Viral: लखनऊ में दूध में थूकने का घिनौना कृत्य, सीसीटीवी में कैद मोहम्मद शरीफ की करतूत, पुलिस ने किया गिरफ्तार.
Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर क्षेत्र में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने स्थानीय समुदाय को झकझोर दिया और खाद्य सुरक्षा....
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर क्षेत्र में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने स्थानीय समुदाय को झकझोर दिया और खाद्य सुरक्षा के प्रति गंभीर सवाल खड़े किए। एक दूध विक्रेता, जिसकी पहचान मोहम्मद शरीफ उर्फ पप्पू के रूप में हुई है, पर आरोप है कि वह दूध में थूककर उसे ग्राहकों को सप्लाई करता था। यह घिनौनी हरकत एक घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, और वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लखनऊ पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। इस घटना ने न केवल खाद्य स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य के मुद्दों को उजागर किया, बल्कि सामुदायिक विश्वास और धार्मिक भावनाओं पर भी गहरा प्रभाव डाला। यह शर्मनाक घटना 5 जुलाई 2025 को लखनऊ के गोमतीनगर के विनय खंड क्षेत्र में हुई। स्थानीय निवासी लव शुक्ला ने बताया कि शनिवार सुबह करीब 11:15 बजे, मोहम्मद शरीफ उर्फ पप्पू उनके घर दूध देने आया। उस समय लव शुक्ला अपने घर के दरवाजे पर लगे सीसीटीवी कैमरे की लाइव फुटेज टीवी पर देख रहे थे। फुटेज में साफ दिखा कि शरीफ ने दूध की थैली का ढक्कन खोला, उसमें थूक दिया, और फिर उसे उनके दरवाजे पर रख दिया। इस दृश्य को देखकर शुक्ला और उनके परिवार के लोग दहशत में आ गए।
जांच करने पर पता चला कि शरीफ कई सालों से इलाके के दर्जनों घरों में दूध सप्लाई कर रहा था और अपनी असली पहचान छिपाकर “पप्पू” नाम से काम करता था। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस दूध का उपयोग न केवल रोजमर्रा की जरूरतों के लिए, बल्कि धार्मिक अनुष्ठानों, जैसे भगवान बांके बिहारी के अभिषेक के लिए भी किया जाता था। इस खुलासे ने समुदाय में गहरा आक्रोश पैदा किया, और कई लोगों ने इसे धार्मिक भावनाओं पर हमला करार दिया। सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई, जिसके बाद अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने गोमतीनगर थाने में शरीफ के खिलाफ शिकायत दर्ज की। लखनऊ पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए उसी दिन मोहम्मद शरीफ उर्फ पप्पू को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 269 (लापरवाही से बीमारी फैलाने की संभावना वाला कार्य), 270 (जानबूझकर बीमारी फैलाने की संभावना वाला कार्य), और 295A (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की कोशिश) के तहत मामला दर्ज किया। इसके अलावा, खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत भी जांच शुरू की गई है।
पुलिस ने शरीफ के पास से दूध की थैलियां और अन्य सामग्री जब्त की है और यह जांच कर रही है कि उसने कितने घरों में दूषित दूध सप्लाई किया। गोमतीनगर के डीसीपी शशांक सिंह ने बताया कि यह एक गंभीर मामला है, और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या शरीफ का कोई आपराधिक इतिहास है या उसने पहले भी इस तरह की हरकतें की हैं। सीसीटीवी फुटेज को सबूत के रूप में शामिल किया गया है, और स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे इस तरह की किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी पुलिस को दें। इस घटना ने गोमतीनगर जैसे पॉश इलाके में रहने वाले लोगों में भय और आक्रोश पैदा किया है। विशेष रूप से, यह तथ्य कि दूषित दूध का उपयोग धार्मिक अनुष्ठानों के लिए किया जा रहा था, ने हिंदू समुदाय की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई। अखिल भारतीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शिशिर चतुर्वेदी ने इस घटना को “थूक जिहाद” करार देते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत कार्रवाई की मांग की है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इस घटना को धार्मिक भावनाओं पर हमला बताया और सख्त सजा की मांग की। एक एक्स पोस्ट में लिखा गया, “यह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि हमारी आस्था पर हमला है।”
यह घटना खाद्य सुरक्षा के प्रति समाज में जागरूकता की कमी को उजागर करती है। दूध जैसे रोजमर्रा के उपयोग की वस्तु में मिलावट या दूषण न केवल स्वास्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि यह सामुदायिक विश्वास को भी तोड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए खाद्य विक्रेताओं की नियमित जांच, सीसीटीवी निगरानी, और सख्त नियमों की जरूरत है। लखनऊ में यह पहला मामला नहीं है, जहां खाद्य पदार्थों में मिलावट या दूषण की शिकायत सामने आई हो। हाल ही में, अहमदाबाद में एक दूध फैक्ट्री में कर्मचारी द्वारा दूध में थूकने का वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद वहां भी कार्रवाई की गई थी। इस तरह की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि खाद्य आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता और निगरानी को बढ़ाने की जरूरत है। यह घटना प्रशासन के सामने कई चुनौतियां पेश करती है। पहला, खाद्य विक्रेताओं की पृष्ठभूमि जांच और उनके कार्यों की निगरानी के लिए सख्त प्रोटोकॉल बनाए जाने चाहिए। दूसरा, इस तरह की घटनाओं को धार्मिक रंग देने से बचने के लिए संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई की जरूरत है। तीसरा, जनता में जागरूकता फैलाने के लिए अभियान चलाए जाने चाहिए। समाज के लिए यह एक सबक है कि खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना होगा। स्थानीय समुदाय को भी ऐसी घटनाओं की तुरंत शिकायत करने और सतर्क रहने की जरूरत है। हालांकि, कुछ लोगों ने इस मामले को धार्मिक रंग देने के बजाय खाद्य स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से देखने की अपील की। यह घटना उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में हाल के महीनों में सामने आए तथाकथित “थूक जिहाद” मामलों की श्रृंखला का हिस्सा मानी जा रही है, जिसने सामुदायिक तनाव को बढ़ावा दिया है।
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