पाकिस्तान के पेशावर में फेडरल कांस्टीबुलरी मुख्यालय पर हमला, तीन सुसाइड बॉम्बरों ने घेराबंदी की; तीन सुरक्षाकर्मियों की मौत, छह घायल।

पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी शहर पेशावर में सोमवार सुबह एक बड़ा आतंकी हमला हुआ, जिसमें तीन सुसाइड बॉम्बरों ने फेडरल कांस्टीबुलरी (एफसी) के मुख्यालय

Nov 24, 2025 - 12:31
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पाकिस्तान के पेशावर में फेडरल कांस्टीबुलरी मुख्यालय पर हमला, तीन सुसाइड बॉम्बरों ने घेराबंदी की; तीन सुरक्षाकर्मियों की मौत, छह घायल।
पाकिस्तान के पेशावर में फेडरल कांस्टीबुलरी मुख्यालय पर हमला, तीन सुसाइड बॉम्बरों ने घेराबंदी की; तीन सुरक्षाकर्मियों की मौत, छह घायल।

पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी शहर पेशावर में सोमवार सुबह एक बड़ा आतंकी हमला हुआ, जिसमें तीन सुसाइड बॉम्बरों ने फेडरल कांस्टीबुलरी (एफसी) के मुख्यालय को निशाना बनाया। हमले में तीन सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए, जबकि कम से कम छह अन्य लोग घायल हुए। हमलावरों ने मुख्य द्वार पर धमाका कर अंदर घुसने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षाबलों ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की। दो हमलावरों को गोली मारकर मार गिराया गया, जबकि तीसरा मुख्य द्वार पर ही फट गया। घटना पेशावर के सद्दार इलाके में हुई, जो शहर का व्यस्त क्षेत्र है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हमले की कड़ी निंदा की और सुरक्षाबलों की तारीफ की। यह घटना खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में बढ़ते आतंकवाद का नया उदाहरण है, जहां हाल के महीनों में कई ऐसी घटनाएं हुई हैं।

हमला सुबह करीब नौ बजे शुरू हुआ। स्थानीय मीडिया के अनुसार, तीन हथियारबंद हमलावर एफसी मुख्यालय की ओर बढ़े। पहला सुसाइड बॉम्बर मुख्य द्वार पर पहुंचा और खुद को उड़ा लिया। धमाके की आवाज पूरे इलाके में गूंज गई। इसके बाद बाकी दो हमलावर अंदर घुसने की कोशिश करने लगे। एफसी के जवान सतर्क थे। उन्होंने तुरंत गोलीबारी शुरू कर दी। एक हमलावर को मौके पर ही मार गिराया गया। तीसरा हमलावर भी अंदर घुस पाने से पहले मारा गया। पेशावर कैपिटल सिटी पुलिस अधिकारी मियां सईद अहमद ने बताया कि हमलावरों ने भारी हथियारों का इस्तेमाल किया, लेकिन सुरक्षाबलों की मुस्तैदी से बड़ा नुकसान टल गया। सद्दार रोड को तुरंत बंद कर दिया गया और इलाके को घेर लिया गया।

घायलों को लेडी रीडिंग हॉस्पिटल ले जाया गया। अस्पताल के प्रवक्ता मोहम्मद आसिम ने कहा कि पांच लोग घायल हैं, जिनमें दो एफसी जवान और तीन नागरिक शामिल हैं। इनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। शहीदों में एफसी के तीन जवान हैं। हमले के दौरान भारी गोलीबारी हुई, जिसकी आवाजें दूर तक सुनाई दीं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो गए, जिनमें धमाके की धुंआ और गोलीबारी के दृश्य दिख रहे हैं। एक वीडियो में दिखा कि मुख्य द्वार पर विस्फोट के बाद सुरक्षाबल तैनात हो गए। स्थानीय निवासी सफदर खान ने कहा कि इलाका घनी आबादी वाला है। हमले से लोग डर गए। स्कूल और दुकानें बंद हो गईं।

एफसी एक अर्धसैनिक बल है, जो पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा का जिम्मा संभालता है। इसका मुख्यालय पेशावर में सद्दार रोड पर है। यह जगह व्यस्त बाजार के बीच स्थित है। हमलावरों ने संभवतः इसी का फायदा उठाने की कोशिश की। पुलिस ने कहा कि हमलावरों के पास विस्फोटक और हथियार थे। जांच के लिए फॉरेंसिक टीम भेजी गई है। अभी तक किसी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली, लेकिन संदेह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) पर है। टीटीपी अफगानिस्तान सीमा के पास सक्रिय है और अक्सर सुरक्षाबलों को निशाना बनाता है। हाल ही में इस्लामाबाद कोर्ट पर टीटीपी से जुड़े हमलावरों ने हमला किया था, जिसमें 12 लोग मारे गए थे।

पाकिस्तान में 2025 में आतंकवाद बढ़ गया है। खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में सबसे ज्यादा घटनाएं हो रही हैं। जनवरी से अब तक 430 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं, ज्यादातर सुरक्षाकर्मी। सितंबर में क्वेटा में एक राजनीतिक रैली पर सुसाइड बॉम्बिंग हुई, जिसमें 11 लोग मारे गए। मार्च में बलूच लिबरेशन आर्मी ने ट्रेन हाईजैक की। क्वेटा के एफसी मुख्यालय पर साल की शुरुआत में कार बम से 10 लोगों की मौत हुई। इन हमलों से क्षेत्रीय तनाव बढ़ा है। अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के बाद टीटीपी को समर्थन मिला है। पाकिस्तान सरकार ने अफगानिस्तान से हमलावरों को सौंपने की मांग की है, लेकिन काबुल ने इनकार किया।

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हमले पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी। सुरक्षाबलों को हर संभव मदद दी जाएगी। आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर ने भी बयान जारी कर शहीदों को सलाम किया। उन्होंने कहा कि दुश्मन की साजिश नाकाम होगी। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री ने घायलों के इलाज का खर्चा उठाने का ऐलान किया। स्थानीय लोग शहीदों के परिवारों के साथ खड़े हैं। पेशावर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। चेकपोस्टों पर गश्त तेज हो गई। स्कूलों को छुट्टी दी गई।

यह हमला पेशावर के लिए झटका है। शहर अफगानिस्तान सीमा के करीब है। यहां व्यापार और यातायात का केंद्र है। हमले से आर्थिक नुकसान हुआ। दुकानें बंद रहीं। पर्यटन प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि पाकिस्तान को खुफिया तंत्र मजबूत करना चाहिए। सीमा पर निगरानी बढ़ानी होगी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने निंदा की। भारत ने भी हमले की भर्त्सना की। विदेश मंत्री ने कहा कि आतंकवाद मानवता का दुश्मन है।

सुरक्षाबलों की बहादुरी की तारीफ हो रही है। एफसी के जवानों ने जान हथेली पर रखकर हमलावरों का मुकाबला किया। डिप्टी कमांडेंट जावेद इकबाल ने कहा कि तीन हमलावर मारे गए। कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। लेकिन शहीदों का दर्द रहेगा। परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा। सरकार ने जांच के आदेश दिए। आईएसआई को अलर्ट किया गया।

पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद से जूझ रहा है। 2000 के दशक में अल-कायदा और तालिबान ने कई हमले किए। 2014 के पेशावर स्कूल हमले में 150 बच्चे मारे गए। उसके बाद ऑपरेशन जुल्फिकार चला। लेकिन टीटीपी फिर सक्रिय हो गया। 2021 में अफगानिस्तान से तालिबान की जीत के बाद समस्या बढ़ी। टीटीपी के 6000 से ज्यादा लड़ाके अफगानिस्तान में हैं। पाकिस्तान ने ड्रोन हमले किए, लेकिन असर कम।

क्षेत्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान को पड़ोसियों से बात करनी चाहिए। अफगानिस्तान के साथ सहयोग बढ़ाना होगा। आर्थिक मदद से विकास लाना जरूरी। बेरोजगारी और गरीबी आतंकवाद को जन्म देती है। पेशावर जैसे शहरों में युवाओं को नौकरी दें। शिक्षा पर जोर।

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