मुजफ्फरपुर में मोबाइल गेम के जुनून ने रिश्तों में घोला जहर: सगे भाई ने दूसरे का स्लेट से फोड़ा सिर।
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के अहियापुर थाना क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां आधुनिक तकनीक और मोबाइल
- डिजिटल लत का खौफनाक चेहरा: गेम खेलने से रोकने पर छोटे भाई ने बड़े भाई पर किया जानलेवा हमला
- मुजफ्फरपुर के अहियापुर में सनसनीखेज वारदात, मोबाइल छीनने की कोशिश करने पर मासूम भाई लहूलुहान होकर पहुंचा अस्पताल
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के अहियापुर थाना क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां आधुनिक तकनीक और मोबाइल गेम की लत ने दो सगे भाइयों के बीच के प्रेम को हिंसक दुश्मनी में बदल दिया। एक मामूली सा दिखने वाला मोबाइल फोन आज के समय में किशोरों और बच्चों के लिए किस कदर घातक साबित हो रहा है, इसकी बानगी इस घटना में देखने को मिली। घर के भीतर खेल रहे दो भाइयों के बीच विवाद केवल इसलिए शुरू हुआ क्योंकि बड़ा भाई छोटे भाई को मोबाइल पर लगातार गेम खेलने से मना कर रहा था। यह विवाद इतना बढ़ गया कि छोटे भाई ने आव देखा न ताव और पास में रखी पत्थर की स्लेट उठाकर अपने ही बड़े भाई के सिर पर दे मारी। इस अचानक हुए हमले से बड़ा भाई बुरी तरह घायल हो गया और उसके सिर से खून की धार बहने लगी, जिससे पूरे घर में अफरा-तफरी मच गई।
घटना के विस्तृत विवरण के अनुसार, अहियापुर के एक स्थानीय मोहल्ले में रहने वाले इन दोनों भाइयों के बीच पिछले काफी समय से मोबाइल के उपयोग को लेकर कहासुनी होती रहती थी। छोटा भाई स्कूल से आने के बाद घंटों मोबाइल फोन पर ऑनलाइन गेम खेलने में व्यस्त रहता था, जिससे उसकी पढ़ाई और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा था। मंगलवार की शाम जब बड़ा भाई घर पहुंचा और उसने देखा कि छोटा भाई फिर से मोबाइल में डूबा हुआ है, तो उसने उसे डांटते हुए फोन छीनने की कोशिश की। इसी छीना-झपटी के दौरान छोटे भाई का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उसने अपने पास पड़ी भारी स्लेट, जिसका इस्तेमाल वह पढ़ाई के लिए करता था, उसे एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया और अपने भाई के सिर के पिछले हिस्से पर जोरदार प्रहार कर दिया।
घायल किशोर को तुरंत इलाज के लिए पास के एक निजी क्लीनिक और बाद में श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SKMCH) ले जाया गया। डॉक्टरों ने बताया कि प्रहार इतना तेज था कि सिर में गहरे टांके लगाने पड़े हैं और काफी खून बह जाने के कारण मरीज की स्थिति कमजोर हो गई है। अस्पताल में भर्ती घायल भाई ने बताया कि उसे इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि उसका छोटा भाई एक मोबाइल गेम के लिए उस पर जानलेवा हमला कर देगा। इस घटना के बाद से परिवार के सभी सदस्य गहरे सदमे में हैं और वे समझ नहीं पा रहे हैं कि जिस बच्चे को वे कल तक मासूम समझते थे, वह इतना आक्रामक कैसे हो गया। पुलिस को भी इस मामले की मौखिक सूचना दी गई है, हालांकि परिवार के आपसी सदस्य होने के कारण वे कानूनी कार्रवाई से हिचक रहे हैं। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि मोबाइल गेम की लत बच्चों के मस्तिष्क में डोपामाइन के स्तर को अनियंत्रित कर देती है, जिससे उनमें चिड़चिड़ापन और हिंसक प्रवृत्ति बढ़ने लगती है। जब उन्हें गेम खेलने से रोका जाता है, तो वे इसे अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला मानते हैं और 'विड्रॉल सिम्पटम्स' के रूप में शारीरिक हिंसा पर उतारू हो जाते हैं। मुजफ्फरपुर की यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
मुजफ्फरपुर में इस तरह की यह पहली घटना नहीं है, लेकिन भाइयों के बीच इस स्तर की हिंसा ने स्थानीय लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। पड़ोसियों का कहना है कि दोनों भाइयों के बीच पहले काफी गहरा लगाव था, लेकिन पिछले कुछ महीनों से मोबाइल फोन ने उनके बीच एक दीवार खड़ी कर दी थी। छोटा भाई अक्सर एकांत में रहना पसंद करने लगा था और गेम हारने पर चिल्लाने या सामान फेंकने जैसी हरकतें करता था। अभिभावकों ने भी स्वीकार किया कि उन्होंने बच्चे को शांत रखने के लिए उसे मोबाइल देने की गलती की, जो अब उनके लिए एक बड़ी मुसीबत बन गई है। इस घटना ने एक बार फिर बच्चों के हाथ में बिना किसी निगरानी के स्मार्टफोन देने के खतरों को प्रत्यक्ष रूप से प्रदर्शित किया है।
इस वारदात के बाद अहियापुर पुलिस ने भी संज्ञान लिया है और क्षेत्र में सामुदायिक पुलिसिंग के माध्यम से जागरूकता फैलाने की बात कही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर स्पेस में बढ़ते अपराधों के साथ-साथ अब 'डिजिटल बिहेवियरल क्राइम' भी बढ़ रहे हैं। माता-पिता को सलाह दी जा रही है कि वे अपने बच्चों की स्क्रीन टाइमिंग को सीमित करें और यदि बच्चा असामान्य व्यवहार करता है, तो तुरंत विशेषज्ञों की सहायता लें। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि हिंसा की घटनाएं बढ़ती हैं, तो वे जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के नियमों के तहत उचित कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे। समाज शास्त्रियों का मानना है कि मैदानों में खेलकूद की कमी और केवल आभासी दुनिया में सिमटे रहने के कारण बच्चों की भावनात्मक परिपक्वता खत्म होती जा रही है।
अस्पताल के बेड पर लेटे घायल भाई की आंखों में अपने भाई के प्रति नफरत नहीं, बल्कि एक डर और हैरानी दिखाई दे रही थी। उसने बताया कि वह केवल अपने भाई का भविष्य सुधारना चाहता था ताकि वह परीक्षाओं में अच्छे अंक ला सके। दूसरी ओर, हमला करने वाला छोटा भाई अब अपने किए पर पछता रहा है और लगातार रो रहा है। घर में सन्नाटा पसरा हुआ है और माता-पिता दोनों बच्चों के भविष्य और उनके मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं। यह मामला केवल एक मारपीट का मामला नहीं है, बल्कि यह उस डिजिटल महामारी का संकेत है जो हमारे घरों के भीतर चुपचाप प्रवेश कर चुकी है। मुजफ्फरपुर के बुद्धिजीवियों ने स्कूल स्तर पर काउंसलिंग सत्र आयोजित करने की मांग की है ताकि बच्चों को तकनीक के सही और गलत उपयोग के बारे में बताया जा सके।
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