बारामती विमान हादसा- लैंडिंग की मंजूरी मिलने के बाद अचानक संपर्क टूटा, आखिरी पलों में ऐसा क्या हुआ जिसने पांच जिंदगियां छीन लीं?
विमान लीयरजेट 45 था, जो दिल्ली स्थित एक कंपनी द्वारा संचालित किया जा रहा था। यह विमान मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सुबह करीब 8:10 बजे उड़ा था और बारामती पहुंचने वा
महाराष्ट्र के बारामती में बुधवार सुबह एक चार्टर्ड विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से पांच लोगों की मौत हो गई। विमान मुंबई से बारामती की ओर जा रहा था और लैंडिंग के दौरान यह हादसा हुआ। विमान में सवार सभी लोग इस दुर्घटना में मारे गए। घटना की जांच शुरू हो चुकी है और ब्लैक बॉक्स बरामद कर लिया गया है। इस हादसे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनमें लैंडिंग की मंजूरी मिलने के बाद रेडियो संपर्क का अचानक टूटना प्रमुख है। आखिरी 26 मिनटों की घटनाओं की समयरेखा से पता चलता है कि विमान ने दो बार लैंडिंग की कोशिश की, लेकिन दूसरी कोशिश में यह रनवे के किनारे दुर्घटनाग्रस्त हो गया और आग का गोला बन गया।
विमान लीयरजेट 45 था, जो दिल्ली स्थित एक कंपनी द्वारा संचालित किया जा रहा था। यह विमान मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सुबह करीब 8:10 बजे उड़ा था और बारामती पहुंचने वाला था। बारामती हवाई पट्टी एक अनियंत्रित हवाई क्षेत्र है, जहां उड़ान ट्रैफिक की जानकारी स्थानीय उड़ान स्कूलों के पायलटों द्वारा संभाली जाती है। घटना के समय दृश्यता कम थी, जो हादसे का एक कारण हो सकती है। विमान ने पहली बार लैंडिंग की कोशिश की, लेकिन रनवे नजर नहीं आने पर गो-अराउंड किया। दूसरी कोशिश में रनवे दिखने की सूचना दी गई और लैंडिंग की मंजूरी मिली, लेकिन उसके बाद कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। कुछ ही पलों में रनवे के किनारे आग की लपटें देखी गईं।
हादसे की समयरेखा
विमान ने सुबह 8:18 बजे बारामती एटीसी से संपर्क किया। पायलटों ने अंतिम दृष्टिकोण की सूचना दी और रनवे 11 पर उतरने की तैयारी की। लेकिन रनवे नजर नहीं आने पर गो-अराउंड शुरू किया गया। कुछ सेकंड बाद पायलटों ने रनवे दिखने की पुष्टि की। सुबह 8:43 बजे लैंडिंग की मंजूरी दी गई, लेकिन विमान से कोई रीडबैक नहीं आया। 8:44 बजे रनवे 11 के थ्रेशोल्ड के पास आग की लपटें देखी गईं। पूरा विमान आग में जलकर खाक हो गया। इस समयरेखा से साफ है कि आखिरी मिनटों में संपर्क टूटना और कोई प्रतिक्रिया न आना हादसे का प्रमुख बिंदु है। जांच में ब्लैक बॉक्स से इन पलों की रिकॉर्डिंग का विश्लेषण किया जाएगा।
हादसे में मारे गए लोगों में महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार, उनके निजी सुरक्षा अधिकारी विदिप जाधव, फ्लाइट अटेंडेंट पिंकी माली, पायलट-इन-कमांड सुमित कपूर और सेकंड-इन-कमांड शंभवी पाठक शामिल हैं। विमान बारामती में स्थानीय चुनावों से जुड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए जा रहा था। बारामती अजित पवार का गृह क्षेत्र है, जहां वे चुनाव प्रचार करने वाले थे। विमान की क्षमता और उड़ान की स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन जांच में यह पता लगाया जाएगा कि क्या कोई तकनीकी खराबी थी। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि हादसे की जांच की जा रही है और प्रारंभिक जानकारी से दृश्यता कम होने का संकेत मिला है।
आखिरी प्रयास में क्या गलत हुआ: दो लैंडिंग अटेम्प्ट्स के बाद विमान रनवे से महज 200 मीटर दूर गिरा, जांच में ब्लैक बॉक्स की भूमिका अहम
विमान की दूसरी लैंडिंग अटेम्प्ट घातक साबित हुई। पहली कोशिश में पायलटों ने एटीसी से संपर्क कर हवा की दिशा, दृश्यता और अन्य जानकारी मांगी। एटीसी ने बताया कि हवा शांत है और दृश्यता 3000 मीटर है। लेकिन रनवे नजर नहीं आने पर गो-अराउंड किया गया। इसके बाद विमान ने फिर से दृष्टिकोण बनाया और रनवे दिखने की सूचना दी। एटीसी ने लैंडिंग क्लियरेंस दिया, लेकिन विमान से कोई पुष्टिकरण नहीं आया। कुछ ही सेकंड में विमान रनवे के किनारे एक खुले मैदान में गिरा और आग लग गई। सीसीटीवी फुटेज से पता चलता है कि विमान लैंडिंग के दौरान डगमगा रहा था और ठीक से टचडाउन नहीं कर पाया। हादसा सुबह करीब 8:45 बजे हुआ, जब विमान रनवे के थ्रेशोल्ड के पास दुर्घटनाग्रस्त हुआ।
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने बताया कि विमान वीटी-एसएसके रजिस्ट्रेशन वाला था और यह पहले भी एक लैंडिंग दुर्घटना में शामिल रहा था। लेकिन इस बार की जांच में विमान की उम्र, रखरखाव और उड़ान डेटा की समीक्षा की जाएगी। ब्लैक बॉक्स बरामद हो चुका है, जिसमें कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर शामिल हैं। इनसे आखिरी पलों की बातचीत और विमान की स्थिति का पता चलेगा। कॉकपिट से आखिरी शब्द "ओह शिट" सुनाई दिए, जो हादसे से ठीक पहले के हैं। जांच में यह देखा जाएगा कि क्या इंजन फेलियर, दृश्यता की समस्या या कोई अन्य तकनीकी मुद्दा था। विमान की गति और ऊंचाई के डेटा से पता चलता है कि दूसरी अटेम्प्ट में यह तेजी से नीचे आया और नियंत्रण से बाहर हो गया।
विमान के चालक दल और यात्री
पायलट-इन-कमांड सुमित कपूर और सेकंड-इन-कमांड शंभवी पाठक अनुभवी थे। सुमित कपूर पिता को उड़ान से पहले कॉल कर चुके थे। शंभवी पाठक ने दादी से आखिरी संदेश भेजा था। निजी सुरक्षा अधिकारी विदिप जाधव और फ्लाइट अटेंडेंट पिंकी माली भी सवार थे। सभी की मौत मौके पर ही हो गई। जांच में चालक दल की योग्यता और स्वास्थ्य की समीक्षा की जा रही है। विमान में कोई अतिरिक्त यात्री नहीं था।
हादसे ने पांच अनसुलझे सवाल खड़े किए हैं। पहला, लैंडिंग की मंजूरी मिलने के बाद रेडियो संपर्क क्यों टूटा? दूसरा, दृश्यता 3000 मीटर बताई गई, लेकिन पहली अटेम्प्ट में रनवे क्यों नहीं दिखा? तीसरा, दूसरी अटेम्प्ट में रनवे दिखने के बाद कोई रीडबैक क्यों नहीं आया? चौथा, विमान रनवे से महज 200 मीटर दूर क्यों गिरा, जबकि क्लियरेंस मिल चुका था? पांचवां, क्या इंजन फेलियर या कोई अन्य तकनीकी समस्या थी, जो जांच में सामने आएगी? ये सवाल जांच की दिशा तय करेंगे। विमान बॉम्बार्डियर लीयरजेट 45 था, जो व्यावसायिक उड़ानों के लिए इस्तेमाल होता है। इसकी लोकप्रियता और इतिहास की समीक्षा भी जांच का हिस्सा है।
जांच की दिशा और संभावित कारण: दृश्यता, तकनीकी खराबी या मानवीय त्रुटि, ब्लैक बॉक्स से खुलेगा राज जो हादसे को समझाएगा
जांच एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो द्वारा की जा रही है। प्रारंभिक रिपोर्ट में दृश्यता को प्रमुख कारक बताया गया है। लेकिन ब्लैक बॉक्स से डेटा निकालने के बाद इंजन की स्थिति, गति और ऊंचाई का विश्लेषण किया जाएगा। विमान की उड़ान ट्रैकिंग से पता चलता है कि मुंबई से निकलने के बाद यह सामान्य गति पर था, लेकिन बारामती पहुंचते ही समस्या शुरू हुई। फ्लाइट रडार 24 डेटा से दूसरी अटेम्प्ट में अचानक गति बढ़ने और फिर सिग्नल कटने का पता चलता है। जांच में यह देखा जाएगा कि क्या सैटेलाइट सेफ्टी गियर की कमी थी या रखरखाव में कोई चूक हुई।
विमान 1990 के दशक का मॉडल है, लेकिन इसका उपयोग वीआईपी उड़ानों के लिए आम है। जांच में विमान की पिछली दुर्घटना का भी जिक्र है, जो 2023 में हुई थी। लेकिन इस बार की घटना अलग है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा है कि बारामती हवाई पट्टी टेबल-टॉप है, जो लैंडिंग को चुनौतीपूर्ण बनाती है। हादसे के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अजित पवार के पार्थिव शरीर को विद्या प्रतिष्ठान ग्राउंड लाया गया, जहां अंतिम दर्शन के लिए रखा गया।
हादसे के बाद की कार्रवाई
हादसे के तुरंत बाद बचाव दल पहुंचा, लेकिन आग इतनी तेज थी कि कोई बच नहीं सका। ब्लैक बॉक्स बरामद किया गया और जांच के लिए भेजा गया। जांच रिपोर्ट में सभी बिंदुओं का विस्तार से उल्लेख होगा। यह हादसा उड्डयन सुरक्षा पर सवाल उठाता है। जांच पूरी होने तक सभी संभावित कारणों की पड़ताल की जाएगी। दृश्यता, संपर्क टूटना और लैंडिंग प्रक्रिया प्रमुख फोकस हैं। हादसे ने दिखाया कि कैसे आखिरी पलों में छोटी सी चूक बड़ी तबाही ला सकती है।
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