फतेहपुर में नशे में धुत दरोगा रघुनाथ सिंह का वीडियो वायरल, डीआईजी को दी धमकी, एसपी ने किया निलंबित।
Fatehpur Viral News: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में एक चौंकाने वाली घटना ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खखरेरू थाने में तैनात दरोगा...
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में एक चौंकाने वाली घटना ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खखरेरू थाने में तैनात दरोगा रघुनाथ सिंह राजावत का एक वीडियो 21 जुलाई, 2025 को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें वह नशे में धुत होकर वर्दी में सड़क किनारे झाड़ियों के पास पड़े दिखे। वीडियो में दरोगा डीआईजी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अभद्र टिप्पणियां करते और धमकियां देते नजर आए। इस वीडियो के वायरल होने के बाद फतेहपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अनूप सिंह ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दरोगा को निलंबित कर दिया और मामले की जांच शुरू की।
21 जुलाई, 2025 की रात फतेहपुर जिले के परवेजपुर चौकी क्षेत्र में यह घटना घटी। दरोगा रघुनाथ सिंह राजावत, जो खखरेरू थाने में तैनात थे, नशे की हालत में सड़क किनारे झाड़ियों के पास पड़े थे। स्थानीय लोगों ने उन्हें इस हालत में देखा और इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया। वीडियो में दरोगा वर्दी में नशे की हालत में डीआईजी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को धमकाते हुए कह रहे हैं, “मैं सर्वोसर्वा हूं। डीआईजी और आईजी मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते। ज्यादा से ज्यादा मेरा ट्रांसफर कर सकते हैं।” उनकी अभद्र भाषा और बयानबाजी ने न केवल पुलिस विभाग की मर्यादा को ठेस पहुंचाई, बल्कि जनता में भी आक्रोश पैदा किया।
स्थानीय लोगों ने तुरंत डायल 112 पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने दरोगा को हिरासत में लिया और थाने ले गई। वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला तूल पकड़ गया। सोशल मीडिया यूजर्स ने इस घटना की कड़ी आलोचना की और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए। कुछ यूजर्स ने इसे “नशे में धुत सिस्टम” का प्रतीक बताया, जबकि अन्य ने इस तरह की हरकतों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
फतेहपुर के एसपी अनूप सिंह ने वायरल वीडियो का तुरंत संज्ञान लिया और 22 जुलाई, 2025 को दरोगा रघुनाथ सिंह को निलंबित कर दिया। एसपी ने मामले की जांच का जिम्मा क्षेत्राधिकारी (सीओ) खागा को सौंपा। प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि दरोगा शराब के नशे में थे और उनकी हरकतों ने पुलिस विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाया। एसपी ने एक बयान में कहा, “पुलिस विभाग में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस मामले की गहन जांच की जाएगी, और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।”
पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि दरोगा के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई है, और फॉरेंसिक जांच के लिए वीडियो को विशेषज्ञों के पास भेजा गया है ताकि इसकी सत्यता की पुष्टि हो सके। इसके अलावा, दरोगा के नशे की स्थिति की पुष्टि के लिए उनका मेडिकल टेस्ट भी कराया गया। जांच के नतीजे आने के बाद उनके खिलाफ और कार्रवाई की जाएगी।
वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर इस घटना ने तूफान मचा दिया। कई यूजर्स ने दरोगा की हरकतों को शर्मनाक बताया और पुलिस प्रशिक्षण पर सवाल उठाए। एक यूजर ने लिखा, “जब पुलिस ही इस तरह की हरकत करेगी, तो जनता का भरोसा कैसे कायम रहेगा?” एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, “यह सिर्फ एक दरोगा की बात नहीं, पूरा सिस्टम नशे में दिखता है।” कुछ लोगों ने इस घटना को उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली की कमजोरियों का उदाहरण बताया और सख्त सुधारों की मांग की।
हालांकि, कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि यह एक व्यक्तिगत मामला है और इसे पूरे पुलिस विभाग से जोड़ना ठीक नहीं। उन्होंने त्वरित निलंबन की कार्रवाई की तारीफ भी की, जिससे यह संदेश गया कि अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह पहली बार नहीं है जब फतेहपुर में पुलिस कर्मियों की गलत हरकतों ने सुर्खियां बटोरी हैं। इससे पहले भी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें पुलिस कर्मियों की अनुचित व्यवहार की वजह से विभाग की किरकिरी हुई। उदाहरण के लिए:
अप्रैल 2025: फतेहपुर के बिंदकी थाना क्षेत्र में एक दरोगा का एक प्रधान प्रतिनिधि के साथ गाली-गलौज करने का वीडियो वायरल हुआ था। इस मामले में भी दरोगा के खिलाफ कार्रवाई की गई थी।
नवंबर 2023: फतेहपुर में एक सिपाही का नशे में धुत होकर सड़क पर पड़े होने का वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद उसे निलंबित किया गया।
मई 2021: एक अन्य घटना में दरोगा ने एक ग्रामीण को धमकाते हुए गालियां दी थीं, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।
इन घटनाओं ने फतेहपुर जिले में पुलिस के व्यवहार और अनुशासन पर सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस प्रशिक्षण में नैतिकता और अनुशासन पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।
यह घटना उत्तर प्रदेश पुलिस के सामने मौजूद चुनौतियों को उजागर करती है। हाल के वर्षों में, उत्तर प्रदेश में पुलिस कर्मियों के अनुचित व्यवहार से जुड़े कई मामले सामने आए हैं। उदाहरण के लिए:
लखीमपुर खीरी, फरवरी 2025: एक दरोगा का वेरिफिकेशन के नाम पर रिश्वत लेते हुए वीडियो वायरल हुआ, जिसके बाद उसे निलंबित किया गया।
आजमगढ़, 2025: एक दरोगा का एक महिला के साथ अभद्र व्यवहार का वीडियो वायरल हुआ, जिसके बाद कार्रवाई की गई।
रामपुर, जुलाई 2025: एक बलात्कार पीड़िता के साथ पुलिस कर्मियों द्वारा दुर्व्यवहार का मामला सामने आया।
इन घटनाओं ने पुलिस विभाग के प्रशिक्षण, अनुशासन, और जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि पुलिस कर्मियों को नियमित रूप से नैतिकता और व्यवहार प्रशिक्षण दिया जाए। साथ ही, शराब और अन्य नशे की लत से निपटने के लिए काउंसलिंग और जांच की व्यवस्था को और मजबूत करना होगा।
इस घटना ने फतेहपुर की जनता में पुलिस के प्रति अविश्वास को बढ़ाया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब पुलिस कर्मी ही इस तरह की हरकत करेंगे, तो आम जनता की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी। कुछ लोगों ने इस घटना को पुलिस प्रशासन की नाकामी का प्रतीक बताया। दूसरी ओर, त्वरित निलंबन और जांच के आदेश से यह संदेश गया है कि प्रशासन ऐसी हरकतों को गंभीरता से ले रहा है।
इस घटना ने यह भी सवाल उठाया है कि क्या पुलिस कर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य और कार्यभार पर ध्यान देने की जरूरत है। कई बार लंबे समय तक तनाव और अनुचित कार्य परिस्थितियां पुलिस कर्मियों को गलत कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकती हैं।
फतेहपुर में दरोगा रघुनाथ सिंह का नशे में धुत होकर वरिष्ठ अधिकारियों को धमकाने का वीडियो पुलिस विभाग के लिए एक शर्मनाक घटना है। इसने न केवल पुलिस की छवि को नुकसान पहुंचाया, बल्कि जनता के बीच अविश्वास को भी बढ़ाया। हालांकि, एसपी की त्वरित कार्रवाई और निलंबन के फैसले से यह संदेश गया है कि अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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