मध्य प्रदेश की राजनीति में आधी रात को मचा घमासान, विधानसभा सचिवालय पहुंचे जीतू पटवारी ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गुरुवार की रात एक अभूतपूर्व राजनीतिक घटनाक्रम की गवाह बनी, जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी रात के

Apr 3, 2026 - 11:40
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मध्य प्रदेश की राजनीति में आधी रात को मचा घमासान, विधानसभा सचिवालय पहुंचे जीतू पटवारी ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप।
मध्य प्रदेश की राजनीति में आधी रात को मचा घमासान, विधानसभा सचिवालय पहुंचे जीतू पटवारी ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप।
  • कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता पर मंडराया संकट, रात के अंधेरे में फाइलें तैयार करने का विपक्षी दल ने किया दावा
  • लोकतंत्र की मर्यादाओं के उल्लंघन का मामला गरमाया, विधानसभा सचिवालय में भारी पुलिस बल और कांग्रेस नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गुरुवार की रात एक अभूतपूर्व राजनीतिक घटनाक्रम की गवाह बनी, जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी रात के करीब 10:00 बजे अचानक विधानसभा सचिवालय पहुँच गए। पटवारी के इस औचक दौरे से न केवल सचिवालय के कर्मचारियों में हड़कंप मच गया, बल्कि प्रशासनिक गलियारों में भी खलबली मच गई। कांग्रेस अध्यक्ष का सीधा आरोप था कि सत्ता पक्ष के इशारे पर नियम-कायदों को ताक पर रखकर रात के समय कार्यालय खोला गया है। उनके अनुसार, यह पूरी कवायद दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने के षड्यंत्र का हिस्सा है। रात के सन्नाटे में शुरू हुआ यह घटनाक्रम जल्द ही एक बड़े विरोध प्रदर्शन में बदल गया, जहाँ कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता सचिवालय के बाहर जमा हो गए।

घटनाक्रम के अनुसार, जीतू पटवारी को यह गुप्त सूचना मिली थी कि विधानसभा सचिवालय के कुछ अधिकारी और कर्मचारी अवकाश के समय में भी दफ्तर में बैठकर एक विशेष फाइल पर काम कर रहे हैं। जब पटवारी अपने सहयोगियों के साथ वहां पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि सचिवालय के भीतर हलचल मची हुई थी। पटवारी ने वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों और अधिकारियों से तीखे सवाल पूछे कि आखिर रात के इस पहर में ऐसी कौन सी आपातकालीन स्थिति आ गई है कि सचिवालय को खोलना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार डरी हुई है और राजेंद्र भारती जैसे मुखर विधायकों की आवाज दबाने के लिए असंवैधानिक तरीके अपना रही है। पटवारी ने इसे संसदीय परंपराओं का अपमान बताते हुए तत्काल स्पष्टीकरण की मांग की।

राजेंद्र भारती और कोर्ट का फैसला

कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता पर खतरे का मुख्य कारण एक पुराना आपराधिक मामला बताया जा रहा है, जिसमें हाल ही में अदालत का एक आदेश आया था। भाजपा का तर्क है कि कानून के अनुसार सजायाफ्ता होने के बाद सदस्यता स्वतः समाप्त हो जानी चाहिए, जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक द्वेष बता रही है।

विधानसभा सचिवालय के बाहर स्थिति उस समय और अधिक तनावपूर्ण हो गई जब पुलिस बल ने कांग्रेस नेताओं को भीतर जाने से रोकने का प्रयास किया। जीतू पटवारी ने वहां मौजूद मीडियाकर्मियों से बात करते हुए दावा किया कि सचिवालय के भीतर से फाइलें गायब की जा रही हैं या उनमें हेराफेरी की जा रही है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि यदि सब कुछ पारदर्शी है, तो विधानसभा अध्यक्ष या प्रमुख सचिव को इस गोपनीय कार्य के बारे में सदन को सूचित करना चाहिए था। कांग्रेस का तर्क है कि किसी भी विधायक की सदस्यता के संबंध में निर्णय लेने की एक निर्धारित प्रक्रिया होती है, जिसमें राज्यपाल और चुनाव आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, लेकिन यहाँ सीधे तौर पर सचिवालय के माध्यम से दबाव बनाया जा रहा है।

देर रात तक चले इस हंगामे के बीच सचिवालय के सूत्रों ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि कुछ नियमित प्रशासनिक कार्यों के कारण कर्मचारी वहां मौजूद थे, लेकिन कांग्रेस इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं दिखी। जीतू पटवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है कि विपक्ष के एक मजबूत विधायक को हटाने के लिए आधी रात को सचिवालय की सीढ़ियां चढ़ी जा रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि राजेंद्र भारती के खिलाफ कोई भी असंवैधानिक कदम उठाया गया, तो कांग्रेस सड़क से लेकर संसद तक आंदोलन करेगी। पटवारी ने मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष से इस पूरे मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ने और जनता के सामने सच रखने की मांग की।

राजेंद्र भारती, जो दतिया विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुए हैं, पिछले कुछ समय से सरकार की विभिन्न नीतियों और स्थानीय भ्रष्टाचार के मुद्दों पर बेहद हमलावर रहे हैं। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि भारती की सक्रियता से सत्ता पक्ष असहज महसूस कर रहा है, इसलिए उन्हें सदन से बाहर करने का रास्ता खोजा जा रहा है। सचिवालय पहुँचने के बाद जीतू पटवारी ने राज्यपाल मंगू भाई पटेल से भी संपर्क करने की कोशिश की ताकि उन्हें इस स्थिति से अवगत कराया जा सके। कांग्रेस का आरोप है कि विधानसभा सचिवालय जैसी निष्पक्ष संस्था का राजनीतिकरण किया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए एक खतरनाक संकेत है।

विरोध प्रदर्शन के दौरान सचिवालय परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी। जीतू पटवारी के साथ मौजूद विधायक दल के अन्य सदस्यों ने भी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग अब अपनी सीमाएं लांघ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि फाइलें तैयार करने वाले अधिकारियों को भारी प्रलोभन या दबाव दिया गया है ताकि वे रात भर में रिपोर्ट तैयार कर सकें। इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की सियासत में एक नया अध्याय जोड़ दिया है, जहाँ अब दिन के साथ-साथ रातों में भी राजनीतिक युद्ध लड़ा जा रहा है।

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