सबरीमाला मंदिर से सोने की चोरी- ISRO वैज्ञानिकों के परीक्षणों ने पुष्टि की कि मूल पैनलों से गोल्ड स्ट्रिप किया गया, जांच में सनसनीखेज खुलासे सामने आए

यह मामला सितंबर 2025 में तब सामने आया जब कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष आयुक्त की रिपोर्ट में द्वारपालक मूर्तियों से गोल्ड क्लैडिंग हटाए जाने का खुलासा हुआ। रिपोर्ट में कहा गया कि मूर्तियों से गोल्ड की परत छीनी

Jan 29, 2026 - 11:40
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सबरीमाला मंदिर से सोने की चोरी- ISRO वैज्ञानिकों के परीक्षणों ने पुष्टि की कि मूल पैनलों से गोल्ड स्ट्रिप किया गया, जांच में सनसनीखेज खुलासे सामने आए

केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला अयप्पा मंदिर में सोने की चोरी का मामला सामने आने के बाद जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं। यह चोरी मंदिर के द्वारपालक मूर्तियों, दरवाजे के फ्रेम और अन्य कलाकृतियों से जुड़ी गोल्ड प्लेटिंग से हुई है। जांच में पता चला है कि सोना चुराने के लिए कलाकृतियों को मरम्मत के बहाने मंदिर से बाहर ले जाया गया और केमिकल प्रक्रिया से सोना अलग किया गया। ISRO के विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर के वैज्ञानिकों ने सामग्री का विश्लेषण कर इसकी पुष्टि की है कि मूल कॉपर शीट्स से सोना निकाला गया था, जबकि पैनल वही मूल हैं। इस मामले में विशेष जांच दल ने कई गिरफ्तारियां की हैं और जांच की रिपोर्ट में संगठित अपराध का जिक्र है। चोरी की मात्रा लगभग 4.54 किलोग्राम बताई जा रही है, जो 2019 से शुरू हुई प्रक्रिया का हिस्सा है। केरल हाई कोर्ट के आदेश पर गठित एसआईटी इस मामले की जांच कर रही है और प्रवर्तन निदेशालय भी मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जुड़ा हुआ है। मंदिर के प्रबंधन में ट्रावनकोर देवास्वोम बोर्ड की भूमिका भी जांच के दायरे में है, जहां रिकॉर्ड्स में गोल्ड प्लेटेड आर्टिफैक्ट्स को साधारण कॉपर प्लेट्स के रूप में दर्ज किया गया था।

यह मामला सितंबर 2025 में तब सामने आया जब कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष आयुक्त की रिपोर्ट में द्वारपालक मूर्तियों से गोल्ड क्लैडिंग हटाए जाने का खुलासा हुआ। रिपोर्ट में कहा गया कि मूर्तियों से गोल्ड की परत छीनी गई है और कई जगहों पर यह पूरी तरह हटा दी गई है। कोर्ट ने इस पर स्तब्धता जताई और विशेष जांच दल गठित करने का आदेश दिया। जांच में 1998-99 में विजय माल्या द्वारा दान किए गए 30 किलोग्राम सोने का जिक्र है, जिसमें से पांच किलोग्राम द्वारपालक मूर्तियों पर इस्तेमाल किया गया था। लेकिन 2019 में जब इनकी मरम्मत हुई, तो सोने की मात्रा में कमी आई। जांच दल ने पाया कि 2019 में कलाकृतियां 39 दिनों तक मंदिर से बाहर रहीं और वापस आने पर उनका वजन कम था। इस कमी को नजरअंदाज किया गया और कोई जांच नहीं हुई। अब एसआईटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि चोरी एक योजनाबद्ध तरीके से की गई, जिसमें मंदिर के अंदरूनी लोग शामिल थे।

चोरी की समयरेखा

चोरी की शुरुआत 17 जून 2019 से मानी जा रही है, जब उन्नीकृष्णन पोट्टी ने द्वारपालक मूर्तियों और सैंक्चुम के दरवाजे के फ्रेम की मरम्मत और गोल्ड प्लेटिंग के लिए आवेदन दिया। 3 जुलाई 2019 को ट्रावनकोर देवास्वोम बोर्ड ने अनुमति दी। 17 जुलाई को प्रशासनिक अधिकारी एस श्रीकुमार ने कलाकृतियों और 12 द्वारपालक छवियों को हटाने की मंजूरी दी। रिकॉर्ड्स में कुल वजन 25.4 किलोग्राम दर्ज किया गया, लेकिन गोल्ड प्लेटेड होने के बावजूद इन्हें साधारण कॉपर प्लेट्स लिखा गया। 20 जुलाई को दो दरवाजे फ्रेम 17.4 किलोग्राम वजन के साथ सौंपे गए। कलाकृतियां बेंगलुरु और हैदराबाद होते हुए चेन्नई की स्मार्ट क्रिएशंस पहुंचीं। वहां बालाजी जैसे श्रमिकों ने उन्नीकृष्णन पोट्टी के निर्देश पर सोना निकाला। 29 और 30 अगस्त को थिरुवभरणम आयुक्त आरजी राधाकृष्णन ने निरीक्षण किया, लेकिन वजन में कमी पर ध्यान नहीं दिया। 11 सितंबर 2019 को कलाकृतियां वापस लौटीं, लेकिन 53 दिनों तक मुख्य आरोपी के पास रहीं। जांच में पाया गया कि स्ट्रिपिंग से 989 ग्राम सोना निकला, जिसमें से 409 ग्राम दरवाजे फ्रेम से, 577 ग्राम द्वारपालक और अन्य कलाकृतियों से, और 3 ग्राम अवशेष समाधान से।

2025 में भी पोट्टी ने इलेक्ट्रोप्लेटिंग के बहाने कलाकृतियां लीं, लेकिन हाई कोर्ट ने रोक लगाई। जांच में पाया गया कि प्रभा मंडलम के सात कॉपर प्लेट्स से भी सोना गायब है, जो शिव और व्याली रूपम की मूर्तियों को कवर करते हैं। सोना केमिकल मिश्रण से अलग किया गया और बेल्लारी के ज्वेलर गोवर्धन रोड्डम के पास है।

योजनाबद्ध चोरी का खुलासा: रेस्टोरेशन के नाम पर कलाकृतियां चेन्नई ले जाकर केमिकल प्रक्रिया से सोना अलग किया, एसआईटी ने पकड़े कई आरोपी

चोरी का तरीका बेहद योजनाबद्ध था। कलाकृतियों को मरम्मत के बहाने मंदिर से निकाला गया, जबकि मंदिर नियमों के अनुसार मरम्मत मंदिर परिसर में ही होनी चाहिए थी। लेकिन 2019 में इन्हें चेन्नई की स्मार्ट क्रिएशंस में ले जाया गया। वहां केमिकल प्रक्रिया से सोना कॉपर प्लेट्स से अलग किया गया। जांच में पाया गया कि मूल प्लेट्स में निकल और ऐक्रेलिक पॉलिमर की परतें नहीं थीं, जबकि बाद में प्लेटेड प्लेट्स में निकल था, मर्करी नहीं था और ऐक्रेलिक पॉलिमर था। गोल्ड और निकल परतों की मोटाई की तुलना से सिस्टेमेटिक प्रक्रिया का पता चला। चोरी में शामिल लोगों ने कलाकृतियों को बेंगलुरु और हैदराबाद से ट्रांसपोर्ट किया। स्मार्ट क्रिएशंस के मालिक पंकज भंडारी ने सोना निकाला और 109.243 ग्राम मजदूरी के रूप में रखा, बाकी मध्यस्थ कल्पेश के जरिए गोवर्धन रोड्डम को दिया गया। जांच में सेलफोन रिकॉर्ड्स से पता चला कि आरोपी सबूत नष्ट करने की योजना बना रहे थे।

एसआईटी ने पाया कि चोरी में मंदिर के तंत्री कंदारारु राजीवरु भी शामिल थे। उन्होंने मंदिर मैनुअल का उल्लंघन कर कलाकृतियों को हटाने की अनुमति दी और चोरी में चुपचाप सहमति दी। वे 2007 से उन्नीकृष्णन पोट्टी के साथ जुड़े थे और निजी पूजा के जरिए अवैध लाभ लेते थे। जांच में राजीवरु के वित्तीय लेनदेन की जांच हो रही है, जिसमें एक बंद बैंक में 2.5 करोड़ रुपये का नुकसान शामिल है। पूर्व अधिकारी सुधीश कुमार ने रिकॉर्ड्स में गोल्ड प्लेटेड परतों को कॉपर लिखा, जबकि वे जानते थे कि ये गोल्ड हैं। इससे मुख्य आरोपी को फायदा हुआ। जांच में पता चला कि 1999 में की गई प्लेटिंग में भी अनियमितताएं थीं, लेकिन 2019 की चोरी मुख्य है। एसआईटी ने दस लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें तीन सीपीआई(एम) नेता और पूर्व विधायक ए पद्मकुमार शामिल हैं। पूर्व मंत्री कडकंपल्ली सुरेंद्रन से भी पूछताछ हुई।

मुख्य आरोपी और उनकी भूमिका

उन्नीकृष्णन पोट्टी मुख्य आरोपी हैं, जिन्होंने आवेदन दिया, कलाकृतियां लीं और सोना निकलवाया। पंकज भंडारी स्मार्ट क्रिएशंस के सीईओ हैं, जिन्होंने केमिकल से सोना अलग किया। गोवर्धन रोड्डम बेल्लारी के ज्वेलर हैं, जिन्होंने चुराया सोना खरीदा। कंदारारु राजीवरु तंत्री हैं, जिन्होंने अनुमति दी और साजिश में शामिल थे। सुधीश कुमार पूर्व अधिकारी हैं, जिन्होंने रिकॉर्ड्स में धांधली की। जांच में इनकी गिरफ्तारी हुई और रिमांड रिपोर्ट में संगठित अपराध का जिक्र है।

जांच में ISRO की भूमिका: विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर के वैज्ञानिकों ने सैंपल्स का विश्लेषण कर सोने की मात्रा और परतों की पुष्टि की, और चोरी की पुष्टि हुई

ISRO के विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर के वैज्ञानिकों ने जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एसआईटी ने गोल्ड प्लेटिंग की सटीक मात्रा जानने के लिए वीएसएससी से तकनीकी सहायता मांगी। वैज्ञानिकों ने गोल्ड कवर वाली कॉपर प्लेट्स से सैंपल लिए और विश्लेषण किया। उनके परीक्षणों से पुष्टि हुई कि पैनल मूल कॉपर शीट्स हैं, लेकिन सोने की मात्रा में कमी है। परीक्षणों में मूल प्लेट्स में निकल और ऐक्रेलिक पॉलिमर की अनुपस्थिति, बाद की प्लेटिंग में निकल की उपस्थिति, मर्करी की अनुपस्थिति और ऐक्रेलिक पॉलिमर की मौजूदगी का पता चला। गोल्ड और निकल परतों की तुलनात्मक मोटाई से चोरी की व्यवस्थित प्रक्रिया साबित हुई। वैज्ञानिकों ने बताया कि परीक्षणों के कई पहलू अभी डीकोड होने बाकी हैं और पुराने दरवाजे पैनल के परीक्षण से तुलना की जरूरत है। एसआईटी ने वैज्ञानिकों के बयान दर्ज किए और रिपोर्ट हाई कोर्ट में जमा की।

जांच की प्रगति में एसआईटी ने हाई कोर्ट को रिपोर्ट सौंपी, जिसमें कहा गया कि आरोपी और सोना चुराने की साजिश रचे। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत मामला दर्ज किया और तीन राज्यों में 21 जगहों पर छापे मारे। जांच में पाया गया कि चोरी संगठित अपराध का हिस्सा है, जिसमें ट्रावनकोर देवास्वोम बोर्ड के अधिकारियों की मिलीभगत थी। कोर्ट ने कहा कि हर दोषी को सजा मिलेगी, चाहे उसकी स्थिति कुछ भी हो। जांच में फोरेंसिक विश्लेषण जारी है, जिसमें मूल सोने की मात्रा का पता लगाया जा रहा है। 2019 की प्लेटिंग में इस्तेमाल सोने और बाद की कमी की जांच हो रही है।

वैज्ञानिक परीक्षणों के निष्कर्ष

वीएसएससी के परीक्षणों से पुष्टि हुई कि चुराया गया सामग्री गोल्ड लेयर्ड ओवर कॉपर था, न कि सॉलिड गोल्ड पैनल्स। हटाए गए शीट्स के सैंपल्स में सोने की मात्रा में कमी पाई गई। मूल प्लेट्स में निकल नहीं था, लेकिन बाद में था। गोल्ड परत की मोटाई कम थी, जो स्ट्रिपिंग का संकेत है। यह मामला मंदिर संपत्ति की सुरक्षा पर सवाल उठाता है। जांच पूरी होने तक सभी पहलुओं की पड़ताल जारी है।

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