आगामी कार्रवाई पूरे एविएशन सेक्टर के लिए एक मिसाल साबित होगी और किसी तरह की ढिला..., इंडिगो संकट पर केंद्र का सख्त कदम
एयरलाइन ने बयान जारी कर कहा कि ये चुनौतियां अप्रत्याशित थीं, लेकिन डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) ने तुरंत जांच शुरू कर दी और एयरलाइन से कारणों
भारतीय विमानन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर उथल-पुथल मचाने वाली इंडिगो एयरलाइंस की ऑपरेशनल गड़बड़ियों के बीच केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए कार्रवाई का संकेत दिया है। नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने स्पष्ट किया कि यह संकट केवल तकनीकी खामियों का नहीं, बल्कि एयरलाइन की आंतरिक जिम्मेदारी और पूर्वानुमान की कमी का परिणाम है। उन्होंने कहा कि आगामी कार्रवाई पूरे एविएशन सेक्टर के लिए एक मिसाल साबित होगी और किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह बयान 6 दिसंबर 2025 को आया, जब इंडिगो ने लगातार चौथे दिन सैकड़ों उड़ानों को रद्द किया, जिससे देशभर के हवाई अड्डों पर हजारों यात्री फंस गए।
विमानन मंत्रालय ने निर्देश जारी किया है कि सभी रद्द उड़ानों के यात्रियों को 7 दिसंबर 2025 शाम 8 बजे तक पूर्ण रिफंड प्रदान किया जाए, अन्यथा तत्काल नियामक कार्रवाई की जाएगी। इस संकट की जड़ में नवंबर 2025 से लागू नई फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) नियम हैं, जिनके तहत पायलटों और क्रू मेंबर्स के लिए आराम की अवधि बढ़ाई गई है, लेकिन इंडिगो ने इसके अनुरूप क्रू रोस्टरिंग की पर्याप्त तैयारी नहीं की। इंडिगो की परेशानियां 3 दिसंबर 2025 से शुरू हुईं, जब तकनीकी खराबी, मौसम की विपरीत परिस्थितियां, हवाई यातायात में भीड़ और नई एफडीटीएल नियमों के अमल से पहली बार 150 से अधिक उड़ानें रद्द हुईं। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे प्रमुख हवाई अड्डों पर लंबी कतारें लग गईं, जहां यात्री घंटों इंतजार करते रहे।
एयरलाइन ने बयान जारी कर कहा कि ये चुनौतियां अप्रत्याशित थीं, लेकिन डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) ने तुरंत जांच शुरू कर दी और एयरलाइन से कारणों तथा सुधार योजना की रिपोर्ट मांगी। 4 दिसंबर को रद्द उड़ानों की संख्या बढ़कर 200 से अधिक हो गई, जिसमें बेंगलुरु में 73, दिल्ली में 30 और हैदराबाद में 68 उड़ानें शामिल थीं। यात्रियों को वैकल्पिक उड़ानें या रिफंड का विकल्प दिया गया, लेकिन कई जगहों पर सामान की डिलीवरी में देरी हुई। विमानन मंत्रालय ने एयरलाइन को निर्देश दिया कि उड़ान रद्दीकरण के दौरान किराया वृद्धि न हो और यात्री स्थिति की वास्तविक समय अपडेट प्राप्त करें।
5 दिसंबर को संकट चरम पर पहुंच गया, जब इंडिगो ने 1,000 से अधिक उड़ानें रद्द कीं, जो उसके दैनिक संचालन का आधा से अधिक हिस्सा था। दिल्ली हवाई अड्डे से सभी घरेलू प्रस्थान रद्द कर दिए गए, जिसमें 235 उड़ानें शामिल थीं। मुंबई में 165, बेंगलुरु में 102 और हैदराबाद में 92 उड़ानें प्रभावित हुईं। एयरलाइन के ऑन-टाइम परफॉर्मेंस का स्तर 3.7 प्रतिशत तक गिर गया, जो पहले 35 प्रतिशत था। यात्री हवाई अड्डों पर 12 से 24 घंटे तक फंसे रहे, जहां भोजन, पानी और जानकारी की कमी ने स्थिति को और जटिल बना दिया। चेन्नई से सभी प्रस्थान शाम 6 बजे तक स्थगित कर दिए गए। इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स ने वीडियो संदेश में माफी मांगी और कहा कि नेटवर्क में 95 प्रतिशत कनेक्टिविटी बहाल हो चुकी है, लेकिन पूर्ण सामान्यता 10 से 15 दिसंबर तक लौटने की उम्मीद है। एयरलाइन ने सिस्टम रीबूट की प्रक्रिया अपनाई, जिसमें क्रू और विमानों को पुनः व्यवस्थित किया गया।
डीजीसीए ने तत्काल कदम उठाते हुए एफडीटीएल नियमों के कुछ प्रावधानों को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया, जिसमें रात्रि ड्यूटी (रात 12 से सुबह 6:50 बजे) पर पाबंदी और साप्ताहिक आराम में छुट्टी गणना शामिल है। यह छूट 10 फरवरी 2026 तक प्रभावी रहेगी, ताकि संचालन स्थिर हो सके। डीजीसीए ने एयरलाइन को निर्देश दिया कि क्रू रोस्टरिंग में सुधार हो और भविष्य में ऐसी विफलता न हो। विमानन मंत्रालय ने चार सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति गठित की, जो 15 दिनों में रिपोर्ट सौंपेगी। यह समिति इंडिगो की आंतरिक प्रक्रियाओं की जांच करेगी, जिम्मेदारी तय करेगी और भविष्य के लिए सिफारिशें करेगी। मंत्री नायडू ने कहा कि अन्य एयरलाइंस जैसे एयर इंडिया और स्पाइसजेट ने नए नियमों का पालन किया बिना किसी बड़े व्यवधान के, जो इंडिगो की कमजोरी को उजागर करता है। मंत्रालय ने 24x7 कंट्रोल रूम स्थापित किया है, जहां यात्री शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
6 दिसंबर को सुधार के संकेत दिखे, जब रद्द उड़ानों की संख्या घटकर 800 रह गई। इंडिगो ने 1,500 उड़ानें संचालित करने का लक्ष्य रखा, जिसमें 138 में से 135 गंतव्यों पर सेवा बहाल हुई। हालांकि, पुणे, गोवा और तिरुवनंतपुरम जैसे हवाई अड्डों पर अभी भी 14 से 22 उड़ानें रद्द हुईं। मंत्रालय ने एयरलाइन को निर्देश दिया कि सभी लंबित रिफंड 7 दिसंबर शाम 8 बजे तक पूरे हों और कोई पुनर्निर्धारण शुल्क न लगाया जाए। यात्रियों के सामान को 48 घंटों में उनके घर पहुंचाने का आदेश दिया गया। रेल मंत्रालय ने भी सहायता की, जिसमें 84 विशेष ट्रेनें चलाई गईं, जो 104 यात्राएं करेंगी। ये ट्रेनें दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, पटना और हावड़ा जैसे केंद्रों से संचालित होंगी। हैदराबाद हवाई अड्डे ने राज्य परिवहन निगम के साथ विशेष बसें चलाईं।
इस संकट ने विमानन क्षेत्र की कमजोरियों को सामने ला दिया। नवंबर 2025 में इंडिगो ने कुल 1,232 उड़ानें रद्द कीं, जिनमें 755 क्रू कमी से और 258 हवाई क्षेत्र प्रतिबंधों से संबंधित थीं। एयरलाइन का बाजार हिस्सा 60 प्रतिशत से अधिक है, जो इसे एकाधिकार की स्थिति में रखता है, लेकिन इसने किराया वृद्धि को जन्म दिया। मंत्रालय ने एयरलाइंस को निर्देश दिया कि वास्तविक समय अपडेट प्रदान करें, ताकि यात्री घर से निकलने से पहले स्थिति जांच सकें। डीजीसीए ने सीईओ पीटर एल्बर्स को शो-कॉज नोटिस जारी किया, जिसमें 24 घंटों में स्पष्टीकरण मांगा गया। एयरलाइन ने कहा कि सॉफ्टवेयर अपडेट और विमान रखरखाव ने भी समस्या बढ़ाई। पायलट एसोसिएशन ने रोस्टरिंग की कमी को जिम्मेदार ठहराया।
मंत्री नायडू ने 6 दिसंबर को उच्च स्तरीय बैठक बुलाई, जिसमें मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और इंडिगो के सीईओ शामिल हुए। बैठक में एफडीटीएल अनुपालन, सामान्यता बहाली और रिफंड प्रक्रिया पर चर्चा हुई। मंत्रालय ने कहा कि यात्री हित प्राथमिकता है, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों, छात्रों और मरीजों के लिए। एयरलाइन को निर्देश दिया गया कि सीमित क्षमता से संचालन फिर शुरू करें। मेट्रो हवाई अड्डों जैसे दिल्ली, मुंबई और चेन्नई में बैकलॉग क्लियर हो चुका है, जबकि अन्य जगहों पर रात तक पूरा होगा। इंडिगो ने कहा कि 7 दिसंबर से सुधार जारी रहेगा। इस पूरे घटनाक्रम ने एविएशन सेक्टर में नियामक ढांचे की मजबूती की आवश्यकता पर जोर दिया।
संकट के दौरान यात्रियों को वैकल्पिक यात्रा विकल्प प्रदान किए गए, लेकिन कई जगहों पर जानकारी की कमी रही। ट्रैवल एग्रीगेटर ने 3 से 8 दिसंबर तक रद्द उड़ानों के लिए सुविधा शुल्क रिफंड करने की घोषणा की। रेलवे की विशेष ट्रेनें ने तत्काल राहत दी।
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