अयोध्या राम मंदिर पर ध्वजारोहण का ऐतिहासिक क्षण: 25 नवंबर को पीएम मोदी फहराएंगे विशेष केसरिया ध्वज, अहमदाबाद के कारीगर भरत मेवाड़ा की कला का सम्मान।

अयोध्या का श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर अब एक नए ऐतिहासिक अध्याय की ओर बढ़ रहा है। 25 नवंबर 2025 को यहां ध्वजारोहण समारोह आयोजित

Nov 21, 2025 - 10:36
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अयोध्या राम मंदिर पर ध्वजारोहण का ऐतिहासिक क्षण: 25 नवंबर को पीएम मोदी फहराएंगे विशेष केसरिया ध्वज, अहमदाबाद के कारीगर भरत मेवाड़ा की कला का सम्मान।
अयोध्या राम मंदिर पर ध्वजारोहण का ऐतिहासिक क्षण: 25 नवंबर को पीएम मोदी फहराएंगे विशेष केसरिया ध्वज, अहमदाबाद के कारीगर भरत मेवाड़ा की कला का सम्मान।

अयोध्या। अयोध्या का श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर अब एक नए ऐतिहासिक अध्याय की ओर बढ़ रहा है। 25 नवंबर 2025 को यहां ध्वजारोहण समारोह आयोजित होगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राम मंदिर की मुख्य शिखर पर विशेष केसरिया ध्वज फहराएंगे। यह ध्वज सिल्क और अन्य प्राकृतिक रेशों से बना है, जो 11 फीट ऊंचा और 22 फीट लंबा है। इसका वजन लगभग 11 किलोग्राम है। यह ध्वज 42 फीट ऊंचे और 5100 किलोग्राम वजनी ध्वजदंड पर लहराएगा। अहमदाबाद के प्रसिद्ध कारीगर भरत मेवाड़ा ने इस ध्वज को तैयार किया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर परिसर के सात मंदिरों के लिए अलग-अलग ध्वज बनवाए हैं, जिनमें मुख्य मंदिर का ध्वज सबसे प्रमुख है। ट्रस्ट ने भरत मेवाड़ा को ध्वज पूजा के लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया है। यह समारोह मंदिर निर्माण के पूर्ण होने का प्रतीक बनेगा।

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण 2020 में प्राण प्रतिष्ठा के साथ शुरू हुआ था। 22 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री मोदी ने राम लला की मूर्ति का प्राण प्रतिष्ठा कराया। उसके बाद मंदिर का निर्माण तेजी से पूरा हुआ। मुख्य मंदिर की ऊंचाई 161 फीट है, जिसमें तीन मंजिलें हैं। परिसर में सात मंदिर बनाए गए हैं, जो रामायण की विभिन्न घटनाओं को दर्शाते हैं। ध्वजारोहण समारोह इन मंदिरों के पूर्ण समर्पण का प्रतीक है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि यह आयोजन भक्तों के लिए एक आध्यात्मिक संदेश होगा। समारोह 23 से 25 नवंबर तक चलेगा, जिसमें 21 नवंबर से पांच दिवसीय वैदिक अनुष्ठान शुरू हो चुके हैं। अयोध्या और काशी के विद्वान संत इन अनुष्ठानों का नेतृत्व कर रहे हैं। 25 नवंबर को मुख्य ध्वजारोहण होगा, जो मंदिर के सभी सात शिखरों पर एक साथ केसरिया ध्वज फहराने का पहला अवसर होगा।

यह ध्वज केवल एक कपड़े का टुकड़ा नहीं, बल्कि भक्ति और संस्कृति का प्रतीक है। केसरिया रंग भगवा का प्रतीक है, जो त्याग, बलिदान और आध्यात्मिकता को दर्शाता है। ध्वज पर सूर्य का चिन्ह अंकित है, जो अनंत ऊर्जा, दिव्य प्रकाश, सद्गुण और ज्ञान का प्रतिनिधित्व करता है। ये गुण भगवान राम से जुड़े हैं। ध्वज को बनाने में सिल्क, सूती धागा और सोने-चांदी की जरी का उपयोग किया गया है। भरत मेवाड़ा, जो गुजरात के अहमदाबाद में एक पारंपरिक कारीगर हैं, ने इसे तीन महीने में तैयार किया। मेवाड़ा का परिवार पीढ़ियों से ध्वज और परिधान बनाने का काम करता है। उन्होंने बताया कि ध्वज को विशेष पूजा-अर्चना के बाद अयोध्या भेजा गया। ट्रस्ट ने उन्हें ध्वज पूजा के लिए आमंत्रित किया है, जहां वे मंत्रोच्चार के बीच ध्वज को शिखर पर बांधेंगे। मेवाड़ा ने कहा कि यह उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है।

मंदिर परिसर के अन्य छह मंदिरों के लिए भी ध्वज तैयार किए गए हैं। मुख्य मंदिर के अलावा, परिसर में गरुड़ मंदिर, लक्ष्मण मंदिर, सीता मंदिर, सुग्रीव मंदिर, अंगद मंदिर और नृसिंह मंदिर हैं। प्रत्येक के लिए अलग रंग और डिजाइन के ध्वज हैं, जो उन देवताओं की विशेषताओं को दर्शाते हैं। उदाहरण के लिए, गरुड़ मंदिर का ध्वज नीले रंग का होगा, जो वायु तत्व का प्रतीक है। ये ध्वज भी स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाए गए हैं। ट्रस्ट का उद्देश्य है कि परिसर में ध्वजों की लहराहट से भक्तों को राम राज्य की झलक मिले। ध्वजदंड स्टेनलेस स्टील का बना है, जो 42 फीट ऊंचा है। इसका वजन 5100 किलोग्राम है, जो इसे मजबूत और टिकाऊ बनाता है। इंजीनियरों ने इसे विशेष तकनीक से शिखर पर स्थापित किया है, ताकि तेज हवाओं में भी यह स्थिर रहे।

समारोह की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। अयोध्या में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 18 नवंबर को उच्च स्तरीय बैठक कर सभी व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि यह आयोजन राम भक्तों के लिए विश्वास का प्रतीक बनेगा। 24 और 25 नवंबर को राम लला के दर्शन सामान्य भक्तों के लिए बंद रहेंगे, ताकि समारोह सुचारू रूप से चले। केवल आमंत्रित अतिथियों को दर्शन की अनुमति होगी। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी के अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत भी शामिल होंगे। अन्य प्रमुख संत और राजनीतिक नेता भी उपस्थित रहेंगे। समारोह में वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा की भी योजना है।

यह आयोजन अयोध्या के पुनरुद्धार का प्रतीक है। 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद लंबे संघर्ष के बाद मंदिर का निर्माण हुआ। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रस्ट का गठन किया गया। अब मंदिर पूर्ण रूप से तैयार है। परिसर में पार्किंग, परिवहन और मेहमानगृह की व्यवस्था की गई है। पर्यटन विभाग ने विशेष ट्रेन और बस सेवाएं शुरू की हैं। अयोध्या में होटलों की बुकिंग फुल हो चुकी है। स्थानीय व्यापारियों को भी लाभ मिल रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इस समारोह से अयोध्या की अर्थव्यवस्था को 500 करोड़ रुपये का फायदा होगा। भक्त दूर-दूर से आ रहे हैं। ट्रस्ट ने लाइव प्रसारण की भी व्यवस्था की है, ताकि दुनिया भर के राम भक्त इसे देख सकें।

भरत मेवाड़ा की कहानी प्रेरणादायक है। अहमदाबाद के एक छोटे से कारखाने में वे काम करते हैं। उनके परिवार ने कभी बड़े ऑर्डर नहीं लिए, लेकिन राम मंदिर का ध्वज उनके लिए सपना था। उन्होंने कहा कि ध्वज को बनाने में रात-दिन लगा दिया। हर धागा राम नाम से जोड़ा गया। मेवाड़ा को ट्रस्ट ने सम्मानित किया है। वे 23 नवंबर को अयोध्या पहुंचेंगे। ध्वज पूजा में वे मुख्य भूमिका निभाएंगे। यह समारोह केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। विपक्षी दलों ने भी इसका स्वागत किया है। कांग्रेस नेता ने कहा कि यह सभी भारतीयों का गौरव है।

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