Hardoi: राम-कौशल्या पर अभद्र टिप्पणी में जेल जा चुका वाईएल वर्मा, अब करोड़ों की सरकारी जमीन पर कब्जे के आरोपों में घिरा। 

धार्मिक टिप्पणी से लेकर जमीन विवाद तक" माता कौशल्या और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम पर कथित अभद्र टिप्पणी के मामले में जेल

Apr 3, 2026 - 18:47
Apr 3, 2026 - 21:54
 0  1
Hardoi: राम-कौशल्या पर अभद्र टिप्पणी में जेल जा चुका वाईएल वर्मा, अब करोड़ों की सरकारी जमीन पर कब्जे के आरोपों में घिरा। 
राम-कौशल्या पर अभद्र टिप्पणी में जेल जा चुका वाईएल वर्मा, अब करोड़ों की सरकारी जमीन पर कब्जे के आरोपों में घिरा। 

रिपोर्ट- विकास मिश्र

सवायजपुर (हरदोई)। धार्मिक टिप्पणी से लेकर जमीन विवाद तक" माता कौशल्या और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम पर कथित अभद्र टिप्पणी के मामले में जेल जा चुका वाईएल वर्मा एक बार फिर विवादों में हैं। इस बार मामला ग्राम समाज की करोड़ों रुपये की जमीन पर कथित कब्जे से जुड़ा है, जिसने प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है।

  •  1975 में कॉलेज की स्थापना, जमीन पर सवाल 

स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्ष 1975 के आसपास भोपतपुर नगला में ग्राम समाज की भूमि पर “जनता इंटर कॉलेज” की स्थापना की गई। आरोप है कि यह निर्माण सरकारी जमीन पर कब्जा कर किया गया, जिसे लेकर अब राजस्व रिकॉर्ड भी सवाल खड़े कर रहे हैं।

  •  भूलेख में 7.79 हेक्टेयर और 15 खसरों का जिक्र 

भूलेख पोर्टल के अनुसार, विवादित भूमि करीब 7.7957 हेक्टेयर में फैली है और इसमें 15 खसरे दर्ज हैं। जमीन की श्रेणी 1-क (संक्रमणीय अधिकार) बताई गई है। वर्ष 1999 में तहसीलदार न्यायालय कटियारी के आदेशों के आधार पर इस भूमि का नामांतरण विभिन्न व्यक्तियों के नाम किया गया था।

  •  पुराने अभिलेखों से सरकारी जमीन होने के संकेत 

आकार पत्र-45 जैसे पुराने हस्तलिखित दस्तावेजों में संबंधित खसरों का उल्लेख मिलता है, जो 1975 के आसपास इस भूमि के सरकारी स्वरूप की ओर इशारा करते हैं। 1999 में हुए नामांतरण आदेश अब जांच के दायरे में आ सकते हैं।

  •  पहले भी विवादों में रहा नाम 

सूत्रों का दावा है कि वर्मा पहले एक इंटर कॉलेज में शिक्षक थे, लेकिन कथित सनातन विरोधी गतिविधियों के चलते उन्हें पद से हटा दिया गया था। इसके बाद उन्होंने स्थानीय सहयोग से नए कॉलेज की स्थापना की। प्रबंधन में रिश्तेदारों की भूमिका को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।

  •  परिवार का प्रभाव और चुनावी टकराव 

क्षेत्र में वर्मा परिवार के प्रभाव की चर्चा होती रही है। पंचायत चुनावों के दौरान उम्मीदवारों को लेकर विवाद और मतदान के समय तनाव की घटनाएं सामने आई थीं, जिनमें विरोध करने वालों पर कार्रवाई के आरोप लगे।

  •  प्रशासन का रुख—आपत्ति पर होगी जांच 

तहसील प्रशासन का कहना है कि संबंधित भूमि पहले “नवीन परती” के रूप में दर्ज थी। तहसीलदार सवायजपुर के अनुसार, यदि कोई औपचारिक आपत्ति दी जाती है तो पूरे मामले की जांच कराई जाएगी।

  •  क्या होती है ‘मशरूक’/गैर-मजरूआ भूमि 

राजस्व नियमों के अनुसार, ‘मशरूक’ या ‘गैर-मजरूआ’ भूमि सरकारी स्वामित्व की होती है, जिसका उपयोग सार्वजनिक हित—जैसे चरागाह, रास्ता या अन्य सामुदायिक कार्यों—के लिए किया जाता है। इस पर निजी स्वामित्व मान्य नहीं होता।

  •  जांच के बाद ही साफ होगी तस्वीर 

फिलहाल, यह मामला सरकारी जमीन, नामांतरण प्रक्रिया और स्थानीय प्रभाव को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब संभावित जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है।

Also Read- सीबीडीटी का बड़ा फैसला: पैन कार्ड सुधार के लिए अब भरने होंगे नए फॉर्म, जानें 1 अप्रैल 2026 से क्या बदला?

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow