मालदा में चुनावी प्रक्रिया के दौरान भारी बवाल, सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने के आरोप में बड़ी कार्रवाई।

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में हाल ही में चुनावी प्रक्रियाओं और मतदाता सूची में संशोधन को लेकर जबरदस्त तनाव का माहौल बन गया। इस

Apr 3, 2026 - 12:19
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मालदा में चुनावी प्रक्रिया के दौरान भारी बवाल, सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने के आरोप में बड़ी कार्रवाई।
मालदा में चुनावी प्रक्रिया के दौरान भारी बवाल, सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने के आरोप में बड़ी कार्रवाई।
  • पश्चिम बंगाल के मालदा में हिंसक प्रदर्शन के बाद पुलिस का एक्शन, अब तक 18 उपद्रवी गिरफ्तार, सुरक्षा बल तैनात
  • मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया पर उपजा विवाद बना हिंसा का कारण, सुप्रीम कोर्ट ने भी प्रशासन की भूमिका पर जताई कड़ी नाराजगी

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में हाल ही में चुनावी प्रक्रियाओं और मतदाता सूची में संशोधन को लेकर जबरदस्त तनाव का माहौल बन गया। इस विवाद ने तब हिंसक रूप ले लिया जब कालियाचक इलाके में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने एक सरकारी कार्यालय को घेर लिया। प्राथमिक जानकारी के अनुसार, यह पूरा विवाद विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से कथित तौर पर नाम हटाए जाने को लेकर शुरू हुआ था। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि योग्य मतदाताओं के नाम जानबूझकर सूची से बाहर कर दिए गए हैं। स्थिति उस समय नियंत्रण से बाहर हो गई जब भीड़ ने कालियाचक-2 ब्लॉक विकास कार्यालय में मौजूद सात न्यायिक अधिकारियों को कई घंटों तक बंधक बना लिया। इन अधिकारियों में तीन महिला अधिकारी भी शामिल थीं, जिन्हें बिना भोजन और पानी के घंटों तक एक कमरे में बंद रहना पड़ा।

इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक कुल 18 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की विशेष टीमें वीडियो फुटेज और सीसीटीवी साक्ष्यों के आधार पर अन्य दोषियों की पहचान करने में जुटी हुई हैं। जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। पकड़े गए व्यक्तियों पर सरकारी काम में बाधा डालने, अधिकारियों को बंधक बनाने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और दंगा भड़काने जैसी गंभीर धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है, ताकि फिर से ऐसी किसी अप्रिय घटना की पुनरावृत्ति न हो सके।

न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा पर संकट

मालदा की इस घटना ने चुनावी ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे 'अत्यंत गंभीर' बताया है और राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) व मुख्य सचिव से जवाब तलब किया है। अदालत ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर प्रहार करार दिया है।

घटनाक्रम के विस्तार पर गौर करें तो पता चलता है कि प्रदर्शनकारियों ने न केवल अधिकारियों को बंधक बनाया, बल्कि राष्ट्रीय राजमार्ग-12 (कोलकाता-सिलीगुड़ी मार्ग) को भी घंटों तक बाधित रखा। सड़क पर टायर जलाकर और बांस के अवरोधक लगाकर यातायात पूरी तरह ठप कर दिया गया था। देर रात जब सुरक्षा बलों ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, तो प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरे को तोड़ने की कोशिश की और अधिकारियों के वाहनों पर पथराव भी किया। पुलिस को स्थिति पर काबू पाने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा, जिसके बाद न्यायिक अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका। प्रशासन का कहना है कि भीड़ का व्यवहार पूरी तरह से नियोजित प्रतीत हो रहा था, जिसका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करना था।

मालदा में हुई इस हिंसा के पीछे के तकनीकी कारणों की जांच के लिए चुनाव आयोग ने भी कड़े निर्देश जारी किए हैं। बताया जा रहा है कि विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया के दौरान कुछ तकनीकी त्रुटियों या सत्यापन के अभाव में स्थानीय लोगों के नाम कट गए थे, जिससे आक्रोश भड़क उठा। हालांकि, प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम कटे हैं, उन्हें चार दिनों के भीतर पुनः जोड़ने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इस आश्वासन के बाद ही प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम हटाया था। लेकिन तब तक हिंसा ने व्यापक रूप ले लिया था और कई पुलिस वाहनों को भी क्षति पहुँची थी।

राजनीतिक गलियारों में भी इस घटना को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। राज्य सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम के पीछे राजनीतिक साजिश होने की आशंका जताई है, जबकि विपक्षी दलों ने इसे राज्य की कानून-व्यवस्था की विफलता बताया है। शासन का तर्क है कि कुछ तत्व जानबूझकर अशांति फैलाना चाहते हैं ताकि चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सके। दूसरी ओर, अदालती टिप्पणियों में इसे प्रशासनिक तंत्र की "पूर्ण विफलता" माना गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि राज्य प्रशासन अधिकारियों को सुरक्षा देने में सक्षम नहीं है, तो केंद्रीय बलों की मदद ली जानी चाहिए। अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में मालदा के प्रभावित इलाकों में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन तनाव अभी भी बना हुआ है।

प्रशासन अब सोशल मीडिया पर भी पैनी नजर रख रहा है क्योंकि ऐसी खबरें मिली थीं कि भ्रामक सूचनाओं और अफवाहों के कारण ही भीड़ इतनी उग्र हुई थी। पुलिस के आईटी सेल को सक्रिय कर दिया गया है ताकि गलत जानकारी फैलाने वालों पर कार्रवाई की जा सके। गिरफ्तार किए गए 18 लोगों से पूछताछ जारी है ताकि इस साजिश की जड़ों तक पहुँचा जा सके। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस भीड़ को किसी बाहरी शक्ति द्वारा उकसाया गया था या यह केवल स्थानीय आक्रोश का परिणाम था। आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है क्योंकि पुलिस के पास घटना के समय के पर्याप्त डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं।

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