Tech News: दिल्ली की जहरीली हवा ने एयर प्यूरीफायर को भी किया काला, दो हफ्ते में फिल्टर ब्लॉक; वायरल वीडियो ने लोगों को हिला दिया।
दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों का मौसम शुरू होते ही वायु प्रदूषण ने फिर से विकराल रूप धारण कर लिया है। नवंबर 2025 के मध्य तक शहर का औसत
दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों का मौसम शुरू होते ही वायु प्रदूषण ने फिर से विकराल रूप धारण कर लिया है। नवंबर 2025 के मध्य तक शहर का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 400 से ऊपर पहुंच गया, जो गंभीर श्रेणी में आता है। इस जहरीली हवा का असर न केवल लोगों के फेफड़ों पर पड़ रहा है, बल्कि घरों में लगे एयर प्यूरीफायर भी इसका शिकार हो रहे हैं। एक वीडियो जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, उसमें एक व्यक्ति ने अपना नया एयर प्यूरीफायर खोलकर दिखाया, जिसका फिल्टर महज दो हफ्ते में पूरी तरह काला पड़ गया। यह वीडियो प्रदूषण की भयावहता को बयां करता है और लोगों में चिंता की लहर दौड़ा रहा है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, 13 नवंबर को दिल्ली का एक्यूआई 405 तक पहुंचा, जो पिछले साल के दिसंबर के बाद सबसे खराब स्तर है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति पराली जलाने, वाहनों के धुएं और निर्माण कार्यों के कारण बनी है।
यह वीडियो 11 नवंबर के आसपास इंस्टाग्राम पर अभिषेक बाजपाई ने शेयर किया। वीडियो में वे ब्लिंकिट से ऑर्डर किया नया एयर प्यूरीफायर अनबॉक्स करते दिखते हैं। सफेद फिल्टर वाला यह यंत्र घर में लगाने के बाद लगातार चालू रहता है। दो हफ्ते बाद जब बाजपाई ने इसे खोला तो फिल्टर पर मोटी काली परत चढ़ी हुई थी। वे कैप्शन में लिखते हैं, "दिल्ली आपके फेफड़ों को मार रही है।" वीडियो में बैकग्राउंड में देशभक्ति गाना 'मेरा देश बदल रहा है' बज रहा है, जो स्थिति की विडंबना को और उजागर करता है। यह क्लिप अब तक लाखों बार देखी जा चुकी है। लोग कमेंट्स में कह रहे हैं कि अगर मशीन इतनी जल्दी गंदी हो रही है तो इंसानी शरीर का क्या हाल होगा। एक यूजर ने लिखा, "एयर प्यूरीफायर को खुद प्यूरीफिकेशन की जरूरत पड़ गई।" दूसरे ने कहा, "यह सरकार की गलती है, लोगों की नहीं।"
दिल्ली में प्रदूषण का यह मौसमी संकट हर साल आता है, लेकिन 2025 में यह और गंभीर हो गया। सीपीसीबी के डेटा से पता चलता है कि 9 नवंबर को एक्यूआई 372 था, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में था। बावाना जैसे इलाकों में यह 412 तक पहुंचा। ठंडी हवा के कारण प्रदूषक कण जमीन के करीब रह जाते हैं, जिससे स्मॉग की चादर बिछ जाती है। पराली जलाने का मौसम चल रहा है, जब पंजाब और हरियाणा के किसान फसल के अवशेष जलाते हैं। दिल्ली सरकार ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (जीआरएपी) के तहत स्टेज 3 लागू किया है। इसमें गैर-जरूरी निर्माण कार्य बंद हैं, सरकारी दफ्तरों में 50 प्रतिशत कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं। स्कूलों में पहली से पांचवीं कक्षा के बच्चों के लिए हाइब्रिड मोड शुरू हो गया। लेकिन इन उपायों से भी राहत नहीं मिल रही। एक्यूआई अभी भी 400 के आसपास घूम रहा है।
एयर प्यूरीफायर अब दिल्ली के घरों का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। लोग इन्हें फेफड़ों की रक्षा के लिए खरीद रहे हैं। लेकिन वायरल वीडियो दिखाते हैं कि ये मशीनें भी प्रदूषण के आगे लाचार हैं। एक अन्य वीडियो में एक महिला अपने एयर प्यूरीफायर को साफ करती नजर आ रही है। फिल्टर पर जमी कालिख ब्रश से भी नहीं उतर रही। वह कहती हैं, "इतना जहरीला धुआं कि घर के अंदर रहना भी खतरनाक हो गया।" यह वीडियो इंस्टाग्राम पर प्रगति अग्रवाल ने शेयर किया। बैकग्राउंड में धूल गिरती दिख रही है, जैसे चिमनी का कालिख। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने इसे 'स्पा डे' कहा, लेकिन चिंता जताई कि अगर मशीनें इतनी गंदी हो रही हैं तो सांस लेना कितना मुश्किल होगा। एक यूजर ने लिखा, "दिल्ली को साफ हवा की जरूरत है, न कि स्लोगन की।"
गुड़गांव की एक महिला ने भी एक्स पर अपने प्यूरीफायर का फिल्टर शेयर किया। इशा नाम की यूजर ने लिखा, "यह गुड़गांव का एयर प्यूरीफायर फिल्टर है। 200 करोड़ के अपार्टमेंट्स वाली जगह, जहां फेफड़े ओवरटाइम कर रहे हैं।" पोस्ट पर हजारों लाइक्स आए। लोग कह रहे हैं कि उत्तर भारत में एयर प्यूरीफायर अब 'बेसिक सर्वाइवल गियर' बन गए हैं। एक यूजर ने लिखा, "यह चिमनी से सांस लेने जैसा है।" दिल्ली-एनसीआर में एक्यूआई 450 से ऊपर रहने पर लोग घर से बाहर निकलना बंद कर देते हैं। सुबह की सैर अब 'चोकिंग मैराथन' बन गई है। विशेषज्ञ कहते हैं कि पीएम 2.5 कण फेफड़ों में घुस जाते हैं, जो कैंसर और हृदय रोग का कारण बनते हैं।
सरकार के उपायों पर सवाल उठ रहे हैं। क्लाउड सीडिंग और वाटर स्प्रिंकलर जैसे प्रयास दिखावटी लग रहे। एक वीडियो में एक उद्यमी कपिल धामा ने दिखाया कि दरवाजा खोलते ही उनके प्यूरीफायर का एक्यूआई 97 से कूदकर 500 हो गया। वे कहते हैं, "एनसीआर की हवा इतनी खराब कि प्यूरीफायर ओवरटाइम कर रहा, जबकि राजनेता क्लीन हेडलाइंस के लिए कैंपेनिंग कर रहे।" यह वीडियो एक्स पर वायरल हुआ। नेटिजंस ने कहा, "गांव जाने का वक्त आ गया।" दिल्ली सरकार और केंद्र के बीच दोषारोपण चल रहा। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाब का धुआं दिल्ली नहीं पहुंचता। लेकिन डेटा उल्टा कहता है।
सोशल मीडिया पर ये वीडियो बहस छेड़ रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि प्रदूषण पर राजनीति हो रही। एक पोस्ट में लिखा, "हर सर्दी वही कहानी- खांसी, सिरदर्द, जलन भरी आंखें। बच्चे धुंधला आकाश को सामान्य मानने लगे।" फैक्टरियों के धुएं को भी जिम्मेदार ठहराया जा रहा। एक यूजर ने कहा, "दिल्ली को एयर प्यूरीफायर की जरूरत नहीं, रियलिटी चेक और ईगो डिटॉक्स की।" इंफ्लुएंसर्स अब डीआईवाई एयर प्यूरीफायर के वीडियो शेयर कर रहे। एक क्रिएटर ने फैन और एचईपीए फिल्टर से घरेलू प्यूरीफायर बनाया। लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि ये सुरक्षित नहीं। सर्टिफाइड मशीनें ही इस्तेमाल करें।
दिल्ली का प्रदूषण वैश्विक समस्या है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के अनुसार, भारत के 75 सबसे प्रदूषित शहरों में से ज्यादातर उत्तर भारत के हैं। 2025 में बेंगलुरु और चेन्नई जैसे शहर भी लिस्ट में शामिल हो गए। लेकिन दिल्ली सबसे ऊपर है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि लंबे समय तक प्रदूषण में रहने से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और डिप्रेशन बढ़ता है। बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित। अस्पतालों में सांस की बीमारियां 30 प्रतिशत बढ़ीं। डॉक्टर सलाह देते हैं कि मास्क पहनें, घर बंद रखें और नमक पानी से गरारा करें। लेकिन मूल समस्या का समाधान नहीं।
सरकार ने अंतरराज्यीय परिषद बुलाई। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से बात हो रही। लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि लंबे समय के उपाय चाहिए- इलेक्ट्रिक वाहन बढ़ाएं, फैक्टरियां शिफ्ट करें, हरियाली बढ़ाएं। सोशल मीडिया पर #FightForBreath जैसे कैंपेन चल रहे। लोग कहते हैं कि प्रदूषण अब लग्जरी बन गया। साफ हवा के लिए प्रीमियम चुकाना पड़ रहा। वायरल वीडियो ने जागरूकता बढ़ाई। एक यूजर ने लिखा, "अगर फिल्टर काला हो रहा है तो कल्पना करें फेफड़ों का क्या हाल।"
यह संकट दिल्लीवासियों को झकझोर रहा। सुबह की धुंध में लोग खांसते हुए काम पर जाते। बच्चे स्कूल न जा सकें। अर्थव्यवस्था प्रभावित- निर्माण रुक गया। पर्यटन कम। लेकिन उम्मीद है कि ये वीडियो सरकार को जगाएंगे। लोग कहते हैं कि साफ हवा मौलिक अधिकार है। प्रदूषण रोकने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी। किसान वैकल्पिक तरीके अपनाएं, शहरवासी कार शेयर करें। विशेषज्ञों का कहना है कि 2047 तक ड्रग फ्री इंडिया का सपना, लेकिन पहले एयर फ्री इंडिया।
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