महाराष्ट्र की राजनीति में हड़कंप: रूपाली चाकणकर का एनसीपी महिला प्रदेशाध्यक्ष पद से इस्तीफा, अशोक खरात विवाद ने लिया बड़ा मोड़।

महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में रूपाली चाकणकर का इस्तीफा इस समय सबसे बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है। यह पूरा मामला उस समय

Mar 28, 2026 - 12:59
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महाराष्ट्र की राजनीति में हड़कंप: रूपाली चाकणकर का एनसीपी महिला प्रदेशाध्यक्ष पद से इस्तीफा, अशोक खरात विवाद ने लिया बड़ा मोड़।
महाराष्ट्र की राजनीति में हड़कंप: रूपाली चाकणकर का एनसीपी महिला प्रदेशाध्यक्ष पद से इस्तीफा, अशोक खरात विवाद ने लिया बड़ा मोड़।
  • महिला आयोग के बाद अब पार्टी पद भी गया: चौतरफा घिरीं रूपाली चाकणकर ने छोड़ा अजित पवार गुट का साथ, इस्तीफे से सियासी गलियारे दहले
  • ढोंगी बाबा अशोक खरात प्रकरण में फंसीं दिग्गज नेत्री: नैतिक आधार पर पदों का त्याग, विपक्ष के साथ-साथ अपनों ने भी खोला था मोर्चा

महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में रूपाली चाकणकर का इस्तीफा इस समय सबसे बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है। यह पूरा मामला उस समय शुरू हुआ जब नाशिक पुलिस ने स्वयंभू ज्योतिषी और बाबा अशोक खरात को महिलाओं के यौन शोषण और उगाही के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया। खरात की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर कुछ ऐसी तस्वीरें और वीडियो प्रसारित होने लगे, जिनमें रूपाली चाकणकर को कथित तौर पर उक्त बाबा के साथ देखा गया था। विशेष रूप से एक पुराने वीडियो ने विवाद की आग में घी डालने का काम किया, जिसमें वे खरात के पैर धोती नजर आ रही थीं। हालांकि चाकणकर ने स्पष्ट किया कि वे तस्वीरें पुरानी हैं और उनका परिवार खरात को गुरु मानता था, लेकिन विपक्ष ने इसे 'नैतिक पतन' बताते हुए उनके इस्तीफे की मांग तेज कर दी।

रूपाली चाकणकर पर दबाव केवल विपक्ष की ओर से ही नहीं था, बल्कि उनकी अपनी पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) के भीतर भी उनके खिलाफ बगावत के सुर तेज हो गए थे। पार्टी की पुणे शहर की वरिष्ठ महिला पदाधिकारियों ने उपमुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष की पत्नी सुनेत्रा पवार को पत्र लिखकर मांग की थी कि चाकणकर के कारण पार्टी की छवि धूमिल हो रही है। कार्यकर्ताओं का कहना था कि महिला आयोग जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठी महिला का नाम ऐसे गंभीर आरोपों वाले व्यक्ति के साथ जुड़ना पार्टी के सिद्धांतों के खिलाफ है। इसी आंतरिक दबाव और सुनेत्रा पवार के साथ हुई लंबी टेलीफोनिक बातचीत के बाद, चाकणकर ने आखिरकार महिला प्रदेशाध्यक्ष के पद से अपना इस्तीफा भेजने का निर्णय लिया।

अशोक खरात का मामला बेहद गंभीर बताया जा रहा है, जिसमें पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) अब तक 50 से अधिक ऐसी शिकायतों की जांच कर रही है जिनमें महिलाओं ने खरात पर धोखे और शोषण के आरोप लगाए हैं। पुलिस ने खरात के पास से आपत्तिजनक वीडियो और हथियार भी बरामद किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि चाकणकर ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अतीत में खरात के खिलाफ उठने वाली आवाजों को दबाने की कोशिश की थी। यही कारण था कि कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) ने सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से हस्तक्षेप की मांग की थी। अंततः, प्रशासनिक और राजनीतिक गरिमा को बनाए रखने के लिए चाकणकर को पहले सरकारी पद और फिर सांगठनिक पद छोड़ना पड़ा।

  • 'अशोक खरात' कौन है?

अशोक खरात एक पूर्व मर्चेंट नेवी अधिकारी है, जिसने बाद में खुद को अंकशास्त्र और ज्योतिष का विशेषज्ञ घोषित कर दिया था। उसने नाशिक जिले के सिन्नर में एक मंदिर ट्रस्ट की स्थापना की और शक्तिशाली राजनीतिक संपर्कों का लाभ उठाकर महिलाओं को आध्यात्मिक उपचार के नाम पर ठगने और शोषण करने का जाल बिछाया। वर्तमान में वह पुलिस कस्टडी में है और उस पर बलात्कार सहित कई गंभीर मामले दर्ज हैं।

इस्तीफे के बाद रूपाली चाकणकर ने सोशल मीडिया पर अपनी सफाई देते हुए कहा है कि उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वे एक सशक्त महिला नेत्री हैं। उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि खरात के किसी भी वित्तीय लेनदेन या उनके कुकर्मों से उनका दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि जब वे खरात के संपर्क में थीं, तब उनके अपराधी होने की कोई जानकारी समाज में नहीं थी। चाकणकर ने मुख्यमंत्री और गृह विभाग से इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है ताकि सच्चाई सबके सामने आ सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे जांच में पूरा सहयोग करेंगी, लेकिन बेबुनियाद आरोपों के कारण वे अपने स्वाभिमान से समझौता नहीं करेंगी।

इस घटनाक्रम ने अजित पवार गुट के भीतर की गुटबाजी को भी एक नया आयाम दे दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चाकणकर के इस्तीफे के पीछे पार्टी के ही कुछ बड़े नेताओं की सोची-समझी रणनीति भी हो सकती है, जो काफी समय से उन्हें किनारे करना चाहते थे। पुणे और पश्चिमी महाराष्ट्र में चाकणकर की मजबूत पकड़ रही है, लेकिन इस विवाद ने उनके राजनीतिक भविष्य पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। अब पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि महिला शाखा का नेतृत्व किसे सौंपा जाए, ताकि पार्टी की छवि को हुए नुकसान की भरपाई की जा सके। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के लिए यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

विपक्षी दलों ने अब इस मामले की जांच के दायरे को बढ़ाने की मांग की है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि केवल इस्तीफा देना काफी नहीं है, बल्कि यह भी जांच होनी चाहिए कि खरात के किन-किन मंत्रियों और प्रभावशाली लोगों के साथ संबंध थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इस 'ढोंगी बाबा' के दरबार में कई सत्ताधारी नेता हाजिरी लगाते थे और इसी संरक्षण के कारण उसने इतने वर्षों तक अपना गोरखधंधा चलाया। कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) और वित्तीय लेनदेन की जांच की मांग भी जोर पकड़ रही है। इस राजनीतिक घमासान के बीच महाराष्ट्र सरकार ने आश्वासन दिया है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और एसआईटी पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रही है।

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