ताजमहल के सामने भगवा झंडा और शिव आरती: वायरल वीडियो ने मचाया बवाल, आस्था या उल्लंघन?
Agra Taj Mahal News आगरा का ताजमहल, जो दुनिया के सात अजूबों में से एक है और भारत की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है, एक बार फिर चर्चा में है। 21 जुलाई 2025 को ....
आगरा का ताजमहल, जो दुनिया के सात अजूबों में से एक है और भारत की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है, एक बार फिर चर्चा में है। 21 जुलाई 2025 को सावन के दूसरे सोमवार को, एक युवक ने ताजमहल के सामने मेहताब बाग में भगवा झंडा लहराया, भगवान शिव की आरती की, और "बम-बम भोले" के नारे लगाए। युवक ने यह भी दावा किया कि उसने जलाभिषेक किया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद लोग इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग इसे धार्मिक आस्था का प्रतीक मान रहे हैं, तो कुछ इसे ताजमहल की गरिमा के खिलाफ मान रहे हैं। यह घटना ऐसी नहीं है जो पहली बार हुई हो; इससे पहले भी ताजमहल पर भगवा झंडा लहराने और धार्मिक गतिविधियां करने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
21 जुलाई 2025 को, सावन के पवित्र महीने के दूसरे सोमवार को, अखिल भारत हिंदू महासभा के एक युवा नेता नितेश भारद्वाज ने आगरा के मेहताब बाग में ताजमहल के सामने यह घटना अंजाम दी। मेहताब बाग, जो यमुना नदी के किनारे ताजमहल के ठीक सामने स्थित एक ऐतिहासिक उद्यान है, इस घटना का मुख्य स्थान रहा। नितेश ने भगवा झंडा लहराया, भगवान शिव की आरती की, और "बम-बम भोले" के नारे लगाए। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने ताजमहल को "तेजो महालय" मानते हुए वहां जलाभिषेक किया। इस पूरी घटना का वीडियो उनके साथियों ने रिकॉर्ड किया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
वीडियो में नितेश को भगवा झंडा लहराते हुए और आरती करते हुए देखा जा सकता है। उनके साथ कुछ अन्य लोग भी नजर आए, जो इस धार्मिक गतिविधि में शामिल थे। वीडियो में "बम-बम भोले" के नारे और भक्ति भजन साफ सुनाई दे रहे हैं। इस घटना ने तुरंत ही लोगों का ध्यान खींचा और सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कुछ लोगों ने इसे सावन के महीने में भगवान शिव के प्रति आस्था का प्रदर्शन बताया, जबकि अन्य ने इसे ताजमहल जैसे स्मारक की गरिमा के खिलाफ एक गैरकानूनी कृत्य माना।
ताजमहल को लेकर इस तरह की घटनाएं कोई नई नहीं हैं। कुछ दक्षिणपंथी संगठन लंबे समय से दावा करते रहे हैं कि ताजमहल वास्तव में "तेजो महालय" है, जो एक प्राचीन शिव मंदिर था। हालांकि, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने 2017 में आगरा कोर्ट में स्पष्ट किया था कि ताजमहल हमेशा से एक मुस्लिम मकबरा रहा है और इसका कोई मंदिर से संबंध नहीं है।
इससे पहले, जनवरी 2021 में, हिंदू जागरण मंच के चार कार्यकर्ताओं, जिनमें उनके युवा विंग के जिला अध्यक्ष गौरव थलवाल शामिल थे, को ताजमहल परिसर में भगवा झंडा लहराने और शिव चालीसा का पाठ करने के लिए गिरफ्तार किया गया था। उस घटना का वीडियो भी वायरल हुआ था, और कार्यकर्ताओं पर भारतीय दंड संहिता की धारा 153A (धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।
इसी तरह, अक्टूबर 2020 में, हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने ताजमहल परिसर में गंगा जल छिड़का और भगवा झंडा लहराया था। उस समय सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) ने उन्हें संक्षिप्त पूछताछ के बाद छोड़ दिया था, लेकिन बाद में शिकायत दर्ज की गई थी। 2018 में, अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद की तीन महिलाओं ने ताजमहल परिसर की 400 साल पुरानी मस्जिद में धूप-बत्ती जलाकर और गंगा जल छिड़ककर पूजा की थी।
ये घटनाएं ताजमहल को लेकर एक विशेष दृष्टिकोण को दर्शाती हैं, जहां कुछ संगठन इसे धार्मिक स्थल के रूप में पेश करने की कोशिश करते हैं। हालांकि, ASI और प्रशासन ने हमेशा इसे एक स्मारक के रूप में ही माना है, जहां किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधियां प्रतिबंधित हैं।
22 जुलाई 2025 तक, इस ताजा घटना के संबंध में कोई आधिकारिक गिरफ्तारी की खबर नहीं आई है, लेकिन आगरा पुलिस और ASI इस मामले की जांच कर रहे हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह घटना ताजमहल परिसर के अंदर नहीं, बल्कि मेहताब बाग में हुई, जो ताजमहल के बाहर यमुना नदी के दूसरी ओर है। इस कारण, इसे ताजमहल परिसर में सुरक्षा उल्लंघन का मामला नहीं माना जा रहा है। फिर भी, पुलिस ने इस वीडियो को सबूत के रूप में लिया है और यह जांच कर रही है कि क्या यह कोई सुनियोजित कृत्य था।
आगरा पुलिस ने हाल ही में फर्जी वीडियो और भ्रामक सामग्री के खिलाफ सख्ती दिखाई है। मई 2025 में, एक AI-जनरेटेड वीडियो जिसमें ताजमहल पर हमले का दावा किया गया था, के खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज की थी। इस बार भी, पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे इस वीडियो को साझा करने से बचें और अफवाहों पर ध्यान न दें।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कुछ यूजर्स ने इसे सावन के महीने में भगवान शिव के प्रति श्रद्धा का प्रतीक बताया है। एक यूजर (@AnkitShuklaa) ने लिखा, "सावन के पवित्र महीने में तेजो महालय पर भगवान शिव की आरती और जलाभिषेक एक ऐतिहासिक क्षण है।" वहीं, कुछ अन्य यूजर्स ने इसे ताजमहल की गरिमा के खिलाफ बताया। एक यूजर (@AgraCitizen01) ने लिखा, "ताजमहल विश्व धरोहर है, इसे धार्मिक विवादों में घसीटना गलत है। प्रशासन को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।"
यह घटना सोशल मीडिया पर धार्मिक और सांस्कृतिक बहस का कारण बन गई है। कुछ लोग इसे हिंदू आस्था का प्रदर्शन मान रहे हैं, जबकि अन्य इसे ताजमहल जैसे राष्ट्रीय स्मारक की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला कृत्य मानते हैं।
ताजमहल की सुरक्षा की जिम्मेदारी CISF और स्थानीय पुलिस की है। परिसर में किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधियां, जैसे पूजा, झंडा लहराना, या नारेबाजी, सख्ती से प्रतिबंधित हैं। पर्यटकों को मेटल डिटेक्टर से जांचा जाता है, और सेल्फी स्टिक्स को छोड़कर किसी भी तरह के प्रचार सामग्री या धार्मिक चिन्ह ले जाने की अनुमति नहीं है। हालांकि, मेहताब बाग एक सार्वजनिक उद्यान है, जहां इस तरह की गतिविधियों पर निगरानी कम है।
ASI के एक अधिकारी ने 2021 में कहा था कि छोटे कपड़े या झंडे को मेटल डिटेक्टर से पकड़ना मुश्किल होता है, जिसका फायदा कुछ लोग उठाते हैं। इस घटना के बाद, ASI ने CISF से सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा करने को कहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें।
ताजमहल हर साल लाखों देशी-विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करता है। अक्टूबर से मार्च तक का समय इसका पीक सीजन होता है, जब रोजाना 15,000 से 20,000 पर्यटक आते हैं। इस तरह की घटनाएं न केवल ताजमहल की छवि को प्रभावित करती हैं, बल्कि पर्यटकों के अनुभव पर भी असर डालती हैं। हाल ही में, जुलाई 2025 में, पोलिश पर्यटकों ने ताजमहल के पास यमुना नदी में कचरे और गंदगी का वीडियो वायरल किया था, जिसने भारत की स्वच्छता पर सवाल उठाए थे। इस घटना ने भी पर्यटकों के बीच चर्चा पैदा की है। कुछ विदेशी पर्यटकों ने इसे सांस्कृतिक विविधता का हिस्सा माना, जबकि कुछ ने इसे ऐतिहासिक स्मारक के साथ छेड़छाड़ माना।
आगरा में ताजमहल के सामने भगवा झंडा लहराने और आरती करने की यह घटना एक बार फिर सांस्कृतिक और धार्मिक संवेदनशीलता के मुद्दों को सामने लाती है। सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव की पूजा को लेकर कुछ लोगों की आस्था समझ में आती है, लेकिन ताजमहल जैसे विश्व धरोहर स्थल को धार्मिक विवादों में घसीटना सही नहीं है। पुलिस और ASI इस मामले की जांच कर रहे हैं, और यह देखना बाकी है कि क्या इस घटना के लिए कोई कानूनी कार्रवाई होगी।
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