देश- विदेश: बेगानी शादी में .... दीवाना, ट्रंप ने कहा "अगर ज़रूरत पड़ती है तो ईरान पर हमला करने से हिचकिचाएंगे नहीं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि ईरान अपनी यूरेनियम संवर्धन ...
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि ईरान अपनी यूरेनियम संवर्धन गतिविधियों को फिर से शुरू करता है, तो अमेरिका सैन्य हमले करने से नहीं हिचकिचाएगा। यह बयान 25 जून 2025 को नीदरलैंड्स में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान दिया गया, जहां ट्रंप ने दावा किया कि हाल के अमेरिकी हमलों ने ईरान के प्रमुख परमाणु स्थलों—फोर्डो, नातांज़ और इस्फहान—को "पूरी तरह नष्ट" कर दिया है। हालांकि, खुफिया रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों का कहना है कि इन हमलों का प्रभाव उतना गंभीर नहीं हो सकता, जितना ट्रंप दावा कर रहे हैं। इस बीच, ईरान ने इन हमलों को "अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन" करार देते हुए जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है।
- ट्रंप का बयान
25 जून 2025 को नाटो शिखर सम्मेलन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, "हमने ईरान के परमाणु स्थलों पर पूरी तरह नष्ट करने वाला हमला किया। यह कुल विनाश था। अगर ईरान फिर से संवर्धन शुरू करता है, तो हम फिर से हमला करेंगे।" उन्होंने यह भी दावा किया कि इजरायल ने हमले के बाद फोर्डो परमाणु स्थल पर अपने एजेंट भेजे थे, जिन्होंने "कुल विनाश" की पुष्टि की। ट्रंप ने कहा, "ईरान अब परमाणु हथियार बनाने की स्थिति में नहीं है। यह कई दशकों तक नहीं हो पाएगा।"
ट्रंप ने 22 जून 2025 को हुए अमेरिकी हमलों को "शानदार सैन्य सफलता" करार दिया, जिसमें बी-2 स्टील्थ बॉम्बर्स ने 14 जीबीयू-57 मासिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर (बंकर बस्टर) बमों का इस्तेमाल किया। इन हमलों में फोर्डो, नातांज़ और इस्फहान के परमाणु स्थलों को निशाना बनाया गया। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, "ईरान के परमाणु स्थलों को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। यह इतिहास की सबसे सफल सैन्य कार्रवाइयों में से एक है।"
- हमलों का प्रभाव: दावे बनाम हकीकत
ट्रंप के दावों के उलट, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और विशेषज्ञों की प्रारंभिक रिपोर्ट्स बताती हैं कि हमलों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को केवल कुछ महीनों के लिए ही रोका जा सका। डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (डीआईए) की एक गोपनीय रिपोर्ट के अनुसार, फोर्डो, नातांज़ और इस्फहान के ऊपरी ढांचों को नुकसान पहुंचा, लेकिन भूमिगत सुविधाएं और सेंट्रीफ्यूज बड़े पैमाने पर बरकरार हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ईरान ने हमले से पहले अपनी 60% तक संवर्धित यूरेनियम की 400 किलोग्राम भंडार को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर लिया था।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कहा, "फोर्डो में भूमिगत नुकसान का आकलन करना अभी संभव नहीं है, लेकिन सेंट्रीफ्यूज की संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए महत्वपूर्ण क्षति की उम्मीद है।" हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि 60% तक संवर्धित यूरेनियम का भंडार, जो परमाणु हथियार के लिए 90% तक संवर्धन से केवल एक कदम दूर है, अभी भी सुरक्षित हो सकता है। ईरानी अधिकारियों ने दावा किया कि उन्होंने हमले से पहले फोर्डो को खाली कर लिया था। ईरान की संसद के सलाहकार मेहदी मोहम्मदी ने कहा, "हमने कई दिनों पहले फोर्डो को खाली कर लिया था। कोई अपूरणीय नुकसान नहीं हुआ।" ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने हमलों को "अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन" करार देते हुए कहा कि इससे कोई रेडियोधर्मी रिसाव नहीं हुआ और स्थानीय निवासियों के लिए कोई खतरा नहीं है।
- ईरान का जवाब
ईरान ने ट्रंप की धमकी और हमलों की निंदा की है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा, "अमेरिकी हमले ने कूटनीति को ध्वस्त कर दिया। हमारा देश आत्मरक्षा का अधिकार रखता है।" ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने कहा कि देश अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए जारी रखेगा और किसी भी हमले का "आनुपातिक जवाब" देगा। ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को अवरुद्ध कर सकता है, जो वैश्विक तेल व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, ईरान ने रूस और चीन जैसे सहयोगियों से समर्थन मांगा है, जो अमेरिकी हमलों की निंदा कर चुके हैं। रूस ने इसे "गैर-जिम्मेदाराना" करार दिया, जबकि यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि "बातचीत ही इस संकट का समाधान है।"
ईरान का परमाणु कार्यक्रम लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय विवाद का विषय रहा है। 2015 में, ओबामा प्रशासन के तहत संयुक्त व्यापक कार्य योजना (जेसीपीओए) पर हस्ताक्षर हुए, जिसमें ईरान ने अपने यूरेनियम संवर्धन को 3.67% तक सीमित करने और सेंट्रीफ्यूज की संख्या में कटौती करने का वादा किया था। बदले में, उसे प्रतिबंधों में राहत मिली। हालांकि, 2018 में ट्रंप ने इस समझौते से अमेरिका को वापस ले लिया, जिसके बाद ईरान ने 2021 से 60% तक यूरेनियम संवर्धन शुरू कर दिया।
2023 में, आईएईए ने बताया कि ईरान का यूरेनियम भंडार 5,525 किलोग्राम तक पहुंच गया, जो जेसीपीओए की सीमा से 27 गुना अधिक है। इसमें 833 किलोग्राम 20-60% तक संवर्धित यूरेनियम शामिल है, जो परमाणु हथियार के लिए खतरनाक स्तर माना जाता है। ट्रंप ने हाल के महीनों में ईरान के साथ कूटनीतिक समाधान की कोशिश की, जिसमें क्षेत्रीय परमाणु कंसोर्टियम की पेशकश शामिल थी, लेकिन ईरान ने शून्य संवर्धन की शर्त को खारिज कर दिया।इजरायल, जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपने लिए खतरा मानता है, ने 13 जून 2025 को ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हमले शुरू किए। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा, "हमने ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करने का वादा पूरा किया।" ट्रंप ने इजरायल के साथ मिलकर हमले किए, लेकिन बाद में इजरायल की ओर से युद्धविराम उल्लंघन की आलोचना भी की।
ट्रंप के बयान और हमलों को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। @news24tvchannel ने 18 जून को पोस्ट किया, "ईरान ने ट्रंप के दावों को झूठा बताया और जवाबी हमले की चेतावनी दी।" @aajtak ने लिखा, "ईरान ने कहा कि अगर अमेरिका हमला करता है, तो हम भी जवाब देंगे।" कुछ यूजर्स ने ट्रंप के सैन्य दावों का समर्थन किया, जबकि अन्य ने इसे क्षेत्रीय अस्थिरता का कारण बताया। ट्रंप की चेतावनी और हाल के हमलों ने मध्य पूर्व में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। हालांकि अमेरिका और इजरायल का दावा है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम "नष्ट" हो गया, लेकिन खुफिया रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल अस्थायी झटका है। ईरान की जवाबी धमकियां और क्षेत्रीय सहयोगियों का समर्थन एक बड़े संघर्ष की आशंका को बढ़ा रहा है।
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