ईरान की राजधानी तेहरान और अल्बोरज में भीषण हवाई हमले, अमेरिका-इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई से दहला मध्य पूर्व।

मध्य पूर्व में तनाव अब अपने चरम पर पहुँच गया है, जहाँ अमेरिकी और इजरायली वायुसेना ने ईरान की राजधानी तेहरान और उसके आसपास

Apr 3, 2026 - 12:11
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ईरान की राजधानी तेहरान और अल्बोरज में भीषण हवाई हमले, अमेरिका-इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई से दहला मध्य पूर्व।
ईरान की राजधानी तेहरान और अल्बोरज में भीषण हवाई हमले, अमेरिका-इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई से दहला मध्य पूर्व।
  • 'प्रकृति दिवस' के जश्न के बीच गिरा मौत का गोला, निर्माणाधीन बी-1 पुल पर हमले में 8 नागरिकों की मौत, 100 घायल
  • युद्ध के मुहाने पर खड़ा ईरान, नागरिक बुनियादी ढांचों को निशाना बनाने पर भड़का तेहरान, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहराया संकट

मध्य पूर्व में तनाव अब अपने चरम पर पहुँच गया है, जहाँ अमेरिकी और इजरायली वायुसेना ने ईरान की राजधानी तेहरान और उसके आसपास के इलाकों में अचानक अपने हमले तेज कर दिए हैं। प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, दर्जनों रणनीतिक और नागरिक ठिकानों पर एक साथ हवाई हमले किए जा रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में भय और अनिश्चितता का माहौल है। इन हमलों का सबसे भयावह मंजर अल्बोरज प्रांत के करज शहर में देखने को मिला, जहाँ अमेरिका द्वारा किए गए मिसाइल हमले में एक प्रमुख निर्माणाधीन पुल को निशाना बनाया गया। तेहरान के बाहरी इलाके में हुई इस कार्रवाई ने न केवल बुनियादी ढांचे को नष्ट किया है, बल्कि बड़े पैमाने पर जनहानि भी की है। हमले के समय वहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे, जिससे हताहतों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है।

ईरान के सरकारी मीडिया ने स्थानीय अधिकारियों के हवाले से पुष्टि की है कि अल्बोरज प्रांत में स्थित 'बी-1 पुल' पर हुए हमले में कम से कम आठ निर्दोष नागरिकों की मौत हो गई है। यह पुल ईरान की सबसे महत्वपूर्ण और ऊंची परियोजनाओं में से एक माना जा रहा था। हमले के वक्त करीब 100 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें नजदीकी चिकित्सा केंद्रों में भर्ती कराया गया है। इनमें से कई की हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई है, जिससे मरने वालों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका है। स्थानीय प्रशासन ने इस हमले को सीधे तौर पर आम नागरिकों के विरुद्ध की गई कार्रवाई बताया है, क्योंकि प्रभावित लोग किसी सैन्य गतिविधि में शामिल नहीं थे, बल्कि वे एक पारंपरिक उत्सव का आनंद ले रहे थे।

  • 'प्रकृति दिवस' पर मातम

जिस समय यह हमला हुआ, उस समय ईरानी नागरिक अपना पारंपरिक 'प्रकृति दिवस' (सीजदाह बे-दर) मना रहे थे। नौरूज उत्सव के अंतिम दिन लोग सपरिवार नदियों के किनारे और खुले स्थानों पर पिकनिक मनाने के लिए इकट्ठा होते हैं। करज के इस पुल के नीचे और आसपास की नदी के किनारे सैकड़ों परिवार मौजूद थे, जो इस सैन्य कार्रवाई की चपेट में आ गए।

हमलों की तीव्रता और उनके चयन को लेकर अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने गहरी चिंता व्यक्त की है। बताया जा रहा है कि अमेरिकी और इजरायली विमानों ने तेहरान के भीतर कई सैन्य केंद्रों के साथ-साथ संचार प्रणालियों को भी बाधित करने की कोशिश की है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का घोर उल्लंघन करार दिया है। तेहरान की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि नागरिक बुनियादी ढांचों, विशेष रूप से निर्माणाधीन परियोजनाओं को निशाना बनाना दुश्मन की हताशा और नैतिक पतन को दर्शाता है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि इस तरह के कृत्य उसके संकल्प को कमजोर नहीं कर पाएंगे और वह अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए उचित कदम उठाएगा।

सामरिक दृष्टि से देखें तो यह हमला मध्य पूर्व में जारी लंबे समय के टकराव का एक नया और घातक मोड़ है। अमेरिकी प्रशासन ने इन हमलों के पीछे ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय अस्थिरता को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि इजरायल ने इसे अपनी सुरक्षा के लिए उठाए गए एहतियाती कदम बताया है। हालांकि, नागरिक मौतों ने इन तर्कों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। अल्बोरज प्रांत के उप-राज्यपाल ने मीडिया को बताया कि बी-1 पुल का उद्घाटन कुछ ही दिनों बाद होने वाला था और वहां किसी भी प्रकार की सैन्य तैनाती नहीं थी। हमले के कारण न केवल पुल का ढांचा ढह गया है, बल्कि पास के बीलेकान गांव के निवासियों को भी भारी नुकसान पहुँचा है।

बचाव और राहत कार्यों के दौरान सामने आई जानकारी के अनुसार, हमले दो चरणों में किए गए। पहला हमला होने के बाद जब बचाव दल और स्थानीय लोग पीड़ितों की मदद के लिए मौके पर पहुंचे, तभी दूसरा मिसाइल प्रहार किया गया। इसी 'डबल टैप' रणनीति के कारण हताहतों की संख्या इतनी अधिक हुई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ताओं ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा पर सीधा हमला बताया है और विश्व स्वास्थ्य संगठन तथा रेड क्रॉस जैसी संस्थाओं से हस्तक्षेप की मांग की है। तेहरान के अस्पतालों में आपातकाल घोषित कर दिया गया है और नागरिकों से रक्तदान की अपील की जा रही है ताकि घायलों की जान बचाई जा सके।

इस सैन्य कार्रवाई के बाद क्षेत्र में युद्ध की लपटें और तेज होने की संभावना है। ईरान समर्थित समूहों ने पहले ही जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है, जिससे इराक, सीरिया और लेबनान तक संघर्ष फैलने का खतरा पैदा हो गया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी इस मुद्दे पर आपातकालीन बैठक बुलाने की मांग की जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि हमलों का यह सिलसिला नहीं रुका, तो यह एक पूर्ण पैमाने के क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है, जिसका वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा। फिलहाल, तेहरान और उसके आसपास के आसमान में लड़ाकू विमानों की गर्जना और सायरन की आवाजें तनावपूर्ण स्थिति की गवाही दे रही हैं।

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