सूरीनाम के पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिकाप्रसाद संतोखी का निधन: 1982 की राजनीतिक हत्याओं की जांच करने वाले 'शेरिफ' ने ली अंतिम सांस।

चंद्रिकाप्रसाद संतोखी का जन्म 3 फरवरी 1959 को सूरीनाम के वानिका जिले में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय स्तर पर पूरी करने के

Mar 31, 2026 - 12:57
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सूरीनाम के पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिकाप्रसाद संतोखी का निधन: 1982 की राजनीतिक हत्याओं की जांच करने वाले 'शेरिफ' ने ली अंतिम सांस।
सूरीनाम के पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिकाप्रसाद संतोखी का निधन: 1982 की राजनीतिक हत्याओं की जांच करने वाले 'शेरिफ' ने ली अंतिम सांस।
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चंद्रिकाप्रसाद संतोखी का जन्म 3 फरवरी 1959 को सूरीनाम के वानिका जिले में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय स्तर पर पूरी करने के बाद नीदरलैंड में पुलिस अकादमी से प्रशिक्षण प्राप्त किया। 1982 में जब वे अपनी शिक्षा पूरी कर स्वदेश लौटे, तब सूरीनाम एक कठिन दौर से गुजर रहा था। उन्होंने पुलिस बल में एक इंस्पेक्टर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की और अपनी कर्तव्यनिष्ठा के बल पर 1991 तक पुलिस कमिश्नर के पद तक पहुंचे। उनके शुरुआती करियर के दौरान ही देश में सैन्य तख्तापलट और उसके बाद की अस्थिरता का दौर देखा गया, जिसने उन्हें कानून के शासन के प्रति और अधिक प्रतिबद्ध बना दिया।

संतोखी के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण अध्याय 1982 की राजनीतिक हत्याओं की जांच से जुड़ा है। दिसंबर 1982 में तत्कालीन सैन्य शासक देसी बुटर्से के शासनकाल के दौरान 15 प्रमुख राजनीतिक विरोधियों, जिनमें पत्रकार, वकील और व्यापारी शामिल थे, की नृशंस हत्या कर दी गई थी। वर्षों तक इस मामले को दबाए रखने की कोशिश की गई, लेकिन संतोखी ने पुलिस कमिश्नर और बाद में न्याय मंत्री के रूप में इस मामले की फाइलें फिर से खुलवाईं। उन्होंने बिना किसी डर के शक्तिशाली सैन्य अधिकारियों और खुद बुटर्से के खिलाफ साक्ष्य जुटाए, जिसके कारण अंततः बुटर्से को 20 साल कारावास की सजा सुनाई गई।

राजनीति में संतोखी का प्रवेश देश की न्याय व्यवस्था को और मजबूत करने के उद्देश्य से हुआ था। 2005 में वे न्याय और पुलिस मंत्री बने, जहाँ उनके सख्त रवैये और अपराध के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की नीति के कारण उन्हें 'शेरिफ' का उपनाम मिला। उन्होंने नशीली दवाओं की तस्करी और संगठित अपराध के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाया। उनकी राजनीतिक सूझबूझ ने उन्हें प्रोग्रेसिव रिफॉर्म पार्टी (VHP) का नेतृत्व करने का अवसर दिया और 2020 में वे भारी जनसमर्थन के साथ सूरीनाम के नौवें राष्ट्रपति चुने गए। उनका राष्ट्रपति कार्यकाल आर्थिक सुधारों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को फिर से पटरी पर लाने के लिए समर्पित रहा। चंद्रिकाप्रसाद संतोखी भारतीय मूल के थे और उन्होंने हमेशा सूरीनाम और भारत के बीच सांस्कृतिक व कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्हें भारत सरकार द्वारा 'प्रवासी भारतीय सम्मान' से भी नवाजा गया था।

राष्ट्रपति के रूप में संतोखी को एक ऐसा देश विरासत में मिला था जो आर्थिक रूप से दिवालिया होने की कगार पर था। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ मिलकर कड़े आर्थिक सुधार लागू किए, जो हालांकि जनता के लिए कुछ समय के लिए कठिन रहे, लेकिन उन्होंने देश की मुद्रा को स्थिरता प्रदान की। उनके कार्यकाल के दौरान ही सूरीनाम के तटों पर तेल के बड़े भंडारों की खोज हुई, जिससे देश की किस्मत बदलने की उम्मीद जगी। उन्होंने हमेशा यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि देश के संसाधनों का लाभ आने वाली पीढ़ियों को पारदर्शी तरीके से मिले, न कि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाए।

उनके निधन की खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। नीदरलैंड के प्रधानमंत्री और अन्य कैरिबियाई देशों के नेताओं ने उन्हें एक ऐसा नेता बताया जिसने हमेशा न्याय को राजनीति से ऊपर रखा। संतोखी का व्यक्तित्व ऐसा था कि उनके कट्टर राजनीतिक विरोधी भी उनकी कार्यक्षमता का सम्मान करते थे। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम वर्षों तक देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने के लिए काम किया। उनकी मृत्यु को सूरीनाम के इतिहास के एक गौरवशाली अध्याय का अंत माना जा रहा है, जिसने एक छोटे से राष्ट्र को कानून की सर्वोच्चता का पाठ पढ़ाया। संतोखी की विरासत केवल उनकी राजनीतिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सामाजिक समरसता के भी प्रतीक थे। सूरीनाम जैसे बहु-जातीय देश में, उन्होंने विभिन्न समुदायों के बीच सेतु का काम किया। वे अक्सर कहते थे कि न्याय केवल अदालतों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह समाज के हर वर्ग के लिए सुलभ होना चाहिए। उनके प्रयासों का ही परिणाम था कि दशकों पुराने घाव भरने शुरू हुए और पीड़ितों के परिवारों को यह विश्वास हुआ कि कानून की नजर में कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, दोषी होने पर बच नहीं सकता।

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