गुजरात की शराबबंदी नीति में ऐतिहासिक बदलाव, महात्मा गांधी की जन्मस्थली पोरबंदर में होटलों को मिली शराब परोसने की अनुमति।

गुजरात राज्य, जो दशकों से अपनी सख्त शराबबंदी नीति के लिए पूरे देश में जाना जाता है, अब अपनी आर्थिक और पर्यटन संबंधी प्राथमिकताओं

Apr 3, 2026 - 11:07
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गुजरात की शराबबंदी नीति में ऐतिहासिक बदलाव, महात्मा गांधी की जन्मस्थली पोरबंदर में होटलों को मिली शराब परोसने की अनुमति।
गुजरात की शराबबंदी नीति में ऐतिहासिक बदलाव, महात्मा गांधी की जन्मस्थली पोरबंदर में होटलों को मिली शराब परोसने की अनुमति।
  • पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए गिफ्ट सिटी के बाद पोरबंदर बना दूसरा केंद्र, अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने की बड़ी योजना
  • स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के नए अवसर खोलने की तैयारी, जामनगर और जूनागढ़ की ओर रुख करने वाले पर्यटकों को रोकने का प्रयास

गुजरात राज्य, जो दशकों से अपनी सख्त शराबबंदी नीति के लिए पूरे देश में जाना जाता है, अब अपनी आर्थिक और पर्यटन संबंधी प्राथमिकताओं के अनुरूप इस नीति में महत्वपूर्ण संशोधन कर रहा है। गांधीनगर स्थित गिफ्ट सिटी (गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी) में शराब परोसने की छूट देने के सफल प्रयोग के बाद, राज्य सरकार ने अब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जन्मस्थली पोरबंदर में भी शराब की बिक्री और उपभोग की अनुमति देने का साहसिक निर्णय लिया है। इस फैसले के तहत पोरबंदर के चुनिंदा होटलों और रेस्तरां को लाइसेंस जारी किए जाएंगे, जहाँ पर्यटक और आगंतुक शराब का सेवन कर सकेंगे। सरकार का यह कदम पोरबंदर को एक प्रमुख वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है, क्योंकि अब तक यहाँ शराबबंदी के सख्त नियमों के कारण अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उच्च-आय वाले पर्यटक ठहरने से कतराते थे।

पोरबंदर जिला राजनीतिक और सांस्कृतिक रूप से गुजरात का एक अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है। यहाँ से वर्तमान में केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया सांसद हैं और राज्य सरकार के कद्दावर कैबिनेट मंत्री अर्जुन मोढ़वाडिया का भी यह गृह क्षेत्र है। इन बड़े नेताओं की उपस्थिति और क्षेत्र के विकास की मांग को देखते हुए सरकार ने यह महसूस किया कि पोरबंदर की भौगोलिक स्थिति और इसके सुंदर समुद्र तटों के बावजूद, यहाँ पर्यटन उद्योग अपेक्षा के अनुरूप प्रगति नहीं कर पा रहा था। आंकड़ों के अनुसार, पोरबंदर आने वाले अधिकांश पर्यटक केवल दिन भर के लिए रुकते थे और शाम होते ही जामनगर या जूनागढ़ जैसे पड़ोसी जिलों की ओर प्रस्थान कर जाते थे, जहाँ ठहरने और मनोरंजन की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध थीं। अब नए नियमों के लागू होने से होटलों में प्रवास करने वाले लोगों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय व्यापार को सीधा लाभ होगा।

गांधीवादी मूल्यों और पर्यटन का संतुलन

महात्मा गांधी की जन्मस्थली होने के कारण पोरबंदर में शराब की अनुमति देना एक संवेदनशील विषय रहा है। हालांकि, सरकार का तर्क है कि यह छूट केवल लाइसेंस प्राप्त परिसरों और बाहरी पर्यटकों के लिए है, ताकि स्थानीय मर्यादा बनी रहे और साथ ही क्षेत्र का आर्थिक विकास भी हो सके। यह कदम 'आर्थिक प्रगति बनाम परंपरा' के बीच एक संतुलन बनाने का प्रयास है।

राज्य के पर्यटन विभाग द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार, पोरबंदर में विदेशी सैलानियों की आमद काफी अधिक है, लेकिन बुनियादी ढांचे और शराबबंदी के कारण वे यहाँ रुकने के बजाय अन्य गंतव्यों को चुनते थे। होटल व्यवसायियों ने लंबे समय से मांग की थी कि यदि पोरबंदर को अंतरराष्ट्रीय स्तर का पर्यटन स्थल बनाना है, तो नियमों में ढील देना अनिवार्य है। सरकार ने अब इस मांग को स्वीकार करते हुए 'वाइब्रेंट गुजरात' के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए इसे आवश्यक बताया है। नई नीति के तहत, केवल उन होटलों को परमिट दिए जाएंगे जो सुरक्षा और मानकों की कड़ी शर्तों को पूरा करेंगे। इससे न केवल पर्यटन राजस्व में वृद्धि होगी, बल्कि आतिथ्य सत्कार (हॉस्पिटैलिटी) क्षेत्र में हजारों नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

शराबबंदी कानून में इस छूट का एक बड़ा उद्देश्य अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगाना भी है। अक्सर देखा गया है कि सख्त प्रतिबंधों के बावजूद चोरी-छिपे शराब की आपूर्ति होती रहती है, जिससे राजस्व की हानि होती है और कानून-व्यवस्था की स्थिति भी प्रभावित होती है। पोरबंदर जैसे तटीय शहर में, जहाँ समुद्र के रास्ते व्यापारिक गतिविधियां होती हैं, वैध तरीके से शराब की उपलब्धता सुनिश्चित करने से भ्रष्टाचार और अवैध तस्करी में कमी आने की संभावना है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीना अभी भी प्रतिबंधित रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पहले की तरह ही कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह अनुमति केवल अधिकृत होटलों के भीतर 'वाइल्ड कार्ड' या 'परमिट' धारकों के लिए ही मान्य होगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अर्जुन मोढ़वाडिया और मनसुख मांडविया जैसे प्रभावशाली नेताओं के क्षेत्र में इस तरह का बदलाव राज्य सरकार के भविष्य के विजन को दर्शाता है। वे चाहते हैं कि पोरबंदर केवल एक तीर्थ स्थल बनकर न रहे, बल्कि आधुनिक सुविधाओं से युक्त एक ऐसा शहर बने जहाँ दुनिया भर के निवेशक और पर्यटक आ सकें। पोरबंदर के पास स्थित तटों को ब्लू फ्लैग सर्टिफिकेशन दिलाने और वहां अंतरराष्ट्रीय रिसॉर्ट्स विकसित करने की योजना भी पाइपलाइन में है। ऐसे में शराब की उपलब्धता उन वैश्विक मानदंडों को पूरा करने में मदद करेगी जो एक प्रीमियम टूरिस्ट डेस्टिनेशन के लिए जरूरी माने जाते हैं। स्थानीय व्यापारियों ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि इससे पोरबंदर की रात की अर्थव्यवस्था (नाइट इकोनॉमी) को बल मिलेगा।

पोरबंदर के स्थानीय प्रशासन ने अब उन होटलों की सूची तैयार करना शुरू कर दिया है जो शराब परोसने के लिए लाइसेंस के पात्र हो सकते हैं। पुलिस विभाग को भी विशेष निर्देश दिए गए हैं कि वे पर्यटकों की सुरक्षा और शराब के सेवन के बाद होने वाली किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए अतिरिक्त गश्त की व्यवस्था करें। उत्पाद शुल्क विभाग के अधिकारियों को पोरबंदर में तैनात किया जा रहा है ताकि वे लाइसेंसिंग प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा कर सकें। सरकार की योजना है कि इस मॉडल की सफलता के बाद राज्य के अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे कच्छ के रण और सोमनाथ के आसपास के कुछ क्षेत्रों में भी इसी तरह की रियायतें दी जा सकती हैं, जिससे गुजरात की छवि एक आधुनिक और पर्यटन अनुकूल राज्य के रूप में उभरे।

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