कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला की Y+ सुरक्षा हटाने का प्रस्ताव, गृह मंत्रालय के फैसले से मचा विवाद।
Political News: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला एक बार फिर सुर्खियों में हैं। 22 जुलाई 2025 को खबर आई कि...
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला एक बार फिर सुर्खियों में हैं। 22 जुलाई 2025 को खबर आई कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उनकी Y+ श्रेणी की सुरक्षा हटाने का प्रस्ताव दिया है। मंत्रालय का कहना है कि सुरजेवाला को अब कोई गंभीर खतरा नहीं है। यह फैसला पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में दायर एक याचिका के जवाब में सामने आया, जहां केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि सुरक्षा एजेंसियों की थ्रेट असेसमेंट (खतरे के आकलन) के आधार पर सुरजेवाला की सुरक्षा हटाई जा सकती है। इस खबर ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है, क्योंकि सुरजेवाला एक प्रमुख विपक्षी नेता हैं, जो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और कर्नाटक के प्रभारी हैं। कुछ लोग इसे राजनीतिक प्रतिशोध का कदम मान रहे हैं, जबकि अन्य इसे सुरक्षा संसाधनों के तर्कसंगत उपयोग का हिस्सा बता रहे हैं।
22 जुलाई 2025 को, सोशल मीडिया और समाचार चैनलों पर यह खबर तेजी से फैली कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला की Y+ श्रेणी की सुरक्षा हटाने का प्रस्ताव दिया है। यह जानकारी सबसे पहले न्यूज24 टीवी चैनल ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट की, जिसमें कहा गया कि गृह मंत्रालय ने सुरक्षा एजेंसियों को यह प्रस्ताव भेजा है कि सुरजेवाला को अब कोई खतरा नहीं है। इसके बाद, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई हुई, जहां केंद्र सरकार ने अपनी याचिका में इस प्रस्ताव का समर्थन किया। कोर्ट ने सुरजेवाला को एक महीने के भीतर प्राधिकरण के सामने अपने दस्तावेज पेश करने का निर्देश दिया और कहा कि प्राधिकारी को जल्द से जल्द इस पर निर्णय लेना होगा। अगली सुनवाई 30 सितंबर 2025 को निर्धारित की गई है।
सुरजेवाला को Y+ श्रेणी की सुरक्षा 2014 से प्रदान की गई थी, जब हरियाणा सरकार ने उनकी जान को खतरे की आशंका जताई थी। 2017 में, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि सुरजेवाला को Y+ सुरक्षा प्रदान की जाए, क्योंकि वह दिल्ली में अधिक समय बिताते हैं और उन्हें केंद्रीय संरक्षित व्यक्तियों की सूची में शामिल किया जाना चाहिए। उस समय, सुरजेवाला ने दावा किया था कि उनकी जान को राजनीतिक साजिश के तहत खतरा है। हरियाणा पुलिस ने तब उनकी सुरक्षा में 11 पुलिसकर्मियों को तैनात किया था।
- रणदीप सिंह सुरजेवाला का राजनीतिक सफर
रणदीप सिंह सुरजेवाला, जिनका जन्म 3 जून 1967 को चंडीगढ़ में हुआ, एक प्रमुख कांग्रेस नेता हैं। उनके पिता, शमशेर सिंह सुरजेवाला, हरियाणा के दिग्गज राजनेता और पूर्व मंत्री रहे हैं। रणदीप ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा नरवाना, हरियाणा में पूरी की और बाद में पंजाब यूनिवर्सिटी से राजनीति शास्त्र में एम.ए. किया। उन्होंने 1988 में 21 साल की उम्र में वकालत शुरू की और पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में प्रैक्टिस की।
रणदीप का राजनीतिक करियर 1986 में शुरू हुआ, जब उन्हें हरियाणा राज्य युवा कांग्रेस का संयुक्त सचिव बनाया गया। 2000 में, वह भारतीय युवा कांग्रेस के पहले हरियाणवी राष्ट्रीय अध्यक्ष बने और 2005 तक इस पद पर रहे। 2004 में, वह अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव बने। 2005 में, वह हरियाणा सरकार में सबसे कम उम्र के कैबिनेट मंत्री बने, जिन्हें परिवहन और संसदीय कार्य मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई। बाद में, उन्होंने जल आपूर्ति, स्वच्छता, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभाले। 2022 में, वह राजस्थान से राज्यसभा सांसद चुने गए और वर्तमान में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और कर्नाटक प्रभारी हैं।
सुरजेवाला ने अपने राजनीतिक करियर में कई बार विवादों का सामना किया है। 2024 में, उनकी बीजेपी सांसद हेमा मालिनी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए निर्वाचन आयोग ने उन्हें 48 घंटे के लिए प्रचार करने से रोक दिया था। इसके अलावा, 2023 में, उनकी “राक्षस” टिप्पणी, जिसमें उन्होंने बीजेपी समर्थकों को राक्षस कहा था, ने भी विवाद खड़ा किया था।
केंद्र सरकार के इस फैसले ने कई सवाल खड़े किए हैं। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध का कदम बताया है। एक यूजर (@deepanshuinc) ने एक्स पर लिखा कि सुरजेवाला की सुरक्षा हटाने का कारण यह हो सकता है कि वह लगातार सरकार की निष्क्रियता के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। कांग्रेस के कई नेताओं ने भी इस फैसले की निंदा की है और इसे विपक्षी नेताओं को कमजोर करने की साजिश बताया है।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार का कहना है कि यह फैसला सुरक्षा एजेंसियों के थ्रेट असेसमेंट के आधार पर लिया गया है। गृह मंत्रालय ने कोर्ट में दावा किया कि सुरजेवाला को अब कोई गंभीर खतरा नहीं है, और इसलिए उनकी Y+ सुरक्षा हटाई जा सकती है। Y+ श्रेणी की सुरक्षा में एक व्यक्ति को कमांडो और पुलिस कर्मियों सहित 11 सुरक्षाकर्मी प्रदान किए जाते हैं। यह सुरक्षा उन लोगों को दी जाती है, जिन्हें मध्यम स्तर का खतरा माना जाता है।
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने इस मामले में स्टे देने से इनकार कर दिया, लेकिन सुरजेवाला को एक महीने का समय दिया गया है ताकि वह प्राधिकरण के सामने अपने दस्तावेज और तर्क पेश कर सकें। कोर्ट ने यह भी कहा कि प्राधिकारी को जल्द से जल्द इस मामले पर फैसला लेना होगा।
इस खबर के बाद, सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे सरकार का तार्किक कदम बताया, क्योंकि सुरक्षा संसाधनों का उपयोग उन लोगों के लिए किया जाना चाहिए, जिन्हें वास्तव में खतरा है। एक यूजर (@HaryanaNews) ने लिखा, “अगर कोई खतरा नहीं है, तो Y+ सुरक्षा की जरूरत क्यों? यह संसाधनों का सही उपयोग है।”
वहीं, कांग्रेस समर्थकों और कुछ अन्य यूजर्स ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया। एक यूजर ने लिखा, “सुरजेवाला जैसे विपक्षी नेता जो सरकार के खिलाफ बोलते हैं, उनकी सुरक्षा हटाना बीजेपी की रणनीति है। यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।” कांग्रेस नेताओं ने भी इस फैसले की आलोचना की है और कहा कि यह विपक्ष को कमजोर करने की कोशिश है।
सुरजेवाला की सुरक्षा हटाने का फैसला कई मायनों में महत्वपूर्ण है। पहला, यह विपक्षी नेताओं के लिए एक संदेश हो सकता है कि सरकार उनकी सुरक्षा को लेकर सख्त रवैयाadopt कर सकती है। सुरजेवाला, जो कर्नाटक में कांग्रेस के प्रभारी हैं, ने हाल ही में वहां की बीजेपी सरकार की नाकामियों पर तीखी टिप्पणियां की थीं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला उनकी मुखरता को कम करने की कोशिश हो सकता है।
दूसरा, यह फैसला सुरक्षा संसाधनों के उपयोग पर भी सवाल उठाता है। भारत में वीआईपी सुरक्षा एक संवेदनशील मुद्दा रहा है, और कई बार यह आरोप लगता है कि इसका दुरुपयोग होता है। गृह मंत्रालय का यह दावा कि सुरजेवाला को कोई खतरा नहीं है, यह सवाल उठाता है कि क्या अन्य नेताओं की सुरक्षा का भी पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा।
- सुरजेवाला का जवाब
22 जुलाई 2025 तक, रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हालांकि, उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि वह इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे। सुरजेवाला ने पहले भी अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी, और 2017 में हाई कोर्ट में उनकी याचिका के बाद ही उन्हें Y+ सुरक्षा दी गई थी।
रणदीप सिंह सुरजेवाला की Y+ सुरक्षा हटाने का केंद्रीय गृह मंत्रालय का प्रस्ताव एक ऐसा मुद्दा है, जो न केवल राजनीतिक, बल्कि सामाजिक और कानूनी दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। यह फैसला जहां एक ओर सुरक्षा संसाधनों के तर्कसंगत उपयोग की बात करता है, वहीं दूसरी ओर इसे विपक्षी नेताओं पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई का अवसर प्रदान किया है, और अब यह देखना बाकी है कि सुरजेवाला अपने दस्तावेज और तर्कों के आधार पर इस फैसले को बदल पाते हैं या नहीं। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि सुरक्षा, राजनीति, और लोकतंत्र के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
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