अमरोहा में पशु क्रूरता की पराकाष्ठा: कैंटर में दम घुटने से 44 गोवंशों की दर्दनाक मौत, इलाके में भारी आक्रोश।
उत्तर प्रदेश के अमरोहा जनपद में पशु क्रूरता और अवैध तस्करी का एक ऐसा भयावह मामला सामने आया है जिसने मानवता को शर्मसार कर
- तस्करी के खूनी खेल का पर्दाफाश: पुलिस ने घेराबंदी कर दबोचे तीन आरोपित, कैंटर के भीतर का मंजर देख कांप गई रूह
- बेजुबानों की सामूहिक हत्या से सनसनी: मुरादाबाद-दिल्ली हाईवे पर पकड़ी गई मौत की गाड़ी, प्रशासन ने शुरू की कठोर दंडात्मक कार्रवाई
उत्तर प्रदेश के अमरोहा जनपद में पशु क्रूरता और अवैध तस्करी का एक ऐसा भयावह मामला सामने आया है जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। जनपद के डिडौली कोतवाली क्षेत्र में पुलिस ने एक कैंटर को पकड़ा जिसमें क्षमता से कहीं अधिक गोवंशों को बेहद अमानवीय तरीके से ठूंस-ठूंस कर भरा गया था। इस क्रूरता का परिणाम इतना आत्मघाती रहा कि हवा की कमी और आपसी दबाव के कारण दम घुटने से कुल 44 गोवंशों की मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई। जब पुलिस ने कैंटर के पिछले हिस्से का दरवाजा खोला, तो भीतर का नजारा देख अधिकारियों के भी होश उड़ गए। मृत मवेशी एक-दूसरे के ऊपर लदे हुए थे और कुछ जो जीवित बचे थे, उनकी स्थिति भी मरणासन्न बनी हुई थी। यह घटना न केवल अवैध तस्करी के फलते-फूलते नेटवर्क की ओर इशारा करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि तस्कर चंद रुपयों के लालच में बेजुबानों की जान के साथ किस कदर खिलवाड़ करते हैं।
पुलिस विभाग को मुखबिर के जरिए सूचना मिली थी कि मुरादाबाद-दिल्ली नेशनल हाईवे के रास्ते एक बड़े वाहन में गोवंशों की तस्करी की जा रही है। सूचना मिलते ही डिडौली कोतवाली पुलिस ने घेराबंदी शुरू कर दी। जैसे ही संदिग्ध कैंटर वहां से गुजरा, पुलिस ने उसे रुकने का इशारा किया, लेकिन चालक ने वाहन की रफ्तार और तेज कर दी। काफी दूर तक पीछा करने के बाद पुलिस ने कैंटर को जबरन रुकवाया। वाहन रुकते ही उसमें सवार कुछ लोगों ने भागने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस की मुस्तैदी के कारण तीन आरोपितों को मौके पर ही धर दबोचा गया। पुलिस के अनुसार, कैंटर को चारों ओर से तिरपाल से मजबूती से ढका गया था ताकि बाहर से किसी को संदेह न हो सके। जैसे ही तिरपाल हटाया गया, अंदर से आती बदबू और मवेशियों की खामोशी ने आने वाले संकट का संकेत दे दिया था।
कैंटर के भीतर गोवंशों को दो से तीन परतों में बांधकर रखा गया था। तस्करी की इस तकनीक में जानवरों के पैर और मुंह इस तरह बांधे जाते हैं कि वे हिल-डुल न सकें और कोई आवाज न कर सकें। इस बंद वाहन के भीतर ऑक्सीजन का स्तर इतना गिर गया था कि गोवंशों का दम घुटने लगा। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि यह वाहन काफी लंबी दूरी तय कर चुका था और रास्ते में कहीं भी हवा या पानी का इंतजाम नहीं किया गया था। मवेशियों की इतनी बड़ी संख्या में मौत होना यह दर्शाता है कि तस्करों को उनके जीवित रहने या मरने से कोई सरोकार नहीं था, उनका एकमात्र उद्देश्य माल को ठिकाने लगाना था। पुलिस ने तुरंत पशुपालन विभाग के डॉक्टरों की टीम को मौके पर बुलाया ताकि जीवित बचे मवेशियों का उपचार किया जा सके और मृत गोवंशों का विधिवत पोस्टमार्टम कराया जा सके।
क्रूरता की कोई सीमा नहीं
तस्करी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले इन वाहनों को विशेष रूप से 'डेथ ट्रैप' (मौत का जाल) के रूप में तैयार किया जाता है। इनमें गुप्त केबिन बनाए जाते हैं ताकि पुलिस की सामान्य चेकिंग से बचा जा सके। अमरोहा की यह घटना इस बात का प्रमाण है कि तस्करों के भीतर कानून और जीव रक्षा का कोई डर शेष नहीं रहा है। पकड़े गए तीनों आरोपितों से जब पुलिस ने पूछताछ की, तो उन्होंने कई चौंकाने वाले राज उगले। आरोपितों ने स्वीकार किया कि वे इन गोवंशों को दूसरे राज्य में वध के लिए ले जा रहे थे। गिरफ्तार किए गए आरोपितों के नाम और पते की तस्दीक की जा रही है, जिनमें से कुछ के तार अंतरराज्यीय तस्करी गिरोहों से जुड़े होने की प्रबल संभावना है। पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और गोवंश निवारण अधिनियम की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। इसके साथ ही, उस वाहन के मालिक की भी तलाश की जा रही है जिसका उपयोग इस जघन्य अपराध में किया गया। पुलिस महानिरीक्षक और वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में अपराधियों पर एनएसए (NSA) जैसी कठोर कार्रवाई करने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि भविष्य में कोई ऐसी हिमाकत न कर सके।
घटना की जानकारी मिलते ही विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों के लोग मौके पर पहुंच गए और उन्होंने इस क्रूरता के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। स्थानीय निवासियों में इस बात को लेकर भारी गुस्सा है कि हाईवे पर इतनी मुस्तैदी के बावजूद तस्कर इतनी बड़ी संख्या में मवेशियों को लेकर कैसे निकल रहे थे। प्रशासन ने स्थिति को बिगड़ने से बचाने के लिए मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है। मृत 44 गोवंशों के शवों को बड़े सम्मान के साथ गड्ढा खोदकर दफनाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। नगर पालिका और राजस्व विभाग की टीमें जेसीबी की मदद से इस कार्य को पूरा करने में जुटी हैं। यह एक सामूहिक नरसंहार जैसा प्रतीत हो रहा है, जिसने पूरे अमरोहा जनपद में शोक और आक्रोश की लहर पैदा कर दी है।
पशुपालन विभाग के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत के सही कारणों का तकनीकी विवरण प्राप्त होगा, हालांकि प्राथमिक रूप से यह स्पष्ट है कि 'एस्फिक्सिया' (दम घुटना) ही मुख्य कारण रहा है। जीवित बचे हुए मवेशियों को पास की एक सरकारी गौशाला में स्थानांतरित कर दिया गया है, जहां उनकी सघन निगरानी की जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार, बचे हुए मवेशी भी गहरे सदमे में हैं और उनमें से कुछ की हालत अभी भी चिंताजनक है। प्रशासन अब उन रास्तों की मैपिंग कर रहा है जहां से ये तस्कर गुजरे थे, ताकि सुरक्षा की खामियों को सुधारा जा सके। पुलिस सीसीटीवी कैमरों के जरिए भी तस्करों के पूरे रूट को ट्रैक करने की कोशिश कर रही है ताकि इस सिंडिकेट के अन्य सदस्यों तक पहुंचा जा सके।
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