ईंधन दरों का ताजा भाव– 31 मार्च 2026 को देशभर में क्या है पेट्रोल और डीजल का रेट?
भारत के विभिन्न शहरों और राज्यों में पेट्रोल तथा डीजल की कीमतें ज्यादातर स्थिर बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल के दामों
आज 31 मार्च 2026 को भारत के विभिन्न शहरों और राज्यों में पेट्रोल तथा डीजल की कीमतें ज्यादातर स्थिर बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल के दामों में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू बाजार में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया है। राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए विभिन्न टैक्स, वैट और ट्रांसपोर्टेशन लागत के कारण एक शहर से दूसरे शहर में कीमतों में थोड़ा अंतर जरूर है। दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ईंधन अपेक्षाकृत सस्ता है, जबकि मुंबई, कोलकाता और राजस्थान जैसे इलाकों में यह महंगा पड़ रहा है। उपभोक्ताओं के लिए यह जानकारी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि ईंधन की कीमतें ट्रांसपोर्ट, कृषि, उद्योग और रोजमर्रा की महंगाई को सीधे प्रभावित करती हैं।
नीचे दी गई तालिका में दिल्ली, नोएडा, लखनऊ, कानपुर, बरेली, शाहजहांपुर, बाराबंकी, मुरादाबाद, आगरा, हरदोई, कोलकाता, पुणे, मुम्बई, असम (गुवाहाटी), चेन्नई (तमिलनाडु), मध्य प्रदेश (भोपाल) और राजस्थान (जयपुर) सहित सभी उल्लिखित जगहों पर पेट्रोल और डीजल के भाव दिए गए हैं।
| जगह | पेट्रोल (रू./लीटर) | डीजल (रू./लीटर) |
|---|---|---|
| दिल्ली | 94.77 | 87.67 |
| नोएडा | 94.80 | 87.90 |
| लखनऊ | 94.69 | 87.81 |
| कानपुर | 94.67 | 87.70 |
| बरेली | 94.87 | 87.95 |
| शाहजहांपुर | 95.07 | 88.00 |
| बाराबंकी | 94.96 | 88.10 |
| मुरादाबाद | 95.00 | 88.40 |
| आगरा | 94.50 | 87.52 |
| हरदोई | 95.22 | 88.10 |
| कोलकाता | 105.41 | 92.02 |
| पुणे | 104.00 | 90.70 |
| मुम्बई | 103.54 | 90.03 |
| असम (गुवाहाटी) | 98.21 | 89.45 |
| चेन्नई (तमिलनाडु) | 100.93 | 92.48 |
| मध्य प्रदेश (भोपाल) | 106.20 | 91.89 |
| राजस्थान (जयपुर) | 104.80 | 90.40 |
उत्तर प्रदेश के अन्य छोटे शहरों की बात करें तो आगरा में पेट्रोल सबसे सस्ता 94.50 रुपये प्रति लीटर है जबकि डीजल 87.52 रुपये है। बरेली में पेट्रोल 94.87 रुपये और डीजल 87.95 रुपये है। शाहजहांपुर में पेट्रोल 95.07 रुपये और डीजल 88.00 रुपये है। बाराबंकी में पेट्रोल 94.96 रुपये और डीजल 88.10 रुपये है। मुरादाबाद में पेट्रोल 95.00 रुपये और डीजल 88.40 रुपये है। हरदोई में पेट्रोल थोड़ा ऊंचा 95.22 रुपये और डीजल 88.10 रुपये है। इन शहरों में कीमतों में 20-50 पैसे का अंतर मुख्य रूप से स्थानीय वैट और डिपो से दूरी के कारण है। उत्तर प्रदेश सरकार की ईंधन नीति ने इन शहरों में कीमतों को नियंत्रित रखा है जिससे आम नागरिकों को फायदा हो रहा है।
पूर्वी भारत की ओर देखें तो कोलकाता में पेट्रोल 105.41 रुपये और डीजल 92.02 रुपये है। यह महंगा इसलिए है क्योंकि पश्चिम बंगाल में उच्च टैक्स लगाए जाते हैं। असम में गुवाहाटी के आसपास पेट्रोल 98.21 रुपये और डीजल 89.45 रुपये है। असम तेल उत्पादक राज्य होने के बावजूद यहां परिवहन लागत और स्थानीय कर के कारण कीमतें मध्यम स्तर पर हैं। पश्चिम भारत में मुंबई में पेट्रोल 103.54 रुपये और डीजल 90.03 रुपये है। पुणे में पेट्रोल 104.00 रुपये और डीजल 90.70 रुपये है। महाराष्ट्र में उच्च वैट के कारण ये कीमतें ऊंची हैं लेकिन यहां की अर्थव्यवस्था मजबूत होने से उपभोक्ता इसे सहन कर पाते हैं। दक्षिण में चेन्नई और तमिलनाडु में पेट्रोल 100.93 रुपये और डीजल 92.48 रुपये है। तमिलनाडु की सरकार ने हाल के वर्षों में ईंधन टैक्स को संतुलित रखा है जिससे यहां कीमतें मध्यम बनी हुई हैं।
मध्य प्रदेश में भोपाल के आसपास पेट्रोल 106.20 रुपये और डीजल 91.89 रुपये है। राजस्थान के जयपुर में पेट्रोल 104.80 रुपये और डीजल 90.40 रुपये है। इन राज्यों में रेगिस्तानी इलाकों और लंबी दूरी के परिवहन के कारण अतिरिक्त लागत जुड़ जाती है। कुल मिलाकर देशभर में पेट्रोल की औसत कीमत लगभग 99-100 रुपये के आसपास है जबकि डीजल 89-90 रुपये के करीब है। अब इन कीमतों के पीछे के कारणों पर गौर करें। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमतें पिछले कुछ हफ्तों में स्थिर रही हैं। ओपेक देशों की उत्पादन नीति और वैश्विक मांग-आपूर्ति के संतुलन ने कीमतों को नियंत्रित रखा है। भारत पेट्रोलियम आयात पर निर्भर है इसलिए रुपए की मजबूती भी एक बड़ा कारक है। 31 मार्च 2026 को रुपया डॉलर के मुकाबले स्थिर है जिससे ईंधन आयात सस्ता पड़ा है। राज्य सरकारें वैट, एक्साइज ड्यूटी और अन्य स्थानीय शुल्क लगाती हैं जो कीमतों में 30-40 प्रतिशत का योगदान देते हैं। दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसी जगहों पर सरकार ने टैक्स में राहत दी है जबकि कुछ राज्यों में राजस्व बढ़ाने के लिए टैक्स ऊंचा रखा गया है।
ईंधन कीमतों का उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ रहा है? दिल्ली-एनसीआर में कम कीमतें ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स को सस्ता बनाती हैं जिससे सामान की कीमतें नियंत्रित रहती हैं। उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों जैसे बाराबंकी, हरदोई, शाहजहांपुर में किसान ट्रैक्टर और सिंचाई के लिए डीजल इस्तेमाल करते हैं। यहां कीमतें 88 रुपये के आसपास होने से कृषि लागत कम रहती है। लेकिन मुंबई और पुणे जैसे महानगरों में ऊंची कीमतें कैब, ऑटो और प्राइवेट वाहनों के मालिकों पर बोझ बढ़ाती हैं। कोलकाता में पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर निर्भर लोगों को भी अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। तमिलनाडु और मध्य प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियां तेज हैं। यहां डीजल की कीमत 91-92 रुपये होने से माल ढुलाई महंगी पड़ती है लेकिन निर्यात आधारित उद्योग इसे मैनेज कर लेते हैं। राजस्थान में पर्यटन और ट्रक ट्रांसपोर्ट पर निर्भर अर्थव्यवस्था को ईंधन की कीमतों का सीधा असर पड़ता है। असम में तेल रिफाइनरी होने के बावजूद स्थानीय कीमतें मध्यम हैं जो क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देती हैं। पिछले एक साल की तुलना में देखें तो 2025 के मार्च में पेट्रोल की औसत कीमत 92-93 रुपये के आसपास थी। 2026 में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है लेकिन यह नियंत्रित है। सरकार की ओर से पेट्रोलियम उत्पादों पर सब्सिडी और स्मार्ट प्राइसिंग पॉलिसी ने बड़े उछाल को रोका है। भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा, सौर ऊर्जा और वैकल्पिक ईंधन पर जोर से कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
उपभोक्ताओं को सलाह है कि रोजाना ऐप्स या आधिकारिक स्रोतों से कीमतें चेक करें क्योंकि छोटे बदलाव रोजाना हो सकते हैं। बड़े वाहन मालिकों को ईंधन बचत के उपाय जैसे सही टायर प्रेशर, नियमित सर्विसिंग और इको ड्राइविंग अपनानी चाहिए। सरकार भी ईंधन दक्षता को बढ़ावा दे रही है। कुल मिलाकर 31 मार्च 2026 को ईंधन बाजार स्थिर है जो अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत है। ईंधन कीमतों का प्रभाव महंगाई पर भी पड़ता है। जब डीजल महंगा होता है तो सब्जी, फल, दूध जैसी चीजों की ढुलाई लागत बढ़ती है जिससे खुदरा महंगाई बढ़ सकती है। लेकिन वर्तमान स्थिरता से आरबीआई की मुद्रास्फीति नियंत्रण नीति को मदद मिल रही है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में जहां ट्रक और बसें मुख्य यातायात हैं वहां कम कीमतें रोजगार और व्यापार को बढ़ावा दे रही हैं। आगे चलकर यदि क्रूड ऑयल 70-75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा तो कीमतें और स्थिर रह सकती हैं। लेकिन भू-राजनीतिक तनाव या मौसम संबंधी मुद्दे कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं। सरकार की रणनीति स्पष्ट है – आयात कम करना, घरेलू उत्पादन बढ़ाना और टैक्स संरचना को संतुलित रखना।
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