भारत ने बचाई थी इस देश के राष्ट्रपति की जान, जानें कैसे दुश्मनों के बीच से निकाला था सुरक्षित?

विद्रोह 3 नवंबर 1988 की सुबह शुरू हुआ। विद्रोही जहाज से माले पहुंचे और हथियारों से लैस होकर शहर में फैल गए। उन्होंने रेडियो स्टेशन और अन्य सरकारी भवनों पर कब्जा किया। राष्ट्रपति गयूम ने भारतीय उच्चा

Jan 29, 2026 - 11:45
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भारत ने बचाई थी इस देश के राष्ट्रपति की जान, जानें कैसे दुश्मनों के बीच से निकाला था सुरक्षित?

भारत ने ऑपरेशन कैक्टस में बचाई थी मालदीव के राष्ट्रपति की जान- 1988 में विद्रोहियों के कब्जे से सुरक्षित कैसे निकाला गया था मौमून अब्दुल गयूम

1988 में मालदीव में एक सशस्त्र विद्रोह हुआ जिसमें विदेशी भाड़े के सैनिकों ने राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम की सरकार को उखाड़ फेंकने की कोशिश की। राष्ट्रपति गयूम ने भारत से मदद मांगी और भारतीय सेना ने ऑपरेशन कैक्टस के तहत मात्र 16 घंटों में विद्रोह को कुचल दिया तथा राष्ट्रपति को सुरक्षित निकाल लिया। यह ऑपरेशन भारतीय सेना की तेजी और प्रभावी कार्यवाही का उदाहरण है जिसमें भारतीय वायुसेना, सेना और नौसेना ने समन्वय से काम किया। विद्रोही मुख्य रूप से श्रीलंका के पीएलओटीई संगठन के सदस्य थे जो मालदीव में आधार बनाना चाहते थे। राष्ट्रपति गयूम माले में एक सुरक्षित स्थान पर छिप गए थे और विद्रोहियों ने राजधानी पर कब्जा कर लिया था। भारत ने ब्रिटेन और अमेरिका को भी मदद के लिए संपर्क किया लेकिन उन्होंने हस्तक्षेप नहीं किया। ऑपरेशन में भारतीय पैरा कमांडो ने हवाई मार्ग से उतरकर स्थिति संभाली और राष्ट्रपति को बचाया।

3 नवंबर 1988 को मालदीव के राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम भारत यात्रा पर आने वाले थे। एक भारतीय विमान दिल्ली से माले के लिए उड़ान भर चुका था। उसी समय मालदीव में विद्रोह शुरू हुआ। लगभग 80-400 विद्रोही भाड़े के सैनिकों ने माले पर हमला किया। ये विद्रोही श्रीलंका के पीपुल्स लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन ऑफ तमिल ईलम (पीएलओटीई) के थे जो मालदीव में अपना आधार बनाना चाहते थे। विद्रोहियों ने राष्ट्रपति भवन और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर कब्जा कर लिया। राष्ट्रपति गयूम अपनी पत्नी और कुछ सहयोगियों के साथ एक सुरक्षित घर में छिप गए। उन्होंने भारत, ब्रिटेन और अमेरिका से सैन्य सहायता मांगी। भारत ने तुरंत अनुरोध स्वीकार किया और ऑपरेशन कैक्टस शुरू किया।

विद्रोह की शुरुआत और राष्ट्रपति का अनुरोध

विद्रोह 3 नवंबर 1988 की सुबह शुरू हुआ। विद्रोही जहाज से माले पहुंचे और हथियारों से लैस होकर शहर में फैल गए। उन्होंने रेडियो स्टेशन और अन्य सरकारी भवनों पर कब्जा किया। राष्ट्रपति गयूम ने भारतीय उच्चायोग के माध्यम से मदद मांगी। अनुरोध सुबह 10-10:30 बजे के आसपास पहुंचा। भारत ने तुरंत 50 इंडिपेंडेंट पैरा ब्रिगेड को तैयार किया। ऑपरेशन की योजना बनाई गई और शाम तक कार्यवाही शुरू हो गई। विद्रोहियों ने राष्ट्रपति को पकड़ने की कोशिश की लेकिन वे सुरक्षित स्थान पर पहुंच गए।

भारतीय सेना ने तेजी से कार्रवाई की। भारतीय वायुसेना के 44 स्क्वाड्रन ने दो इल्यूशिन IL-76 विमानों से पैरा कमांडो को हुलहुले एयरपोर्ट पर उतारा। यह मालदीव का मुख्य हवाई अड्डा था। लगभग 1600 सैनिकों ने भाग लिया। पैरा ब्रिगेड के जवान शाम 9:30 बजे स्थानीय समय पर उतरे। भारतीय नौसेना ने भी जहाज भेजे। कमांडो ने एयरपोर्ट पर कब्जा किया और राष्ट्रपति के सुरक्षित स्थान की ओर बढ़े। सुबह 5 बजे तक राष्ट्रपति गयूम को सुरक्षित निकाल लिया गया। विद्रोही संख्या में कम थे और भारतीय सेना की ताकत से घबरा गए। उन्होंने अपना मिशन छोड़ दिया और भागने की कोशिश की।

ऑपरेशन कैक्टस की सफलता: 16 घंटों में विद्रोह कुचला, पैरा कमांडो ने राष्ट्रपति को निकाला और माले पर कब्जा किया

ऑपरेशन कैक्टस 3 नवंबर की रात से शुरू हुआ और 4 नवंबर की सुबह तक पूरा हो गया। भारतीय पैरा कमांडो ने हुलहुले एयरपोर्ट पर उतरकर तुरंत नियंत्रण स्थापित किया। वे माले की ओर बढ़े जहां विद्रोही फैले हुए थे। राष्ट्रपति गयूम एक सुरक्षित घर में थे। कमांडो ने वहां पहुंचकर उन्हें सुरक्षित निकाला। विद्रोहियों ने होस्टेज बनाए थे लेकिन भारतीय सेना ने उन्हें मुक्त कराया। विद्रोही जहाज से भागने की कोशिश कर रहे थे लेकिन भारतीय नौसेना ने उन्हें रोक लिया। कई विद्रोही पकड़े गए और कुछ मारे गए। ऑपरेशन में भारतीय सेना ने न्यूनतम नुकसान उठाया। राष्ट्रपति गयूम को सुरक्षित माना गया और सरकार बहाल हो गई।

ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। IL-76 विमानों से कमांडो और उपकरण उतारे गए। पैरा ब्रिगेड के जवान हवाई छलांग से उतरे। नौसेना के जहाज मालदीव की ओर बढ़े और विद्रोहियों के भागने के रास्ते रोके। विद्रोही अनुमान से अधिक संख्या में भारतीय सैनिकों को देखकर घबरा गए। उन्होंने मिशन छोड़ दिया। ऑपरेशन में राष्ट्रपति को बचाने के अलावा माले में सामान्य स्थिति बहाल की गई। विद्रोहियों को पकड़कर न्याय के हवाले किया गया।

ऑपरेशन कैक्टस की मुख्य घटनाएं

3 नवंबर 1988: विद्रोह शुरू, राष्ट्रपति गयूम ने भारत से मदद मांगी। सुबह 10-10:30 बजे: अनुरोध प्राप्त। शाम 9:30 बजे: IL-76 विमानों से पैरा कमांडो उतरे। 4 नवंबर सुबह 5 बजे: राष्ट्रपति गयूम सुरक्षित निकाले गए। विद्रोही भागने की कोशिश में पकड़े गए। भारतीय सेना: 1600 सैनिक, पैरा ब्रिगेड मुख्य। विद्रोही: 80-400, पीएलओटीई सदस्य।

मालदीव की संप्रभुता की रक्षा: ऑपरेशन कैक्टस ने विद्रोह को विफल किया, भारत की तेज कार्रवाई का ऐतिहासिक उदाहरण

ऑपरेशन कैक्टस मालदीव की संप्रभुता बचाने का महत्वपूर्ण कदम था। विद्रोहियों का उद्देश्य राष्ट्रपति को हटाकर सत्ता हथियाना था। वे मालदीव को अपना आधार बनाना चाहते थे। राष्ट्रपति गयूम की सरकार को खतरा था। भारत ने अनुरोध पर तुरंत कार्रवाई की। ब्रिटेन और अमेरिका ने हस्तक्षेप नहीं किया। भारतीय सेना ने 16 घंटों में स्थिति नियंत्रित की। राष्ट्रपति गयूम को बचाया गया और सरकार बहाल हुई। विद्रोहियों को कुचल दिया गया। यह ऑपरेशन भारतीय सेना की क्षमता दिखाता है। मालदीव में सामान्य स्थिति लौट आई। राष्ट्रपति गयूम की सरकार बनी रही।

ऑपरेशन के बाद मालदीव में स्थिरता आई। विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई हुई। भारतीय सेना ने न्यूनतम बल प्रयोग किया। राष्ट्रपति गयूम ने भारत का आभार जताया। यह घटना भारत-मालदीव संबंधों में महत्वपूर्ण है। ऑपरेशन कैक्टस को भारतीय सैन्य इतिहास में दर्ज किया गया।

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