राष्ट्रवादी कांग्रेस में छिड़ा नेतृत्व का महासंग्राम, प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के समर्थन में उतरे राज्यसभा उम्मीदवार पार्थ पवार।

महाराष्ट्र की राजनीति के केंद्र में रहने वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में इन दिनों नेतृत्व को लेकर जबरदस्त हलचल मची हुई है। पूर्व

Apr 3, 2026 - 12:06
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राष्ट्रवादी कांग्रेस में छिड़ा नेतृत्व का महासंग्राम, प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के समर्थन में उतरे राज्यसभा उम्मीदवार पार्थ पवार।
राष्ट्रवादी कांग्रेस में छिड़ा नेतृत्व का महासंग्राम, प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के समर्थन में उतरे राज्यसभा उम्मीदवार पार्थ पवार।
  • "बुनियादी और काल्पनिक हैं वरिष्ठ नेताओं पर लग रहे आरोप", अजित पवार के पुत्र ने सोशल मीडिया पर विरोधियों को दिया कड़ा जवाब
  • पार्टी पर कब्जे की कोशिशों के दावों के बीच पवार परिवार की एकजुटता का संदेश, आंतरिक कलह की चर्चाओं को पार्थ ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण

महाराष्ट्र की राजनीति के केंद्र में रहने वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में इन दिनों नेतृत्व को लेकर जबरदस्त हलचल मची हुई है। पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के असामयिक निधन के बाद पार्टी के भविष्य और उसकी कमान को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे। इसी बीच, पार्टी के दो सबसे कद्दावर नेताओं, प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे पर आरोप लग रहे थे कि वे पार्टी के संविधान में चोरी-छिपे बदलाव कर संगठन पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। इन चर्चाओं और आरोपों के बीच अजित पवार के पुत्र और हाल ही में राज्यसभा के लिए नामित हुए पार्थ पवार ने मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे का खुलकर बचाव करते हुए उन पर लग रहे सभी आरोपों को पूरी तरह से निराधार और मनगढ़ंत करार दिया है। पार्थ का यह कदम पार्टी के भीतर चल रहे कथित पावर स्ट्रगल को शांत करने की दिशा में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।

पार्थ पवार ने अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया में स्पष्ट किया कि प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे नेताओं ने दशकों तक पार्टी के निर्माण और विस्तार में अपना जीवन खपाया है। उन्होंने कहा कि ऐसे अनुभवी नेताओं की निष्ठा पर सवाल उठाना न केवल गलत है, बल्कि यह उन राजनीतिक षड्यंत्रों का हिस्सा है जो पार्टी को कमजोर करना चाहते हैं। पार्थ ने सोशल मीडिया के माध्यम से जारी अपने बयान में जोर देकर कहा कि इन दोनों नेताओं के खिलाफ फैलाई जा रही खबरें पूरी तरह से काल्पनिक हैं और इनका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब पार्टी को एकजुट रहने की आवश्यकता है, वरिष्ठ नेताओं को विवादों में खींचना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। पार्थ का यह बयान उस समय आया है जब विपक्षी खेमे के कुछ नेता लगातार यह दावा कर रहे थे कि पवार परिवार और पार्टी के पुराने नेताओं के बीच दरार आ चुकी है।

  • विवाद की जड़ और चुनाव आयोग को भेजी गई चिट्ठी

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा गर्म थी कि प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे ने फरवरी के मध्य में चुनाव आयोग को एक पत्र भेजकर पार्टी के संविधान में संशोधन की जानकारी दी थी, जिसमें कथित तौर पर कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल को असीमित शक्तियां देने की बात कही गई थी। इसी पत्र के सार्वजनिक होने के बाद यह आरोप लगे कि वे अजित पवार के बाद नेतृत्व को अपने हाथों में लेना चाहते हैं।

इस पूरे विवाद में एक नया मोड़ तब आया जब अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार और उनके पुत्र पार्थ पवार के नाराज होने की खबरें मीडिया में तैरने लगीं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि सुनेत्रा पवार ने भी निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर खुद को पार्टी अध्यक्ष घोषित करने की सूचना दी थी, जिससे यह आभास हुआ कि पार्टी के भीतर 'पवार बनाम पटेल-तटकरे' की स्थिति बन गई है। हालांकि, पार्थ पवार ने इन सभी कयासों पर विराम लगाते हुए कहा कि उनकी माता सुनेत्रा पवार और वे स्वयं पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन में काम कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दिल्ली दौरे के दौरान नेताओं की अनुपस्थिति को नाराजगी से जोड़कर देखना गलत है, क्योंकि वह संसद के बजट सत्र का अंतिम चरण था और सभी अपनी-अपनी जिम्मेदारियों में व्यस्त थे। पार्थ ने इसे विरोधियों द्वारा फैलाया गया एक भ्रामक विमर्श बताया।

पार्टी के भीतर चल रही इस खींचतान के पीछे के तकनीकी पहलुओं पर गौर करें तो पता चलता है कि सारा विवाद सांगठनिक नियुक्तियों और शक्तियों के विकेंद्रीकरण को लेकर था। विपक्षी गुट के नेताओं ने आरोप लगाया था कि प्रफुल्ल पटेल ने पार्टी की कमान संभालने के लिए एक गुप्त प्रस्ताव पारित करवाया था। लेकिन पार्थ पवार के हस्तक्षेप ने यह साफ कर दिया है कि अजित पवार गुट के भीतर नेतृत्व को लेकर कोई सीधा टकराव नहीं है। पार्थ ने अपने बयान में यह भी जोड़ा कि पार्टी के कार्यकर्ता इन अफवाहों पर ध्यान न दें, क्योंकि प्रफुल्ल पटेल और तटकरे की प्रतिबद्धता ने ही पार्टी को आज इस मुकाम तक पहुँचाया है। उन्होंने इसे एक विनिर्माण (मैन्युफैक्चर्ड) विवाद बताया जिसका उद्देश्य केवल सनसनी फैलाना था।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्थ पवार का यह रुख उनकी बढ़ती राजनीतिक परिपक्वता को दर्शाता है। राज्यसभा के लिए नामांकन के बाद पार्थ अब पार्टी के राष्ट्रीय चेहरे के रूप में उभर रहे हैं और ऐसे समय में वरिष्ठ नेताओं का बचाव करना उनके नेतृत्व कौशल का हिस्सा है। उन्होंने न केवल पटेल और तटकरे की छवि को साफ करने की कोशिश की, बल्कि यह भी संदेश दिया कि अजित पवार की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए वे और उनकी माता पुराने वफादारों के साथ मिलकर चलने को तैयार हैं। पार्थ ने कड़े शब्दों में कहा कि जो लोग पार्टी में दरार पैदा करने का सपना देख रहे हैं, उन्हें निराशा ही हाथ लगेगी क्योंकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का आधार बहुत मजबूत है।

पार्थ पवार के इस स्पष्टीकरण के बाद अब पार्टी के अन्य प्रवक्ताओं ने भी स्वर मिलाना शुरू कर दिया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए संगठन में किसी भी प्रकार की गुटबाजी को रोकने के लिए शीर्ष स्तर पर बैठकें की गई हैं। प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे ने भी हाल ही में सुनेत्रा पवार से भेंट कर स्थिति स्पष्ट की थी, जिससे पार्टी के भीतर जमी बर्फ पिघलती नजर आ रही है। पार्थ ने अपने बयान के अंत में यह चेतावनी भी दी कि जो लोग झूठी खबरें फैलाकर पार्टी की छवि धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें इसके कानूनी और राजनीतिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। अब देखना यह होगा कि पार्थ के इस 'डैमेज कंट्रोल' के बाद क्या पार्टी के भीतर चल रहा यह कथित शीत युद्ध पूरी तरह समाप्त होता है या नहीं।

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