सरकारी बंगलों पर कब्जा जमाए पूर्व मंत्रियों और अफसरों को बंगला खाली करने के आदेश, नहीं माने तो वसूलेंगे 30 गुना किराया। 

मध्यप्रदेश सरकार ने पात्रता समाप्त होने के बाद भी सरकारी बंगलों पर अवैध कब्जा जमाए रखने वाले पूर्व मंत्रियों, पूर्व विधायकों तथा वरिष्ठ अधिकारियों के

Jan 10, 2026 - 11:20
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सरकारी बंगलों पर कब्जा जमाए पूर्व मंत्रियों और अफसरों को बंगला खाली करने के आदेश, नहीं माने तो वसूलेंगे 30 गुना किराया। 
सरकारी बंगलों पर कब्जा जमाए पूर्व मंत्रियों और अफसरों को बंगला खाली करने के आदेश, नहीं माने तो वसूलेंगे 30 गुना किराया। 

मध्यप्रदेश सरकार ने पात्रता समाप्त होने के बाद भी सरकारी बंगलों पर अवैध कब्जा जमाए रखने वाले पूर्व मंत्रियों, पूर्व विधायकों तथा वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। संपदा संचालनालय द्वारा इन सभी व्यक्तियों को नोटिस जारी किए गए हैं, जिसमें बंगला तत्काल खाली करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। यदि नोटिस का पालन नहीं किया जाता है तो जबरन बेदखली की कार्रवाई की जाएगी और साथ ही निर्धारित किराए का 30 गुना तक हर्जाना वसूला जाएगा। यह निर्णय सरकार द्वारा सरकारी आवासों के नियमों का पालन सुनिश्चित करने तथा अवैध कब्जे को समाप्त करने के उद्देश्य से लिया गया है।

सरकारी बंगलों का आवंटन तथा रखरखाव मुख्य रूप से संपदा संचालनालय तथा लोक निर्माण विभाग के माध्यम से किया जाता है। नियमों के अनुसार, पात्रता समाप्त होने के बाद एक निश्चित अवधि तक ही सरकारी आवास में रहने की अनुमति होती है। इसके बाद आवास खाली करना अनिवार्य होता है। लेकिन कई पूर्व मंत्रियों तथा अधिकारियों ने चुनाव हारने, सेवानिवृत्त होने या स्थानांतरण के बाद भी बंगलों को खाली नहीं किया, जिससे नए पदाधिकारियों तथा कर्मचारियों को आवास उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। राजधानी भोपाल में चार इमली, 74 बंगला तथा अन्य पॉश क्षेत्रों में स्थित ये बंगले लंबे समय से ऐसे कब्जों से प्रभावित रहे हैं।

सरकार ने मंत्रिपरिषद की बैठक में इस संबंध में सख्त प्रावधानों को मंजूरी प्रदान की है। नए नियमों के तहत पात्रता समाप्ति के पहले तीन महीने तक सामान्य किराया लागू रहेगा। अगले तीन महीनों में किराया दस गुना तक बढ़ाया जा सकता है। यदि छह महीने के बाद भी बंगला खाली नहीं किया जाता है तो 30 गुना तक का पेनल्टी किराया वसूल किया जाएगा। इसके साथ ही बेदखली की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसमें आवश्यकता पड़ने पर बल प्रयोग भी किया जा सकता है। यह कदम सरकारी संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने तथा नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

कई विशिष्ट मामलों में नोटिस जारी किए गए हैं। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के परिवार को 74 बंगला क्षेत्र में स्थित बी-टाइप आवास खाली करने के लिए निश्चित तिथि तक का समय दिया गया है। इसी प्रकार पूर्व राजस्व मंत्री को लिंक रोड-1 पर स्थित सी-15 बंगला खाली करने का नोटिस मिला है। पूर्व गृह मंत्री, पूर्व सहकारिता मंत्री तथा अन्य पूर्व मंत्रियों के नाम भी इस सूची में शामिल हैं, जो 2023 विधानसभा चुनाव में हारने के बावजूद बंगलों पर कब्जा बनाए हुए हैं। कुछ पूर्व मंत्रियों ने चुनाव नहीं लड़ा लेकिन पुराने आवंटित बंगलों में निवास जारी रखा है।

सख्ती केवल राजनीतिक व्यक्तियों तक सीमित नहीं है। कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों तथा अन्य राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को भी नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें कुछ नामों को सेवानिवृत्ति या स्थानांतरण के बाद भी बंगलों को खाली न करने के लिए चिह्नित किया गया है। अधिकारियों की सूची में आईएएस स्तर के साथ-साथ अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हैं। इन सभी को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि स्वेच्छा से बंगला खाली करें, अन्यथा प्रशासनिक बल के माध्यम से कब्जा मुक्त कराया जाएगा।

यह कार्रवाई सरकारी आवासों की उपलब्धता बढ़ाने तथा लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। भोपाल में सैकड़ों सरकारी आवास अवैध रूप से कब्जे में हैं, जिससे हजारों कर्मचारी आवास की प्रतीक्षा में हैं। नए नियमों से अपेक्षा की जा रही है कि अधिकांश बंगले जल्द खाली हो जाएंगे तथा सरकारी संसाधनों का उचित उपयोग सुनिश्चित होगा। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि नियम सभी के लिए समान रूप से लागू होंगे तथा किसी भी स्तर पर छूट नहीं दी जाएगी।

सरकारी प्रक्रिया के तहत नोटिस जारी होने के बाद पालन न करने पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। संपदा संचालनालय द्वारा नियमित रूप से इन मामलों की निगरानी की जा रही है तथा आवश्यकता अनुसार अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सरकारी बंगलों पर अवैध कब्जे की प्रवृत्ति समाप्त हो तथा पात्र व्यक्तियों को आवास उपलब्ध कराया जा सके।

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