अंतरिक्ष स्टेशन से चमकती दिल्ली की रात: नासा की नई तस्वीर में यमुना नदी और हवाई अड्डा जगमगाते नजर आए।
अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से पृथ्वी की सतह पर चमकते शहरों की तस्वीरें हमेशा आकर्षित करती रही हैं। हाल ही में नासा ने अंतरिक्ष स्टेशन
पटना। अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से पृथ्वी की सतह पर चमकते शहरों की तस्वीरें हमेशा आकर्षित करती रही हैं। हाल ही में नासा ने अंतरिक्ष स्टेशन की ओर से ली गई ऐसी ही एक मनमोहक तस्वीर साझा की है, जिसमें भारत की राजधानी दिल्ली रात के अंधेरे में उजाले की तरह चमक रही है। यह तस्वीर 20 नवंबर 2025 को जारी की गई, जो अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा लगभग 400 किलोमीटर ऊपर से ली गई है। इसमें दिल्ली का विशाल विस्तार साफ दिखाई देता है, जहां यमुना नदी शहर को दो हिस्सों में बांटती नजर आ रही है। नदी के किनारे बिखरी लाइटें एक चमकीली पट्टी की तरह लग रही हैं, जबकि शहर के बीचों-बीच इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा एक चमकदार केंद्र के रूप में उभर रहा है। यह तस्वीर न केवल दिल्ली की तेजी से बढ़ती शहरीकरण को दर्शाती है, बल्कि रात में शहर की ऊर्जा और जीवन शक्ति को भी उजागर करती है।
अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन, जिसे आईएसएस के नाम से जाना जाता है, 1998 से पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगा रहा है। यह एक संयुक्त परियोजना है, जिसमें अमेरिका, रूस, यूरोप, जापान और कनाडा जैसे देश शामिल हैं। स्टेशन पर मौजूद अंतरिक्ष यात्री नियमित रूप से पृथ्वी की तस्वीरें लेते हैं, जो नासा के क्रू अर्थ ऑब्जर्वेशन प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं। ये तस्वीरें वैज्ञानिकों के लिए उपयोगी होती हैं, क्योंकि इनसे शहरों के फैलाव, प्रदूषण स्तर और मानवीय गतिविधियों का अध्ययन किया जा सकता है। रात की तस्वीरों में शहरों की रोशनी प्रकाश प्रदूषण का संकेत देती है, जो पर्यावरण पर असर डालती है। नासा के अनुसार, आईएसएस से ली गई ये तस्वीरें 60 मीटर तक की सटीकता के साथ शहरों की सीमाओं को परिभाषित करने में मदद करती हैं। दिल्ली की यह नवीनतम तस्वीर उसी श्रृंखला का हिस्सा है, जहां शहरों को उनके चमक के आधार पर चुना गया है।
दुनिया भर में रात में अंतरिक्ष से सबसे चमकीले दिखने वाले शहरी केंद्रों में दिल्ली का नाम प्रमुखता से आता है। नासा की रिपोर्ट के मुताबिक, टोक्यो, न्यूयॉर्क, सिंगापुर और साओ पाउलो जैसे महानगरों के साथ दिल्ली भी इस सूची में शामिल है। टोक्यो, जापान की राजधानी, दुनिया का सबसे बड़ा महानगर है, जहां नीयन लाइट्स और ऊंची इमारतें रात को दिन की तरह चमका देती हैं। अंतरिक्ष से देखने पर टोक्यो एक विशाल चमकदार जाल की तरह लगता है, जो टोक्यो बे के किनारे फैला हुआ है। इसी तरह, न्यूयॉर्क अमेरिका का आर्थिक केंद्र है, जहां मैनहट्टन द्वीप की स्काईलाइन रात में हजारों लाइट्स से जगमगा उठती है। हडसन नदी के किनारे बिखरी ये रोशनीयां शहर की जीवंतता को दर्शाती हैं। सिंगापुर दक्षिण पूर्व एशिया का एक छोटा लेकिन घना शहर-राज्य है, जो मरीना बे और सेंटोसा द्वीप की लाइट्स से चमकता है। यहां की आधुनिक वास्तुकला और बंदरगाह गतिविधियां इसे अंतरिक्ष से एक चमकीला बिंदु बनाती हैं। ब्राजील का साओ पाउलो दक्षिण अमेरिका का सबसे बड़ा शहर है, जहां अमेजन वर्षावन के बीच में फैली इमारतें रात को एक विशाल नेटवर्क की तरह दिखाई देती हैं। इन सभी शहरों की चमक न केवल उनकी आबादी की घनत्व को बताती है, बल्कि ऊर्जा खपत और विकास की गति को भी प्रतिबिंबित करती है।
दिल्ली की यह तस्वीर विशेष रूप से रोचक है क्योंकि यह शहर के जटिल नेटवर्क को स्पष्ट रूप से दिखाती है। तस्वीर में यमुना नदी एक काली रेखा की तरह बहती दिख रही है, जो शहर को पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में विभाजित करती है। नदी के पश्चिमी किनारे पर नई दिल्ली का केंद्र, जहां संसद भवन, राष्ट्रपति भवन और व्यावसायिक इलाके हैं, घनी रोशनी से भरा हुआ है। पूर्वी ओर पुरानी दिल्ली के बाजार और आवासीय क्षेत्र फैले हैं। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, जो तस्वीर के केंद्र में चमक रहा है, हवाई यातायात का एक प्रमुख केंद्र है। इसके तीन टर्मिनल और रनवे लाइट्स एक चमकदार हब की तरह नजर आते हैं। आसपास के क्षेत्रों में गुरुग्राम और नोएडा के उभरते स्काईस्क्रेपर भी दिखाई देते हैं, जो दिल्ली के महानगरीय क्षेत्र को और विस्तृत बनाते हैं। यह तस्वीर 2025 की है, लेकिन इससे पहले भी 2012, 2020 और 2021 में आईएसएस से दिल्ली की रात की तस्वीरें ली गई थीं। इनमें विकास की निरंतरता साफ झलकती है। उदाहरण के लिए, 2012 की तस्वीर में हवाई अड्डा कम चमकीला था, लेकिन अब यह शहर का एक प्रमुख उजाला बिंदु बन चुका है।
इन तस्वीरों का महत्व केवल सौंदर्य तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिक इन्हें प्रकाश प्रदूषण का अध्ययन करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। प्रकाश प्रदूषण रात के आकाश को धुंधला कर देता है, जिससे तारे कम दिखाई देते हैं और वन्यजीवों पर असर पड़ता है। दिल्ली जैसे शहरों में सड़क लाइट्स, विज्ञापन बोर्ड और घरों की रोशनी इस प्रदूषण को बढ़ाती है। नासा के विशेषज्ञों के अनुसार, ये तस्वीरें शहरी योजना में भी मदद करती हैं। उदाहरणस्वरूप, सड़कों का जाल, बंदरगाह और हवाई अड्डे की स्थिति का विश्लेषण कर विकास परियोजनाओं को बेहतर बनाया जा सकता है। इसके अलावा, ये चित्र जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को मापने में उपयोगी हैं। रात की रोशनी से आर्थिक गतिविधियों का अनुमान लगाया जा सकता है, जैसे महामारी के दौरान लाइट्स में कमी से लॉकडाउन का असर देखा गया था।
दुनिया के अन्य चमकीले शहरों की तस्वीरें भी आईएसएस से ली गई हैं। टोक्यो की तस्वीर में सिन्जुकू और शिबुया जैसे इलाके नीयन की चमक से भरे हैं। न्यूयॉर्क में टाइम्स स्क्वायर की लाइट्स अंतरिक्ष से एक चमकदार धब्बे की तरह दिखती हैं। सिंगापुर की तस्वीर में गार्डन बाय द बे और फॉर्मूला वन ट्रैक जगमगाते हैं। साओ पाउलो में इबिरापुएरा पार्क के आसपास की इमारतें रोशनी से सजी हैं। ये सभी तस्वीरें नासा की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं, जहां इन्हें हाई रेजोल्यूशन में डाउनलोड किया जा सकता है। सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों को लाखों लोग देख चुके हैं। ट्विटर पर नासा के अकाउंट से साझा की गई दिल्ली की तस्वीर पर हजारों लाइक्स और कमेंट्स आए हैं। लोग इसे देखकर भारत के विकास पर गर्व महसूस कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, यह तस्वीर दिखाती है कि कैसे एक शहर रात में भी जागता रहता है।
भारत के संदर्भ में ये तस्वीरें विशेष महत्व रखती हैं। 1984 में राकेश शर्मा ने अंतरिक्ष से भारत को देखा था और कहा था, सारे जहां से अच्छा। आज आईएसएस से ली गई तस्वीरें उसी परंपरा को आगे बढ़ाती हैं। अप्रैल 2025 में नासा ने पूरे भारत की रात की तस्वीर साझा की थी, जिसमें दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे शहर चमक रहे थे। ये तस्वीरें घनी आबादी वाले क्षेत्रों को दर्शाती हैं, जहां लाइट्स के क्लस्टर बने हुए हैं। लेकिन कुछ क्षेत्रों में कम रोशनी वाले इलाके भी दिखते हैं, जो ग्रामीण भागों को इंगित करते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि भारत का शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है, और 2050 तक 50 प्रतिशत आबादी शहरों में होगी। ऐसे में प्रकाश प्रदूषण को नियंत्रित करना जरूरी है। नासा ने सुझाव दिया है कि एलईडी लाइट्स का इस्तेमाल कर ऊर्जा बचाई जा सकती है।
दिल्ली की तस्वीर को देखकर पर्यावरण विशेषज्ञ चिंता भी जता रहे हैं। शहर की चमक भले ही आकर्षक हो, लेकिन यह ऊर्जा की भारी खपत का संकेत है। दिल्ली में रात की लाइट्स से बिजली की मांग बढ़ती है, जो कोयले पर निर्भरता को बढ़ावा देती है। इसके अलावा, पक्षियों और कीटों पर असर पड़ता है, जो कृत्रिम रोशनी से भटक जाते हैं। लेकिन सकारात्मक पक्ष यह है कि ये तस्वीरें जागरूकता फैला रही हैं। स्कूलों में बच्चों को दिखाकर शहरी विकास के बारे में सिखाया जा सकता है। अंतरिक्ष शिक्षा के क्षेत्र में भारत भी आगे बढ़ रहा है। इसरो के गगनयान मिशन से भारतीय अंतरिक्ष यात्री खुद ऐसी तस्वीरें लेंगे। शुभांशु शुक्ला जैसे युवा अंतरिक्ष यात्री आईएसएस पर जाने की तैयारी कर रहे हैं।
आईएसएस की ये तस्वीरें हमें याद दिलाती हैं कि पृथ्वी एक नाजुक ग्रह है। रात का अंधेरा प्राकृतिक है, लेकिन मानवीय रोशनी इसे बदल देती है। दिल्ली की यह चमकती तस्वीर हमें गर्व तो देती ही है, साथ ही जिम्मेदारी भी सिखाती है। शहरों को चमकदार बनाने के साथ-साथ टिकाऊ बनाना होगा। नासा के वैज्ञानिक डॉ. केट रेमले ने कहा है कि ये तस्वीरें मानवता की उपलब्धियों का प्रमाण हैं, लेकिन हमें संतुलन बनाए रखना चाहिए। भविष्य में आईएसएस से और अधिक तस्वीरें आएंगी, जो जलवायु परिवर्तन और शहरीकरण पर नजर रखेंगी। दिल्लीवासी इस तस्वीर को देखकर शहर की सुंदरता पर मुस्कुरा रहे हैं, लेकिन उम्मीद है कि वे ऊर्जा संरक्षण की ओर भी ध्यान देंगे।
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