गाजा सिटी में इजरायली जमीनी हमले- 59 मौतें, 3 लाख से अधिक लोगों का पलायन
हमले के डर से गाजा सिटी से 3 लाख से अधिक लोग भाग चुके हैं। इजरायली सेना के अनुसार, 350,000 लोग दक्षिण की ओर चले गए हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुमान से पिछले महीने 220,000 लोग उत्त
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है जो किसी टीवी सीरियल की कहानी जैसा लगता है। गाजा पट्टी के सबसे बड़े शहर गाजा सिटी में इजरायल ने 16 सितंबर 2025 को बड़े पैमाने पर जमीनी हमला शुरू कर दिया। इजरायली सेना ने इसे ऑपरेशन गिदोन की रथ II नाम दिया है। इस हमले का उद्देश्य हमास के बचे हुए लड़ाकों को खत्म करना और शहर पर पूर्ण नियंत्रण हासिल करना बताया जा रहा है। हमले की शुरुआत से पहले इजरायली सेना ने शहर के लगभग 10 लाख निवासियों को दक्षिण की ओर सुरक्षित क्षेत्रों में जाने की चेतावनी दी थी। लेकिन कई लोग भोजन की कमी और जगह के अभाव के कारण नहीं जा सके। अब तक के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में 59 फिलिस्तीनी मारे गए हैं, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। इससे पहले के हमलों में कम से कम 41 मौतें दर्ज की गईं। कुल मिलाकर, दो साल से चली आ रही इस जंग में 65,000 से अधिक फिलिस्तीनियों की जान जा चुकी है। इजरायली रक्षा मंत्री ने कहा कि गाजा जल रहा है, जबकि फिलिस्तीनी इसे नरसंहार बता रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट ने इजरायल पर गाजा में नरसंहार का आरोप लगाया है।
यह हमला 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद शुरू हुए संघर्ष का हिस्सा है। उस हमले में 1,200 इजरायली मारे गए थे और 250 से अधिक बंधक बनाए गए थे। इजरायल ने जवाब में गाजा पर हमला बोला, जो अब तक चला आ रहा है। गाजा सिटी हमास का मुख्य गढ़ माना जाता है। इजरायली सेना का अनुमान है कि यहां 2,000 से 3,000 हमास लड़ाके छिपे हैं। हमले से पहले, अगस्त के अंत में इजरायल ने 60,000 रिजर्व सैनिकों को बुलाया था। 15 सितंबर को भारी बमबारी शुरू हुई, जिसके बाद 16 सितंबर को टैंक और पैदल सेना शहर में घुस गई। इजरायली सेना के दो डिवीजन शहर के केंद्र की ओर बढ़ रहे हैं, जबकि तीसरा डिवीजन जल्द शामिल होगा। सैनिक सतर्कता से आगे बढ़ रहे हैं, क्योंकि हमास ने सुरंगों का इस्तेमाल किया है। फिलिस्तीनी मीडिया के अनुसार, शहर के जीतून, सबरा, रिमाल और तुफाह इलाकों में भारी तबाही हुई है। कई इमारतें जमींदोज हो गईं। एक फिलिस्तीनी निवासी ने बताया कि तोपों और बुलडोजरों ने घरों को नेस्तनाबूद कर दिया।
हमले के डर से गाजा सिटी से 3 लाख से अधिक लोग भाग चुके हैं। इजरायली सेना के अनुसार, 350,000 लोग दक्षिण की ओर चले गए हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुमान से पिछले महीने 220,000 लोग उत्तरी गाजा से विस्थापित हुए। शहर में अभी भी 5 लाख से अधिक लोग फंसे हैं। पलायन कर रहे लोग पैदल, गाड़ियों में या ट्रकों पर सामान लादकर अल-रशीद तटीय सड़क से दक्षिण जा रहे हैं। एक मां लिना अल-मघरेबी ने बताया कि उनके पास तीन बच्चे हैं और शेख रदवान इलाके से भागना पड़ा। उन्होंने गहने बेचकर ट्रक का किराया भरा। ट्रक का किराया 1,000 डॉलर तक पहुंच गया है, जबकि तंबू 840 पाउंड का है। कई परिवार भूखे हैं, फिर भी पैसे जुटा रहे हैं। दक्षिण का अल-मावासी क्षेत्र पहले से ओवरलोड है। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी कि 10 लाख और लोगों को वहां जगह नहीं मिलेगी। भुखमरी का संकट गहरा गया है। 22 अगस्त को संयुक्त राष्ट्र ने गाजा सिटी में अकाल की पुष्टि की। पिछले 23 महीनों में 404 लोग भूख से मर चुके हैं।
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि यह ऑपरेशन हमास को जड़ से उखाड़ फेंकेगा और बंधकों की रिहाई सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि गाजा कभी इजरायल के लिए खतरा नहीं बनेगा। इजरायली सेना का कहना है कि वे नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रयास कर रहे हैं। लेकिन फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, मरने वालों में ज्यादातर महिलाएं और बच्चे हैं। एक हमले में पानी भरने गए पांच बच्चे मारे गए। हमास ने इजरायली बंधकों को लड़ाई के क्षेत्रों में ले जाकर मानव ढाल बनाया है। इजरायल का दावा है कि कम से कम आठ बंधक गाजा सिटी में हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने तेल अवीव में इजरायल का समर्थन किया, लेकिन कहा कि डिप्लोमेसी विफल हो सकती है। उन्होंने कहा कि बंधक सौदा के लिए कुछ ही दिन बचे हैं।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय में इस हमले की निंदा हो रही है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने कहा कि इजरायल ने गाजा में नरसंहार किया है। यूएन की रिपोर्ट में भुखमरी थोपना और अमानवीय हालात पैदा करने का आरोप लगाया गया। यूरोपीय संघ ने इजरायल पर दबाव बनाने के लिए उपायों की योजना बनाई है। ब्रुसेल्स में प्रतिबंध लगाने की तैयारी है। कनाडा ने हमले को भयानक बताया। तुर्की के विदेश मंत्रालय ने इसे नरसंहार की योजना कहा। यूके और फ्रांस ने भी निंदा की। अरब और इस्लामी देशों की दोहा में बैठक हुई, लेकिन कोई सजा नहीं दी गई। अमेरिका इजरायल का मुख्य समर्थक है, लेकिन आंतरिक विरोध बढ़ रहा है। इजरायल के कुछ सैन्य कमांडरों ने चेतावनी दी कि यह सैनिकों के लिए मौत का जाल हो सकता है। आर्मी चीफ ईयाल जामिर ने नेतन्याहू से युद्धविराम की सलाह दी।
गाजा की अर्थव्यवस्था पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। शहर में बिजली, पानी और दवा की कमी है। अस्पताल भर चुके हैं। डॉक्टर इسمाइल जायदाह ने कहा कि शेख रदवान से भागकर तटीय सड़क के पास शरण ली। लेकिन वहां भी खतरा है। इजरायल ने कहा कि वे मानवीय सहायता पर ध्यान देंगे, लेकिन फिलिस्तीनी कहते हैं कि बमबारी में सब नष्ट हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह हमला जनसांख्यिकीय इंजीनियरिंग का हिस्सा है, जिसका मकसद फिलिस्तीनियों को स्थायी रूप से विस्थापित करना है। लैंसेट जर्नल की एक स्टडी में कहा गया कि 2024 तक 64,000 मौतें हुईं, जो वास्तविकता से कम हैं। अप्रत्यक्ष मौतें जैसे भुखमरी और बीमारी से कुल संख्या 70,000 से अधिक हो सकती है। इजरायल के पूर्व कमांडर हर्जी हेलेवी ने स्वीकार किया कि 2 लाख से अधिक फिलिस्तीनी मारे या घायल हुए।
यह संघर्ष मध्य पूर्व को अस्थिर कर रहा है। यमन के हूती और ईरान समर्थित गुटों ने इजरायल पर हमले किए हैं। इजरायल ने यमन पर भी बमबारी की। फिलिस्तीनियों का कहना है कि 1948 के नकबा के बाद यह सबसे बड़ा हमला है। तब 7.5 लाख फिलिस्तीनी बेघर हुए थे। आज गाजा के 2.2 मिलियन लोग प्रभावित हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि युद्धविराम ही समाधान है। लेकिन नेतन्याहू की सरकार कठोर रुख पर अड़ी है। गाजा सिटी के निवासी कहते हैं कि डर ने उन्हें भागने पर मजबूर कर दिया। एक युवा ने कहा कि बमबारी से ज्यादा डर सैनिकों का आना है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतेरस ने कहा कि यह नैतिक, राजनीतिक और कानूनी रूप से असहनीय है। वे नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप से मिलना चाहते हैं।
इस हमले ने वैश्विक अलगाव बढ़ा दिया है। इजरायल को लगता है कि वह बिना सजा के कार्रवाई कर सकता है। लेकिन यूएन आयोग ने अंतरराष्ट्रीय कानूनी कार्रवाई की मांग की। फिलिस्तीनी विश्लेषक अहेद फर्वाना ने कहा कि यह सैन्य अभियान नहीं, बल्कि विस्थापन की रणनीति है। गाजा सिटी अब मलबे का ढेर है। बच्चे भूखे सो रहे हैं। महिलाएं रो रही हैं। पुरुष मदद मांग रहे हैं। लेकिन सहायता पहुंच ही नहीं पा रही। इजरायल का कहना है कि हमास मानव ढाल बना रहा है। हमास का जवाब है कि यह प्रतिरोध है। दुनिया देख रही है, लेकिन कार्रवाई कम हो रही है। यह कहानी जारी है, लेकिन अंत कब होगा, कोई नहीं जानता। शांति की उम्मीद बाकी है, लेकिन उम्मीदें टूट रही हैं।
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