंजाम दी गई थी। रात करीब 2:30 बजे से 4:00 बजे के बीच, जब पूरी दुनिया गहरी नींद में थी, आरोपी मंदिर परिसर में दाखिल हुआ। उसने मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश किया और भगवान की प्रतिमाओं पर सुशोभित सोने और चांदी के भारी आभूषणों को अत्यंत सफाई से उतार लिया। आभूषणों के साथ-साथ उसने दान पेटी में जमा बड़ी मात्रा में नकदी पर भी हाथ साफ किया। सुबह जब पुजारी और श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे, तो मंदिर की स्थिति देखकर उनके होश उड़ गए। भगवान के श्रृंगार गायब थे और मंदिर में अव्यवस्था फैली हुई थी। इसके तुरंत बाद कालाचौकी पुलिस को सूचना दी गई और वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनास्थल का मुआयना किया।
पहचान छिपाने के कई नाम और पुराना रिकॉर्ड
गिरफ्तार आरोपी जितेंद्र लांबड़े कोई साधारण चोर नहीं है। वह 'जीतू', 'जीतन', 'बंटी' और 'पिंटू' जैसे कई उपनामों का उपयोग करके पुलिस को गुमराह करता रहा है। पूर्व में मंदिर का चौकीदार होने के कारण उसे सुरक्षा के हर छिद्र और सीसीटीवी कैमरों की सटीक लोकेशन की पूरी जानकारी थी, जिसका उसने इस चोरी में भरपूर लाभ उठाया।
पुलिस की जांच में यह तथ्य सामने आया कि आरोपी ने चोरी के लिए उस समय का चुनाव किया जब सुरक्षा गार्डों की गश्त सबसे कम होती है। उसने मंदिर के भीतर प्रवेश करने के लिए उन रास्तों का उपयोग किया जो केवल वहां काम करने वाले लोगों को ही पता हो सकते थे। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद, पुलिस की विशेष टीमों का गठन किया गया और तकनीकी सर्विलांस की मदद ली गई। सीसीटीवी फुटेज के सूक्ष्म विश्लेषण से एक संदिग्ध व्यक्ति की पहचान हुई जिसकी शारीरिक बनावट और चलने का तरीका पूर्व कर्मचारी जितेंद्र से मेल खाता था। पुलिस ने तुरंत उसके पुराने पतों और मोबाइल लोकेशन को ट्रैक करना शुरू किया, जिससे उसकी वर्तमान स्थिति का पता चला।
मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने आरोपी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। जैसे ही आरोपी शहर छोड़ने की फिराक में था, उसे हिरासत में ले लिया गया। कड़ाई से पूछताछ करने पर आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया और चोरी के माल का ठिकाना भी बता दिया। पुलिस ने आरोपी के पास से शत-प्रतिशत आभूषण और नकदी बरामद कर ली है। बरामद किए गए गहनों में सोने के मुकुट, हार और अन्य प्राचीन आभूषण शामिल हैं, जिनकी बाजार में कीमत 1.75 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। बरामदगी के बाद जैन समुदाय के प्रतिनिधियों ने पुलिस के प्रति आभार व्यक्त किया है, क्योंकि ये आभूषण न केवल आर्थिक रूप से कीमती थे बल्कि श्रद्धालुओं की गहरी आस्था से भी जुड़े थे।
आरोपी ने पूछताछ में यह भी स्वीकार किया कि उसने कर्ज चुकाने और विलासिता पूर्ण जीवन जीने के लिए इस चोरी की योजना महीनों पहले बनाई थी। चूंकि वह पहले वहां काम कर चुका था, इसलिए उसे पता था कि मंदिर में गहनों की सुरक्षा का स्तर कैसा है और आभूषणों को कहाँ रखा जाता है। उसने यह भी सोचा था कि कई नाम होने के कारण पुलिस उस तक नहीं पहुँच पाएगी, लेकिन पुलिस की डिजिटल मैपिंग और डेटाबेस ने उसकी इस गलतफहमी को दूर कर दिया। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस वारदात में उसका साथ देने वाले कुछ और लोग भी थे या उसने अकेले ही इस बड़ी चोरी को अंजाम दिया।
इस मामले की सफलता पर मुंबई के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने जांच दल को पुरस्कृत करने की घोषणा की है। अधिकारियों का कहना है कि धार्मिक स्थलों पर होने वाली ऐसी चोरियां समाज में असुरक्षा का भाव पैदा करती हैं, इसलिए इनका जल्द खुलासा होना अनिवार्य था। पुलिस ने मंदिर प्रशासन को भी भविष्य के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल को और कड़ा करने की सलाह दी है, जिसमें बायोमेट्रिक पहुंच और आधुनिक अलार्म सिस्टम शामिल हैं। साथ ही, अब मंदिर के वर्तमान और पूर्व कर्मचारियों का चरित्र सत्यापन (पुलिस वेरिफिकेशन) अनिवार्य रूप से कराने के निर्देश भी दिए गए हैं ताकि भविष्य में इस तरह की 'इनसाइडर जॉब' वाली घटनाओं को रोका जा सके।
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