बरेली में रिश्तों का अनोखा फेरबदल- जीजा-साली संग भागे, तो साला जीजा की बहन को ले भागा

अगले दिन का इंतजार किसी को न था। रवींद्र, जो कल्पना का भाई और केशव का साला है, इस खबर से बेहद गुस्से में था। वह 22 साल का युवक है और गांव के पास ही एक दुकान पर काम करता है। रवीं

Sep 17, 2025 - 10:42
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बरेली में रिश्तों का अनोखा फेरबदल- जीजा-साली संग भागे, तो साला जीजा की बहन को ले भागा
बरेली में रिश्तों का अनोखा फेरबदल- जीजा-साली संग भागे, तो साला जीजा की बहन को ले भागा

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है जो किसी टीवी सीरियल की कहानी जैसा लगता है। देवरनियां थाना क्षेत्र के कमालूपुर गांव में रहने वाले 28 वर्षीय केशव कुमार, जो छह साल से शादीशुदा हैं और दो बच्चों के पिता हैं, ने 23 अगस्त को अपनी 19 वर्षीय साली कल्पना के साथ घर से कूदकर भाग जाने का फैसला कर लिया। परिवार वाले चारों तरफ तलाश करते रहे, लेकिन दोनों का कोई सुराग नहीं मिला। यह खबर गांव में फैली तो सब हैरान रह गए। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। अगले ही दिन, यानी 24 अगस्त को, केशव का साला 22 वर्षीय रवींद्र ने बदला लेने की ठानी और केशव की 19 वर्षीय बहन को लेकर फरार हो गया। इस तरह जीजा अपनी साली के साथ और साला जीजा की बहन के साथ लापता हो गए। गांव में इस घटना ने सनसनी मचा दी। लोग चौपालों पर इकट्ठा होकर इसी की चर्चा करने लगे। कोई इसे प्रेम का खेल बता रहा था तो कोई रिश्तों के टूटने की त्रासदी। पुलिस को सूचना मिलने पर दोनों पक्षों को बिठाकर समझौता कराया गया और मामला शांत हो गया।

यह घटना कमालूपुर गांव के एक साधारण परिवारों में शुरू हुई। केशव कुमार गांव में एक छोटा-मोटा काम करता है। उसकी शादी छह साल पहले हुई थी और दंपति के दो छोटे बच्चे हैं। पत्नी का नाम पूजा है, जो गांव में ही रहती है। कल्पना पूजा की छोटी बहन है, जो अभी कॉलेज में पढ़ाई कर रही थी। दोनों परिवारों के बीच रिश्ते सामान्य थे। लेकिन पिछले कुछ महीनों से केशव और कल्पना के बीच नजदीकियां बढ़ गई थीं। गांव वाले बताते हैं कि कभी-कभी दोनों को साथ देखा जाता था, लेकिन किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। 23 अगस्त की रात को केशव ने घरवालों को बताया कि वह कुछ जरूरी काम से बाहर जा रहा है। सुबह होते ही पता चला कि कल्पना भी गायब है। दोनों के फोन बंद थे और सामान भी साथ ले गए थे। पूजा ने तुरंत परिवार को सूचना दी। सबने मिलकर आसपास के इलाकों में तलाश शुरू कर दी। लेकिन कोई क्लू नहीं मिला।

अगले दिन का इंतजार किसी को न था। रवींद्र, जो कल्पना का भाई और केशव का साला है, इस खबर से बेहद गुस्से में था। वह 22 साल का युवक है और गांव के पास ही एक दुकान पर काम करता है। रवींद्र को लगा कि उसके जीजा ने परिवार की इज्जत पर बट्टा लगाया है। बदला लेने के लिए उसने केशव की बहन, जिसका नाम रानी है, को मनाया। रानी भी 19 साल की है और घर में ही रहकर सहायता करती है। रवींद्र ने रानी से कहा कि वह केशव को सबक सिखाएंगे। रानी शायद इस खेल में फंस गई या फिर खुद का मन बदल गया, यह साफ नहीं। लेकिन 24 अगस्त को दोनों भी चुपचाप घर से निकल गए। जब यह बात केशव के परिवार को पता चली तो घर में कोहराम मच गया। मां-बाप रोने लगे, भाई-बहन परेशान हो गए। अब दो परिवारों के चार युवा लापता थे। गांव के लोग इकट्ठे हो गए। कोई पुलिस बुलाने की बात कर रहा था तो कोई समझाने की कोशिश कर रहा था।

इस घटना ने कमालूपुर गांव को हिलाकर रख दिया। यह छोटा सा गांव है जहां ज्यादातर लोग खेती-बाड़ी पर निर्भर हैं। यहां की गलियों में, खेतों के किनारे और शाम को चौपाल पर बस इसी की बातें हो रही थीं। बुजुर्ग लोग इसे रिश्तों की अदला-बदली कह रहे थे। कुछ युवा इसे प्रेम की जीत बता रहे थे। लेकिन महिलाएं सबसे ज्यादा चिंतित थीं। वे कह रही थीं कि ऐसे कदम परिवार को बर्बाद कर देते हैं। बच्चे अनाथ हो जाते हैं, इज्जत जाती है। गांव के सरपंच ने भी बैठक बुलाई। उन्होंने कहा कि यह मामला परिवार का है, लेकिन गांव की प्रतिष्ठा से जुड़ा है। बाहर के लोग मजाक उड़ाएंगे। सरपंच ने दोनों परिवारों को सलाह दी कि आपसी बातचीत से हल निकालें। लेकिन गुस्सा इतना था कि कोई सुनने को तैयार नहीं। आखिरकार, 25 अगस्त को केशव की पत्नी पूजा ने देवरनियां थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में केशव और कल्पना के लापता होने का जिक्र था। रवींद्र और रानी का नाम बाद में जुड़ा।

पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। थाना प्रभारी ने टीम गठित की। उन्होंने आसपास के जिलों में निगरानी बढ़ाई। सीसीटीवी फुटेज खंगाली। मोबाइल लोकेशन ट्रैक की। पता चला कि केशव और कल्पना बरेली से बाहर किसी छोटे शहर में थे। रवींद्र और रानी भी पास ही कहीं छिपे थे। पुलिस ने तीन हफ्ते की मशक्कत के बाद सभी को बरामद कर लिया। यह सितंबर के पहले हफ्ते की बात है। जब पुलिस ने चारों को थाने लाया तो दोनों परिवार भी आ गए। वहां रोना-धोना मच गया। लेकिन हैरानी की बात यह थी कि चारों अपनी मर्जी से गए थे। कोई जबरदस्ती नहीं। केशव ने बताया कि वह कल्पना से प्यार करने लगा था। शादी का दबाव सहन नहीं हो रहा था। कल्पना ने कहा कि वह भी तैयार थी। रवींद्र ने सफाई दी कि वह बदला लेना चाहता था, लेकिन अब पछता रहा है। रानी चुप रही। पुलिस ने काउंसलर बुलाए। परिवार वालों से बात की। आखिरकार, दोनों पक्ष सहमत हो गए। कोई मुकदमा नहीं लिखा गया। समझौते पर दस्तखत हुए। चारों को घर भेज दिया गया।

इस समझौते के बाद गांव में शांति लौट आई। लेकिन चर्चाएं रुकीं नहीं। लोग कहते हैं कि आजकल युवा सोशल मीडिया के प्रभाव में आ जाते हैं। फिल्में और सीरियल देखकर ऐसे कदम उठा लेते हैं। लेकिन हकीकत में परिवार टूट जाता है। केशव के दो बच्चे अब पिता के बिना रह रहे हैं। पूजा अकेली ही उन्हें संभाल रही है। कल्पना की पढ़ाई रुक गई। रवींद्र का काम प्रभावित हुआ। रानी पर भी सवाल उठ रहे हैं। गांव वाले कहते हैं कि ऐसे मामलों में परिवार पहले सोचें। प्रेम हो तो खुलकर बात करें। भागना समाधान नहीं। पुलिस का कहना है कि ऐसे केस बढ़ रहे हैं। वे युवाओं को जागरूक करने के लिए कार्यक्रम चलाएंगे। बरेली के एसएसपी ने कहा कि परिवार की मध्यस्थता से ही सुलझे तो बेहतर। वरना कानूनी कार्रवाई होनी पड़ती है।

यह घटना उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में व्याप्त सामाजिक बदलाव को दर्शाती है। जहां एक तरफ परंपराएं मजबूत हैं, वहीं दूसरी तरफ व्यक्तिगत इच्छाएं जोर पकड़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा और जागरूकता से ऐसे विवाद कम हो सकते हैं। परिवारों को खुली बातचीत करनी चाहिए। अगर प्रेम है तो समाज को स्वीकार करने का रास्ता ढूंढें। भागना कभी स्थायी समाधान नहीं। कमालूपुर गांव अब धीरे-धीरे अपनी पुरानी जिंदगी में लौट रहा है। लेकिन यह कहानी लोगों के जेहन में बसी रहेगी। यह एक सबक है कि रिश्ते नाजुक होते हैं। इन्हें संभालना पड़ता है।

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