असम विधानसभा चुनाव 2026: मूसलाधार बारिश पर भारी पड़ा लोकतंत्र का जज्बा, सुबह 9 बजे तक 17.87% वोटिंग।
असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए आज यानी 9 अप्रैल को मतदान की प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुई। राज्य के ऊपरी और निचले इलाकों
- लोकतंत्र का महापर्व: खराब मौसम के बावजूद पोलिंग बूथों पर उमड़ा जनसैलाब, असम के पहले दो घंटों में बंपर मतदान
- असम में 126 सीटों के लिए मतदान शुरू: माजुली में सबसे अधिक उत्साह, भारी वर्षा के बीच मतदाताओं ने दिखाई ताकत
असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए आज यानी 9 अप्रैल को मतदान की प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुई। राज्य के ऊपरी और निचले इलाकों के कई जिलों में सुबह से ही तेज हवाओं के साथ बारिश हो रही थी, जिसने चुनाव अधिकारियों और राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी थी। हालांकि, जैसे-जैसे सूरज चढ़ने लगा, मतदाताओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई। निर्वाचन आयोग के अनुसार, पहले दो घंटों के भीतर ही मतदान का प्रतिशत 18 के करीब पहुंच गया, जो पिछले चुनावों की तुलना में काफी उत्साहजनक है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं और बुजुर्ग मतदाता छाता लेकर कतारों में खड़े नजर आए, जो इस बात का प्रमाण है कि विकास और क्षेत्रीय मुद्दों पर जनता अपनी राय देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
राज्य के भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी मतदान को लेकर काफी सक्रियता देखी जा रही है। विश्व के सबसे बड़े नदी द्वीप माजुली में सुबह 9:00 बजे तक सबसे अधिक 20.03% मतदान दर्ज किया गया है। वहीं, बोडोलैंड क्षेत्रीय क्षेत्र के तामुलपुर जैसे इलाकों में मतदान की रफ्तार थोड़ी धीमी रही, जहां लगभग 15.32% लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। गुवाहाटी जैसे शहरी केंद्रों में भी बारिश के कारण शुरुआती घंटों में कुछ बाधा आई, लेकिन सुबह 8:30 बजे के बाद वहां भी मतदान केंद्रों पर भीड़ बढ़ने लगी। निर्वाचन आयोग ने बारिश को देखते हुए कई केंद्रों पर अतिरिक्त शेड और तिरपाल की व्यवस्था की थी ताकि मतदाताओं को असुविधा न हो।
सुरक्षा के मोर्चे पर, राज्य सरकार और चुनाव आयोग ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। संवेदनशील और अति-संवेदनशील मतदान केंद्रों पर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। असम पुलिस के जवान भी चप्पे-चप्पे पर नजर रख रहे हैं ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके। इस बार के चुनाव में कुल 722 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला लगभग 2.5 करोड़ मतदाता करेंगे। भाजपा के नेतृत्व वाला गठबंधन राज्य में तीसरी बार सत्ता वापसी की उम्मीद कर रहा है, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए संघर्षरत है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शुरुआती घंटों का यह उच्च मतदान प्रतिशत राज्य में एक बड़ी राजनीतिक लहर का संकेत हो सकता है।
मतदान केंद्रों पर स्वास्थ्य सुविधाएं
खराब मौसम और उमस को देखते हुए कामरूप और कई अन्य जिलों के मतदान केंद्रों पर विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर लगाए गए हैं। चूंकि मौसम विभाग ने आने वाले घंटों में भी गरज के साथ बारिश की चेतावनी दी है, इसलिए निर्वाचन अधिकारियों ने प्राथमिक उपचार, ओआरएस और पीने के पानी की उचित व्यवस्था की है। दिव्यांगों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए व्हीलचेयर और सहायता डेस्क की भी व्यवस्था की गई है ताकि वे बिना किसी कठिनाई के अपना वोट डाल सकें।
मतदान केंद्रों पर युवा मतदाताओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय है। पहली बार वोट डालने वाले युवाओं में काफी जोश देखा जा रहा है। कई मतदान केंद्रों को 'मॉडल पोलिंग स्टेशन' के रूप में विकसित किया गया है, जहां असमिया संस्कृति की झलक देखने को मिल रही है। इन केंद्रों पर मतदाताओं का स्वागत पारंपरिक 'गामोसा' से किया जा रहा है। चुनाव आयोग ने पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए सभी केंद्रों पर वीवीपीएटी (VVPAT) मशीनों का उपयोग किया है। तकनीक के साथ-साथ पारंपरिक मूल्यों का यह समावेश असम के इस चुनाव को और भी खास बना रहा है। भारी बारिश के बावजूद लोगों का डिजिटल स्कोरकार्ड साझा करना और सेल्फी पॉइंट पर फोटो खिंचवाना सोशल मीडिया पर भी छाया हुआ है।
राजनीतिक दलों की बात करें तो, प्रमुख नेताओं ने सुबह-सुबह अपने संबंधित क्षेत्रों में मतदान किया और जनता से अधिक से अधिक संख्या में बाहर आने की अपील की। असम की राजनीतिक दिशा तय करने वाले इस चुनाव में नागरिकता, चाय बागान श्रमिकों की मजदूरी, बाढ़ नियंत्रण और बुनियादी ढांचे का विकास मुख्य मुद्दे बनकर उभरे हैं। चूंकि असम में चुनाव एक ही चरण में संपन्न हो रहे हैं, इसलिए प्रशासन पर दबाव अधिक है। अधिकारियों का कहना है कि शाम 5:00 बजे तक मतदान का प्रतिशत 80 को पार कर सकता है, बशर्ते मौसम में थोड़ा सुधार हो। वर्तमान रुझान बताते हैं कि जनता ने शांतिपूर्ण और स्थिर सरकार के लिए अपना मन बना लिया है।
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