देश- विदेश: ट्रम्प और नेतन्याहू की व्हाइट हाउस में मुलाकात- गाजा और ईरान पर हुई अहम चर्चा।
Trump Netanyahu meeting: व्हाइट हाउस में हुई इस मुलाकात में डोनाल्ड ट्रम्प और बेंजामिन नेतन्याहू ने मध्य पूर्व की दो सबसे जटिल समस्याओं—गाजा में इजरायल-हमास....
National and International News: व्हाइट हाउस में हुई इस मुलाकात में डोनाल्ड ट्रम्प और बेंजामिन नेतन्याहू ने मध्य पूर्व की दो सबसे जटिल समस्याओं—गाजा में इजरायल-हमास युद्ध और ईरान के साथ हाल के सैन्य तनाव—पर चर्चा की। यह मुलाकात इसलिए भी खास थी क्योंकि यह ट्रम्प के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद नेतन्याहू की तीसरी व्हाइट हाउस यात्रा थी। दोनों नेताओं ने पिछले महीने ईरान के परमाणु ठिकानों पर संयुक्त सैन्य हमलों में सहयोग किया था, जिसे दोनों ने एक बड़ी सफलता बताया। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य गाजा में 21 महीने से चल रहे युद्ध को खत्म करने और बंधकों को रिहा करने के लिए एक संघर्ष विराम (सीजफायर) समझौते पर प्रगति करना था। इसके अलावा, ईरान के साथ हाल के संघर्ष और क्षेत्रीय शांति के लिए अब्राहम समझौतों को और विस्तार देने पर भी बात हुई। ट्रम्प ने इस मुलाकात से पहले कहा था कि वह गाजा में युद्ध को जल्द खत्म करना चाहते हैं और बंधकों की रिहाई उनकी प्राथमिकता है।
- गाजा में युद्ध और सीजफायर की कोशिशें
गाजा में इजरायल और हमास के बीच युद्ध 7 अक्टूबर 2023 को शुरू हुआ था, जब हमास के नेतृत्व में हुए हमले में करीब 1200 इजरायली मारे गए और 250 लोग बंधक बनाए गए। जवाब में, इजरायल ने गाजा पर बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू की, जिसमें गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 56,000 से ज्यादा फलस्तीनी मारे गए हैं। इस युद्ध ने गाजा को तबाह कर दिया है, और लाखों लोग बेघर हो गए हैं। ट्रम्प और नेतन्याहू की मुलाकात में गाजा में 60 दिन के सीजफायर प्रस्ताव पर चर्चा हुई, जिसे अमेरिका ने तैयार किया है। इस प्रस्ताव के तहत हमास 28 बंधकों को रिहा करेगा, जिनमें 10 जीवित और 18 मृत बंधक शामिल हैं।
बदले में, गाजा में मानवीय सहायता की आपूर्ति बढ़ाई जाएगी, और इजरायल कुछ इलाकों से अपनी सेना हटाएगा। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अभी सहमति नहीं बनी है, क्योंकि हमास युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करने और इजरायली सेना की पूरी वापसी की मांग कर रहा है, जबकि नेतन्याहू का कहना है कि युद्ध तब तक चलेगा, जब तक हमास पूरी तरह आत्मसमर्पण नहीं कर देता। ट्रम्प ने इस मुलाकात से पहले कहा था कि वह इस सप्ताह के भीतर बंधकों की रिहाई से जुड़ा एक समझौता होने की उम्मीद करते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि स्थिति दिन-ब-दिन बदल रही है। कतर में इजरायल और हमास के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता चल रही है, जिसमें अमेरिकी मध्यस्थ स्टीव विटकॉफ शामिल हैं।
- ईरान के साथ तनाव और हाल की कार्रवाइयां
ईरान के मुद्दे पर भी इस मुलाकात में गंभीर चर्चा हुई। पिछले महीने इजरायल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर संयुक्त हमले किए थे, जिसके बाद दोनों देशों के बीच 12 दिन का युद्ध हुआ। इन हमलों को नेतन्याहू और ट्रम्प ने बड़ी सफलता बताया, और ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह नष्ट हो गया है। हालांकि, ट्रम्प ने यह भी कहा कि वह ईरान के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच जल्द ही प्रत्यक्ष वार्ता शुरू होगी, जिसका उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर एक नया समझौता करना है। नेतन्याहू ने इस मुलाकात में ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात की, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि ईरान में सत्ता परिवर्तन का फैसला वहां की जनता पर छोड़ देना चाहिए।
- अब्राहम समझौते और क्षेत्रीय शांति
ट्रम्प और नेतन्याहू ने अब्राहम समझौतों को और विस्तार देने पर भी बात की। ये समझौते ट्रम्प के पहले कार्यकाल में हुए थे, जिनके तहत इजरायल ने संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और मोरक्को जैसे अरब देशों के साथ संबंध सामान्य किए। अब ट्रम्प की योजना सऊदी अरब और सीरिया जैसे देशों को भी इस समझौते में शामिल करने की है। हालांकि, सऊदी अरब ने स्पष्ट किया है कि वह तब तक इजरायल के साथ संबंध सामान्य नहीं करेगा, जब तक फलस्तीनी राज्य की स्थापना के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते। इस मुलाकात में नेतन्याहू ने कहा कि वह क्षेत्र में शांति के लिए नए अवसर देख रहे हैं, खासकर ईरान की कमजोरी के बाद।
- ट्रम्प और नेतन्याहू का रिश्ता
ट्रम्प और नेतन्याहू के बीच रिश्ते हमेशा से जटिल रहे हैं। ट्रम्प ने पहले नेतन्याहू की आलोचना की थी, लेकिन हाल के महीनों में दोनों नेताओं के बीच सहयोग बढ़ा है, खासकर ईरान के खिलाफ कार्रवाइयों के बाद। इस मुलाकात में नेतन्याहू ने ट्रम्प को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित करने का पत्र सौंपा, जो ट्रम्प की लंबे समय से इच्छा रही है। हालांकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ट्रम्प नेतन्याहू पर गाजा युद्ध खत्म करने के लिए दबाव डाल रहे हैं, क्योंकि वह मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने वाले नेता के रूप में अपनी छवि बनाना चाहते हैं। इसके अलावा, ट्रम्प ने हाल ही में इजरायल पर 17% आयात शुल्क लगाने की घोषणा की है, जिस पर नेतन्याहू ने कहा कि वह इस व्यापार घाटे को जल्द खत्म करेंगे। इस मुलाकात के दौरान व्हाइट हाउस के बाहर सैकड़ों प्रदर्शनकारी जमा हुए, जो गाजा में युद्ध के खिलाफ नारे लगा रहे थे। उन्होंने नेतन्याहू के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) के गिरफ्तारी वारंट का समर्थन किया और इजरायल को हथियारों की आपूर्ति बंद करने की मांग की।
गाजा में मानवीय संकट गहराता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों ने इजरायल की नाकाबंदी की आलोचना की है, जिसके कारण गाजा में भोजन और अन्य जरूरी सामान की कमी हो गई है। ट्रम्प ने कहा कि वह गाजा में मानवीय सहायता बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन हमास का कहना है कि इजरायल सहायता के प्रवेश में बाधा डाल रहा है। यह मुलाकात गाजा और ईरान के मुद्दों पर प्रगति की उम्मीद जगाती है, लेकिन कई चुनौतियां बाकी हैं। गाजा में सीजफायर समझौते पर अभी सहमति नहीं बनी है, और हमास और इजरायल के बीच गहरे मतभेद हैं। ईरान के साथ बातचीत भी जटिल होगी, क्योंकि दोनों पक्षों के बीच विश्वास की कमी है। ट्रम्प की मध्य पूर्व नीति का लक्ष्य क्षेत्र में शांति और स्थिरता लाना है, लेकिन इसके लिए इजरायल और फलस्तीनी पक्षों को बड़े समझौते करने होंगे। नेतन्याहू के लिए यह मुलाकात घरेलू राजनीति में भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इजरायल में उनकी लोकप्रियता ईरान के खिलाफ कार्रवाइयों के बाद बढ़ी है। ट्रम्प और नेतन्याहू की यह मुलाकात मध्य पूर्व के लिए एक महत्वपूर्ण पल है। गाजा में युद्ध को खत्म करने और ईरान के साथ तनाव को कम करने की कोशिशें तेज हो रही हैं, लेकिन इन लक्ष्यों को हासिल करना आसान नहीं होगा।
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