प्रज्वल रेवन्ना को बलात्कार मामले में दोषी ठहराया गया- बेंगलुरु कोर्ट का फैसला, सजा की घोषणा बाकी। 

Karnataka: कर्नाटक के हासन जिले में 1 अगस्त 2025 को एक विशेष अदालत ने जनता दल (सेक्युलर) के निष्कासित नेता और पूर्व लोकसभा सांसद ....

Aug 2, 2025 - 12:26
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प्रज्वल रेवन्ना को बलात्कार मामले में दोषी ठहराया गया- बेंगलुरु कोर्ट का फैसला, सजा की घोषणा बाकी। 
प्रज्वल रेवन्ना को बलात्कार मामले में दोषी ठहराया गया- बेंगलुरु कोर्ट का फैसला, सजा की घोषणा बाकी। 

कर्नाटक के हासन जिले में 1 अगस्त 2025 को एक विशेष अदालत ने जनता दल (सेक्युलर) के निष्कासित नेता और पूर्व लोकसभा सांसद प्रज्वल रेवन्ना को बलात्कार के एक मामले में दोषी ठहराया। यह मामला होलेनरसीपुरा के गन्निकड़ा फार्महाउस में एक 48 वर्षीय घरेलू कामगार के साथ बलात्कार से संबंधित है। प्रज्वल, जो पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा के पोते हैं, को विशेष जांच दल (एसआईटी) ने 31 मई 2024 को गिरफ्तार किया था। फैसला सुनाए जाने के बाद प्रज्वल कोर्ट में भावुक हो गए और फूट-फूटकर रोने लगे। सजा की मात्रा 2 अगस्त 2025 को घोषित होने वाली है।

29 सितंबर 2008 को मालेगांव में हुए बम धमाके की जांच के दौरान "भगवा आतंकवाद" की थ्योरी सामने आई थी। इस मामले में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित जैसे लोगों को गिरफ्तार किया गया था। हाल ही में, 31 जुलाई 2025 को एनआईए की विशेष अदालत ने सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया। इसी बीच, पूर्व एटीएस अधिकारी महबूब मुजावर ने दावा किया कि उन्हें तत्कालीन जांच अधिकारी परमबीर सिंह ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को गिरफ्तार करने का आदेश दिया था। मुजावर ने कहा कि यह थ्योरी झूठी थी और इसका मकसद हिंदू संगठनों को बदनाम करना था। हालांकि, यह दावा मालेगांव ब्लास्ट केस से सीधे तौर पर प्रज्वल रेवन्ना के मामले से जुड़ा नहीं है, लेकिन इसने जांच प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए हैं।

  • प्रज्वल रेवन्ना का मामला: शुरुआत

प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ बलात्कार का पहला मामला 28 अप्रैल 2024 को होलेनरसीपुरा टाउन पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ। शिकायत एक 48 वर्षीय घरेलू कामगार ने की, जो रेवन्ना परिवार के गन्निकड़ा फार्महाउस और बेंगलुरु के बसवनगुड़ी स्थित उनके घर पर काम करती थी। उसने आरोप लगाया कि प्रज्वल ने 2021 में दो बार उसका बलात्कार किया और इन घटनाओं को अपने मोबाइल पर रिकॉर्ड किया। इस मामले में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376(2)(k) (प्रभावशाली स्थिति में बलात्कार), 376(2)(n) (बार-बार बलात्कार), 354A (यौन उत्पीड़न), 354B (नग्न करने के इरादे से हमला), 354C (दृश्यरति), 506 (आपराधिक धमकी), और 201 (साक्ष्य नष्ट करना) के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66E (निजता का उल्लंघन) के तहत मामला दर्ज किया गया।

  • वीडियो का मामला और सनसनी

23 अप्रैल 2024 को हासन लोकसभा क्षेत्र में मतदान से तीन दिन पहले, करीब 2,900 पेन ड्राइव हासन जिले के सार्वजनिक स्थानों पर बांटे गए। इनमें प्रज्वल के कथित अश्लील वीडियो थे, जिनमें कई महिलाओं के साथ उनकी हरकतें दर्ज थीं। ये वीडियो सोशल मीडिया, खासकर व्हाट्सएप, पर वायरल हो गए, जिससे देशभर में हंगामा मच गया। इस घटना ने प्रज्वल की छवि को गहरा नुकसान पहुंचाया और जेडीएस-बीजेपी गठबंधन पर सवाल उठे।

  • प्रज्वल का जर्मनी भागना और गिरफ्तारी

26 अप्रैल 2024 को हासन में लोकसभा चुनाव के बाद, प्रज्वल 27 अप्रैल को बेंगलुरु से फ्रैंकफर्ट, जर्मनी भाग गए। उसी दिन कर्नाटक सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया, जिसकी अगुवाई अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक बी. के. सिंह ने की। 18 मई को विशेष अदालत ने प्रज्वल के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया, और इंटरपोल ने उनके खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया। 31 मई 2024 को प्रज्वल बेंगलुरु हवाई अड्डे पर लौटे, जहां एसआईटी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। तब से वह परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में हैं।

  • जांच और चार्जशीट

एसआईटी ने इस मामले में तेजी से जांच शुरू की। अगस्त 2024 में 1,632 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई, जिसमें 113 गवाहों और 180 दस्तावेजों का जिक्र था। चार्जशीट में डीएनए, फोरेंसिक, और डिजिटल सबूत शामिल थे। पीड़िता के कपड़ों पर प्रज्वल का डीएनए मिला, और फोरेंसिक विश्लेषण ने पुष्टि की कि वीडियो में दिखने वाला व्यक्ति प्रज्वल ही था। एक वीडियो में पीड़िता को प्रज्वल से छोड़ने की गुहार लगाते और रोते हुए देखा गया।

  • कोर्ट की कार्यवाही

मामले की सुनवाई बेंगलुरु की विशेष अदालत में शुरू हुई, जो सांसदों और विधायकों के मामलों के लिए बनी है। 2 मई 2025 को सुनवाई शुरू हुई, और 18 जुलाई को यह पूरी हुई। 26 गवाहों की गवाही और 180 दस्तावेजों की जांच के बाद, 30 जुलाई को तकनीकी साक्ष्यों, जैसे गूगल मैप्स डेटा और मोबाइल फोन रिकॉर्ड, पर स्पष्टीकरण के लिए फैसला टाल दिया गया। 1 अगस्त 2025 को जज संतोष गजानन भट ने प्रज्वल को दोषी ठहराया। फैसले के बाद प्रज्वल कोर्ट में रो पड़े। सजा की घोषणा 2 अगस्त को होनी है।

प्रज्वल के खिलाफ कुल चार मामले दर्ज हैं, जिनमें तीन बलात्कार और एक यौन उत्पीड़न, पीछा करने, और आपराधिक धमकी से संबंधित हैं। दूसरा मामला एक पूर्व जिला पंचायत सदस्य के साथ बार-बार बलात्कार और ब्लैकमेल का है, जिसकी सुनवाई जारी है। प्रज्वल की जमानत याचिकाएं कर्नाटक हाई कोर्ट (21 अक्टूबर 2024) और सुप्रीम कोर्ट (11 नवंबर 2024) ने खारिज कर दीं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उनके खिलाफ गंभीर आरोप हैं और वह गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।

इस मामले ने कर्नाटक की राजनीति में भारी उथल-पुथल मचाई। जेडीएस ने प्रज्वल को पार्टी से निष्कासित कर दिया, और वह 2024 के लोकसभा चुनाव में हासन सीट 40,000 से अधिक वोटों से हार गए। बीजेपी पर भी सवाल उठे, क्योंकि उनके एक नेता ने 2023 में प्रज्वल के कृत्यों की चेतावनी दी थी। कांग्रेस ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा, जिन्होंने प्रज्वल के लिए प्रचार किया था। पूर्व मुख्यमंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने इस मामले को शर्मनाक बताते हुए पार्टी को इससे अलग किया।

  • मालेगांव ब्लास्ट केस से तुलना

हालांकि मालेगांव ब्लास्ट केस और प्रज्वल का मामला अलग-अलग हैं, लेकिन दोनों में जांच पर राजनीतिक दबाव के आरोप समान हैं। महबूब मुजावर के दावों ने मालेगांव मामले में "भगवा आतंकवाद" की थ्योरी को झूठा बताया, और प्रज्वल के मामले में भी बचाव पक्ष ने दावा किया कि यह राजनीति से प्रेरित है। हालांकि, कोर्ट ने प्रज्वल के दावों को खारिज कर दिया, क्योंकि पीड़िता की गवाही, फोरेंसिक सबूत, और वीडियो ने उनके अपराध की पुष्टि की।

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