ग्रेटर नोएडा के GIMS में शुरू हुआ देश का पहला सरकारी AI क्लिनिक, गंभीर बीमारियों का होगा शुरुआती पता।
ग्रेटर नोएडा स्थित गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (GIMS) में देश का पहला सरकारी अस्पताल आधारित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
ग्रेटर नोएडा स्थित गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (GIMS) में देश का पहला सरकारी अस्पताल आधारित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्लिनिक शुरू हो गया है। यह क्लिनिक GIMS के सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन के तहत स्थापित किया गया है। क्लिनिक का उद्घाटन स्वास्थ्य सेवाओं के अतिरिक्त महानिदेशक द्वारा ऑनलाइन किया गया। इस पहल से सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में AI का एकीकरण बढ़ेगा और गंभीर बीमारियों का शुरुआती पता लगाना संभव होगा। क्लिनिक में AI और जेनेटिक स्क्रीनिंग का उपयोग करके कैंसर, हृदय रोग, किडनी और लिवर संबंधी बीमारियों का शुरुआती चरण में पता लगाया जाएगा।
क्लिनिक में AI का उपयोग ब्लड टेस्ट, इमेजिंग स्कैन जैसे एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, एमआरआई रिपोर्ट और लैबोरेटरी जांच के विश्लेषण में किया जाएगा। इससे नैदानिक सटीकता बढ़ेगी, उपचार का समय कम होगा और रिकवरी का बेहतर आकलन हो सकेगा। विशेष रूप से युवा मरीजों में बढ़ रही गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, हृदय रोग, किडनी और लिवर विकारों तथा उच्च रक्तचाप के मामलों को देखते हुए यह क्लिनिक महत्वपूर्ण है। AI उपकरण क्रिटिकल मरीजों की जांच में सहायक होंगे। यह क्लिनिक स्वास्थ्य स्टार्टअप्स के लिए भी एक प्लेटफॉर्म प्रदान करेगा, जहां वे AI आधारित समाधान विकसित और परीक्षण कर सकेंगे। क्लिनिक 630 से अधिक बेड वाले पूर्ण रूप से कार्यरत सरकारी अस्पताल में स्थित है, जिससे वास्तविक क्लिनिकल वातावरण में AI समाधानों का परीक्षण संभव हो सकेगा। यह पहल सुरक्षित, नैतिक और व्यावहारिक रूप से AI को सार्वजनिक स्वास्थ्य में अपनाने की दिशा में कदम है।
क्लिनिक की स्थापना IIT कानपुर, IIT मद्रास और IIIT लखनऊ जैसे संस्थानों के सहयोग से की गई है। IIT कानपुर इसका इकोसिस्टम पार्टनर है, जो मेंटरशिप और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करेगा। क्लिनिक AI टूल्स और चैटबॉट्स के रियल-वर्ल्ड वैलिडेशन पर फोकस करेगा, जिसमें मरीज सुरक्षा और डेटा गवर्नेंस को प्राथमिकता दी जाएगी। उद्घाटन कार्यक्रम में भारत और विदेश से 100 से अधिक विशेषज्ञों, डॉक्टरों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं ने भाग लिया।
यह क्लिनिक सार्वजनिक अस्पतालों में AI को एकीकृत करने का मॉडल बनेगा, जो पूरे देश में दोहराया जा सकता है। क्लिनिक में AI का उपयोग इमेजिंग और क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम में किया जाएगा। इससे डॉक्टरों और मरीजों तक इनोवेशन सीधे पहुंच सकेगा। GIMS निदेशक ब्रिगेडियर डॉ राकेश कुमार गुप्ता ने कहा कि यह पहल सरकारी अस्पतालों को आधुनिक बनाने की आवश्यकता है। क्लिनिक में जेनेटिक डेटा का उपयोग करके बीमारियों की भविष्यवाणी और व्यक्तिगत उपचार योजना बनाई जाएगी। AI से जीनोमिक डेटासेट का विश्लेषण करके बायोमार्कर्स की पहचान होगी, जो उपचार प्रतिक्रिया की भविष्यवाणी करेगा। विशेष रूप से कैंसर उपचार में व्यक्तिगत थेरेपी संभव होगी, जिससे साइड इफेक्ट्स कम होंगे। क्लिनिक में AI रेडियोलॉजी और पैथोलॉजी में भी उपयोगी होगा। यह पहल उत्तर प्रदेश का पहला सरकारी AI क्लिनिक है और देश में सरकारी अस्पताल में पहला ऐसा प्रयास है। क्लिनिक स्टार्टअप्स को क्लिनिकल वैलिडेशन और डेटा गवर्नेंस में मार्गदर्शन देगा। इससे AI आधारित स्वास्थ्य समाधान तेजी से विकसित होंगे। क्लिनिक सार्वजनिक स्वास्थ्य में AI अपनाने का राष्ट्रीय मॉडल बनेगा।
क्लिनिक में AI का उपयोग करके इमेजिंग डेटा में असामान्यताओं का पता लगाया जाएगा, जैसे ब्रेस्ट या लंग में गांठें। इससे फॉल्स पॉजिटिव और नेगेटिव कम होंगे। क्लिनिक क्रिटिकल बीमारियों में रिकवरी आकलन में भी सहायक होगा। यह पहल मरीजों की सुरक्षा और नैदानिक सटीकता बढ़ाने पर केंद्रित है। क्लिनिक की शुरुआत से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीकी उन्नति होगी। AI उपकरणों से उपचार योजना बेहतर बनेगी। क्लिनिक में जेनेटिक स्क्रीनिंग और AI का संयोजन बीमारियों का शुरुआती पता लगाने में प्रभावी होगा। यह क्लिनिक स्वास्थ्य स्टार्टअप्स के लिए इनक्यूबेशन सपोर्ट भी प्रदान करेगा। यह क्लिनिक सार्वजनिक अस्पताल में AI को एम्बेड करने का पहला प्रयास है। इससे क्लिनिकल प्रैक्टिस में AI समाधान सीधे लागू होंगे। क्लिनिक में रिसर्च और एजुकेशन के लिए भी अवसर होंगे। उद्घाटन के बाद फिजिकल लॉन्च की तैयारी चल रही है।
क्लिनिक में AI का उपयोग करके डायग्नोस्टिक इनपुट का विश्लेषण होगा, जिसमें ब्लड टेस्ट और स्कैन शामिल हैं। इससे गंभीर बीमारियों का शुरुआती इलाज संभव होगा। क्लिनिक युवा मरीजों में बढ़ रही बीमारियों पर फोकस करेगा। यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं में AI को शामिल करने की दिशा में बड़ा कदम है। क्लिनिक स्टार्टअप्स और अकादमिक संस्थानों के साथ सहयोग करेगा। इससे AI समाधान वास्तविक मरीजों पर परीक्षण होंगे। क्लिनिक मरीज केंद्रित सेवाओं को बढ़ावा देगा। यह सरकारी स्वास्थ्य में इनोवेशन का नया अध्याय है। क्लिनिक में AI टूल्स का उपयोग करके इमेजिंग रिपोर्ट्स का विश्लेषण होगा। इससे सर्जिकल प्रिसिजन बढ़ेगी। क्लिनिक विभिन्न स्पेशलिटी में AI का उपयोग करेगा। यह पहल पूरे देश के लिए मॉडल बनेगी।
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