Technology: 2.7 किलो का '6 पाउंड फोन केस': स्मार्टफोन की लत छुड़ाने वाला भारी स्टील कवर, कीमत 17 हजार से ज्यादा, लेकिन उठाना ही चुनौती।
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में स्मार्टफोन हमारा साथी बन चुका है, लेकिन यही साथी कई बार लत का रूप ले लेता है। घंटों स्क्रॉलिंग, अनावश्यक नोटिफिकेशंस और बिना वजह
नई दिल्ली। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में स्मार्टफोन हमारा साथी बन चुका है, लेकिन यही साथी कई बार लत का रूप ले लेता है। घंटों स्क्रॉलिंग, अनावश्यक नोटिफिकेशंस और बिना वजह फोन चेक करना आम समस्या हो गई है। न्यूरोसाइंस विशेषज्ञों ने इसे एक अनोखे तरीके से सुलझाने का प्रयास किया है। अमेरिका की कंपनी मैटर न्यूरोसाइंस ने एक ऐसा फोन कवर लॉन्च किया है, जो इतना भारी है कि फोन इस्तेमाल करना ही एक कसरत बन जाता है। नाम है '6 पाउंड फोन केस'। यह स्टेनलेस स्टील से बना है और वजन करीब 2.7 किलोग्राम (6 पाउंड) है। कीमत लगभग 17,500 रुपये (209 डॉलर) है। किकस्टार्टर प्लेटफॉर्म पर शुरू हुए इस प्रोजेक्ट ने सोशल मीडिया पर धूम मचा दी है। लोग इसे मजाकिया लेकिन सोचने लायक उत्पाद बता रहे हैं। यह कवर फोन की आदत छुड़ाने का एक व्यंग्यात्मक समाधान है, जो न्यूरोसाइंस के सिद्धांतों पर आधारित है।
यह प्रोजेक्ट 13 अक्टूबर 2025 को किकस्टार्टर पर लॉन्च हुआ। कंपनी के संस्थापक मैथ्यू आइवी ने इसे एक मजाक के रूप में शुरू किया था। आइवी न्यूरोसाइंस कंपनी में काम करते हैं, जहां वे खुशी के विज्ञान पर रिसर्च करते हैं। उन्होंने पाया कि स्मार्टफोन सकारात्मक भावनाओं को दबाता है। बॉस के चैलेंज पर आइवी ने यह कवर डिजाइन किया। वीडियो में आइवी खुद भारी कवर लगाकर फोन उठाते दिखे, जो 7 मिलियन से ज्यादा बार देखा गया। किकस्टार्टर पेज पर लिखा है कि यह कवर 'असुविधाजनक' बनाया गया है, ताकि फोन कम इस्तेमाल हो। प्रोजेक्ट का लक्ष्य 75,000 डॉलर फंडिंग है, लेकिन अभी तक 2,600 डॉलर जमा हो चुके हैं। बैकर्स की संख्या 1 है, लेकिन चर्चा तेज है। डिलीवरी जनवरी 2026 से शुरू होगी।
कवर का डिजाइन पुराने 1980 के दशक के 'ब्रिक फोन' जैसा है। यह एक ठोस स्टेनलेस स्टील का ब्लॉक है, जो iPhone 17 या किसी भी मॉडर्न iPhone में फिट होता है। वजन इतना है कि इसे पकड़ना मुश्किल हो जाता है। किनारे तेज हैं, जेब में नहीं आता। फोन हटाने के लिए चार स्क्रू हैं, जिन्हें एलन रिंच से खोलना पड़ता। कैमरा एक्सेसिबल है, ऐप्स चल सकते हैं, लेकिन वजन के कारण स्क्रॉलिंग थकान भरी हो जाती। कंपनी का दावा है कि यह फोन इस्तेमाल को 50 फीसदी कम कर देता है। आइवी ने बताया कि उनका स्क्रीन टाइम हफ्ते में 4.5 घंटे से घटकर 2 घंटे रह गया। यह न्यूरोसाइंस पर आधारित है, जहां शारीरिक असुविधा दिमाग को सिग्नल देती है कि फोन जरूरी नहीं। iOS के स्क्रीन टाइम लिमिट को बायपास किया जा सकता है, लेकिन यह कवर भौतिक बाधा डालता है।
मैटर न्यूरोसाइंस एक छोटी कंपनी है, जो व्यवहार और न्यूरोसाइंस को जोड़ती है। वे एक ऐप भी चला रहे हैं, जो यूजर्स को भावनाओं को ट्रैक करने में मदद करता है। कवर का आइडिया इसी से निकला। आइवी ने इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट किया, जो वायरल हो गया। वीडियो में वे कवर लगाकर फोन उठाते हैं और थकान महसूस करते दिखे। बैकर्स के लिए विकल्प हैं—5 डॉलर में सिर्फ स्टिकर 'आई हेट माय फोन', 209 डॉलर में पूरा कवर। कंपनी कहती है कि 209 डॉलर ब्रेक-ईवन प्राइस है, क्योंकि स्टील महंगा है और टैरिफ लगते हैं। वे पेटेंट नहीं कर रहे, ताकि अन्य कंपनियां इसे अपनाएं। लेकिन किकस्टार्टर पर रिस्क है—डिले हो सकता है या क्वालिटी प्रभावित।
यह उत्पाद स्मार्टफोन लत की वैश्विक समस्या को छूता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 3.5 अरब लोग स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं, और औसत स्क्रीन टाइम 7 घंटे है। भारत में यह 5-6 घंटे है। लत से तनाव, नींद की कमी और उत्पादकता घटती है। पारंपरिक समाधान जैसे ऐप्स या टाइमर असरदार नहीं, क्योंकि इच्छाशक्ति कमजोर पड़ जाती है। यह कवर भौतिक असुविधा पैदा करता है, जो दिमाग को ट्रेन करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह व्यंग्य है, लेकिन विचारणीय। साइकोलॉजिस्ट डॉ. जेनेट वूड ने कहा कि शारीरिक फीडबैक लत तोड़ने में मदद करता है। लेकिन सभी के लिए व्यावहारिक नहीं—बुजुर्गों या कमजोर हाथ वालों के लिए खतरा।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं मिली-जुली हैं। एक्स पर #6PoundPhoneCase ट्रेंड कर रहा। एक यूजर ने लिखा, अब फोन उठाना जिम जैसा। दूसरे ने कहा, 17 हजार में वेट ट्रेनिंग? मीम्स वायरल हैं, जहां लोग कवर को डंबल दिखा रहे। रेडिट पर बहस है कि क्या यह गैजेट या जोक। बोइंग बोइंग ने इसे 'विश्व का सबसे भारी कवर' कहा। एंड्रॉइड अथॉरिटी ने लिखा कि यह स्क्रीन एडिक्शन का दर्दनाक इलाज है। फास्ट कंपनी ने आइवी के अनुभव को हाइलाइट किया। लेकिन आलोचना भी है—कुछ कहते हैं कि पर्यावरण को नुकसान, क्योंकि स्टील भारी। कंपनी ने जवाब दिया कि यह छोटा बैच है, जागरूकता के लिए।
भारत में स्मार्टफोन मार्केट तेजी से बढ़ रहा। 2025 में 1 अरब से ज्यादा यूजर्स हैं। लेकिन लत की समस्या गंभीर। डिजिटल डिटॉक्स ट्रेंड बढ़ा है—ऐप्स जैसे फॉरेस्ट या स्क्रीन टाइम ट्रैकर लोकप्रिय। लेकिन यह कवर अनोखा है। अगर भारत आया, तो युवाओं को आकर्षित करेगा। लेकिन कीमत ऊंची है। रुपये में 17,500 से शुरू, जो सस्ते कवरों से 50 गुना ज्यादा। शिपिंग और टैक्स जोड़ें तो 20 हजार पार। किकस्टार्टर पर बैकिंग आसान नहीं, लेकिन वायरल होने से फंडिंग बढ़ सकती।
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