रीवा में प्राइवेट कॉलेज में मोबाइल और किताबों से हुई खुलेआम नकल, वायरल वीडियो ने खोली शिक्षा व्यवस्था की पोल, जांच के आदेश।
MP Viral News: मध्य प्रदेश के रीवा जिले के चाकघाट क्षेत्र में एक प्राइवेट कॉलेज में परीक्षा के दौरान खुलेआम नकल का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस घटना का एक वीडियो सोशल
मध्य प्रदेश के रीवा जिले के चाकघाट क्षेत्र में एक प्राइवेट कॉलेज में परीक्षा के दौरान खुलेआम नकल का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें छात्र-छात्राएं बिना किसी डर के किताबें और मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर उत्तर पुस्तिकाएं भरते नजर आ रहे हैं। यह वीडियो शिक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है और यह सवाल उठाता है कि क्या कॉलेज प्रबंधन की मिलीभगत से यह सब हो रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है और जांच के आदेश दिए हैं। इस घटना ने रीवा के चाकघाट क्षेत्र को एक बार फिर नकल के लिए बदनाम कर दिया है, क्योंकि इस क्षेत्र में पहले भी ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
यह घटना रीवा जिले के चाकघाट में स्थित अशासकीय नेहरू स्मारक महाविद्यालय की है, जो अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय से संबद्ध है। वायरल वीडियो में दिख रहा है कि बीए और बीएससी की परीक्षाएं दे रहे छात्र खुलेआम किताबें और मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। कुछ छात्र टेबल पर बैठकर किताबों से उत्तर लिख रहे हैं, जबकि कुछ मोबाइल पर जवाब ढूंढते दिख रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि परीक्षा कक्ष में कोई शिक्षक या निगरानी अधिकारी मौजूद नहीं था, जिससे छात्रों को नकल करने की खुली छूट मिली हुई थी। वीडियो में यह भी देखा गया कि जो छात्र नकल करने में कमजोर थे, उनके लिए कॉलेज प्रबंधन ने अन्य छात्रों को बिठाया था, जो उनके लिए उत्तर लिख रहे थे। सूत्रों के अनुसार, कॉलेज प्रबंधन ने छात्रों से नकल कराने के लिए 1000 से 1500 रुपये प्रति छात्र वसूले थे। यह राशि कथित तौर पर नकल की सुविधा देने के लिए ली गई थी। वीडियो में साफ दिख रहा है कि छात्र बिना किसी डर या चिंता के किताबों और मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे थे, मानो यह कोई खेल हो, न कि परीक्षा। इस वीडियो को एक अज्ञात व्यक्ति ने बनाया और सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया। वीडियो के वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों और अभिभावकों में गुस्सा है, और उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उच्च शिक्षा विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। अतिरिक्त संचालक (उच्च शिक्षा) डॉ. आर.पी. सिंह ने बताया कि वायरल वीडियो के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है। इसके लिए एक विशेष जांच समिति गठित की गई है, जो नकल के साथ-साथ कॉलेज प्रबंधन द्वारा पैसे वसूलने के आरोपों की भी जांच करेगी। उन्होंने कहा कि अगर जांच में आरोप सही पाए गए, तो कॉलेज प्रबंधन और दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भविष्य में और कड़े कदम उठाए जाएंगे।
रीवा जिले का चाकघाट क्षेत्र पहले भी नकल के मामलों के लिए बदनाम रहा है। यहां के कई प्राइवेट कॉलेजों में नकल कराने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। फरवरी 2025 में भी नेहरू स्मारक महाविद्यालय में भोज मुक्त विश्वविद्यालय की परीक्षा के दौरान सामूहिक नकल का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें छात्र खुलेआम किताबें और मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे थे। उस समय भी जांच के आदेश दिए गए थे, लेकिन ठोस कार्रवाई की कमी के कारण ऐसी घटनाएं दोहराई जा रही हैं। स्थानीय लोग और शिक्षाविदों का कहना है कि चाकघाट में नकल एक संगठित धंधे का रूप ले चुका है, जिसमें कॉलेज प्रबंधन और कुछ शिक्षक शामिल हैं। इस घटना ने मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एक ओर जहां सरकार शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं इस तरह की घटनाएं शिक्षा के मंदिर को कलंकित कर रही हैं। स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि नकल के कारण मेहनती और ईमानदार छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ रहा है। एक अभिभावक ने कहा, "हम अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए इतनी मेहनत करते हैं, लेकिन ऐसे कॉलेज पैसे लेकर डिग्री बेच रहे हैं। यह बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।" सोशल मीडिया पर भी इस वीडियो को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक यूजर ने लिखा, "यह शिक्षा व्यवस्था की सच्चाई है। पैसे देकर डिग्री लेना अब आम बात हो गई है।" एक अन्य यूजर ने सवाल उठाया, "जब कॉलेज प्रबंधन ही नकल को बढ़ावा दे रहा है, तो जांच का क्या फायदा? सरकार को ऐसे कॉलेजों का लाइसेंस रद्द करना चाहिए।" कई लोगों ने मांग की है कि इस मामले में न केवल कॉलेज प्रबंधन, बल्कि विश्वविद्यालय और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाए।
यह मामला केवल रीवा तक सीमित नहीं है। मध्य प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी नकल की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। उदाहरण के लिए, जुलाई 2025 में भिंड जिले के दीनदयाल डांगरोलिया महाविद्यालय में नकल की जांच के दौरान कलेक्टर द्वारा एक छात्र को थप्पड़ मारने का वीडियो वायरल हुआ था। उस घटना में भी कॉलेज में संगठित रूप से नकल कराए जाने की शिकायत थी। इन घटनाओं से साफ है कि नकल का धंधा कई जगहों पर संगठित रूप से चल रहा है। शिक्षाविदों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं शिक्षा की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचा रही हैं। प्रोफेसर अनिल शर्मा, जो रीवा के एक कॉलेज में पढ़ाते हैं, ने कहा, "नकल न केवल छात्रों की मेहनत को बेकार करती है, बल्कि यह समाज में अयोग्य लोगों को डिग्री के साथ आगे बढ़ने का मौका देती है। इसे रोकने के लिए सख्त कानून और निगरानी की जरूरत है।" उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि प्राइवेट कॉलेजों की मान्यता की समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए। पुलिस और प्रशासन ने भी इस मामले में सक्रियता दिखाई है। रीवा के पुलिस अधीक्षक विवेक सिंह ने कहा कि अगर जांच में कॉलेज प्रबंधन की ओर से पैसे लेकर नकल कराने की बात साबित होती है, तो उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा। साथ ही, विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी इस मामले में अपनी जिम्मेदारी निभाने का वादा किया है। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने कहा कि कॉलेज की मान्यता पर भी सवाल उठ सकते हैं, अगर जांच में गड़बड़ी पाई गई।
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