मॉरिजियो कैटेलन का सोने का 'अमेरिका' टॉयलेट नीलामी में 12.1 मिलियन डॉलर में बिका, बैनाना आर्ट के बाद फिर सनसनी।
नई दिल्ली। कला की दुनिया हमेशा से ही अपनी विचित्र और विवादास्पद रचनाओं के लिए जानी जाती रही है। इतालवी कलाकार मॉरिजियो कैटेलन ने
नई दिल्ली। कला की दुनिया हमेशा से ही अपनी विचित्र और विवादास्पद रचनाओं के लिए जानी जाती रही है। इतालवी कलाकार मॉरिजियो कैटेलन ने एक बार फिर अपनी अनोखी कला से वैश्विक सुर्खियां बटोरी हैं। 19 नवंबर 2025 को न्यूयॉर्क में सोथबीज नीलामी घर में उनकी 18 कैरेट सोने से बनी 'अमेरिका' नामक टॉयलेट सीट 12.1 मिलियन डॉलर (लगभग 102 करोड़ रुपये) की कीमत पर बिक गई। यह कार्य 2016 में पहली बार प्रदर्शित हुआ था, लेकिन चोरी होने के बाद अब इसका दूसरा संस्करण नीलामी में आया। कैटेलन, जो 2019 में एक दीवार पर केले को डक्ट टेप से चिपकाकर 6.2 मिलियन डॉलर कमाने वाले कलाकार हैं, ने इस बार भी उपभोक्तावाद और अमेरिकी वर्चस्व पर व्यंग्य किया है। सोशल मीडिया पर यह खबर वायरल हो गई है, जहां लोग इसे कला की ऊंचाई या व्यंग्य की हद बता रहे हैं।
मॉरिजियो कैटेलन का जन्म 1960 में इटली के पैडुआ में हुआ था। वे समकालीन कला के सबसे विवादास्पद कलाकारों में शुमार हैं। उनकी रचनाएं अक्सर सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर तीखा कटाक्ष करती हैं। 2019 में मियामी आर्ट बेसल में उन्होंने 'कॉमेडियन' नामक कार्य प्रदर्शित किया, जिसमें एक केला को डक्ट टेप से दीवार पर चिपकाया गया था। यह कार्य 120,000 डॉलर में बिका और बाद में 6.2 मिलियन डॉलर की नीलामी में गया। कैटेलन ने कहा था कि यह उपभोक्तावादी संस्कृति का प्रतीक है, जहां साधारण चीजें भी मूल्यवान बन जाती हैं। इसी तरह, 'अमेरिका' टॉयलेट भी एक व्यंग्य है। यह पूरी तरह कार्यात्मक है, यानी इसे वास्तव में इस्तेमाल किया जा सकता है। कैटेलन ने इसे अमेरिकी समृद्धि, अपव्यय और साम्राज्यवाद का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, 'यह सोने का टॉयलेट है, जो दिखाता है कि कैसे अमीर देश संसाधनों का अपव्यय करते हैं, जबकि दुनिया के गरीब भागों में लोग संघर्ष कर रहे हैं।'
'अमेरिका' की रचना 2016 में हुई। यह 18 कैरेट सोने से बनी है, जिसमें लगभग 100 किलोग्राम सोना लगा है। टॉयलेट का वजन करीब 125 किलोग्राम है। कैटेलन ने इसे न्यूयॉर्क के गगोशियन गैलरी में पहली बार प्रदर्शित किया। दर्शक इसे इस्तेमाल कर सकते थे, जो कला और व्यावहारिकता के बीच की सीमा को धुंधला करता था। 2017 में इसे विन्सटन चर्चिल के पूर्व निवास ब्लेनहाइम पैलेस में स्थापित किया गया। वहां इसे चुरा लिया गया, जो कला की असुरक्षा पर एक और व्यंग्य बन गया। चोरों ने इसे सोने के लिए नष्ट कर दिया। लेकिन कैटेलन ने दो अतिरिक्त संस्करण बनाए। अब बिकने वाला दूसरा संस्करण है। सोथबीज ने इसे 10 मिलियन डॉलर के अनुमानित मूल्य के साथ नीलामी में रखा। बिडिंग 18 नवंबर को शुरू हुई और 19 नवंबर को समाप्त हुई। अंतिम बोली 12.1 मिलियन डॉलर पर लगी, जिसमें खरीदार की प्रीमियम शामिल है। खरीदार की पहचान गोपनीय रखी गई है, लेकिन स्रोतों के अनुसार यह एक यूरोपीय कलेक्टर है।
यह नीलामी सोथबीज के समकालीन कला सत्र का हिस्सा थी। उसी शाम गुस्ताव क्लिम्ट की पेंटिंग 'बिल्डनिस एलिजाबेथ लेडरर' 236.4 मिलियन डॉलर में बिकी, जो नीलामी इतिहास की दूसरी सबसे महंगी पेंटिंग बनी। लेकिन 'अमेरिका' ने अपनी विचित्रता से ज्यादा ध्यान खींचा। नीलामी हॉल में सैकड़ों लोग जमा थे। कैटेलन खुद उपस्थित नहीं थे, लेकिन उनके प्रतिनिधि ने कहा कि यह बिक्री कला बाजार की विडंबना को दर्शाती है। सोने का मूल्यांकन वर्तमान बाजार दर से किया गया, जो लगभग 8 मिलियन डॉलर था। बाकी मूल्य इसकी कलात्मकता और विवादास्पदता से आया। कैटेलन ने कहा, 'यह टॉयलेट अमेरिका की तरह है—चमकदार बाहर से, लेकिन अंदर से खोखला।' यह कार्य उपभोक्तावाद पर टिप्पणी करता है, जहां लग्जरी आइटम बेकार साबित होते हैं।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं तीखी रही हैं। ट्विटर पर GoldenToiletAuction ट्रेंड कर रहा है। एक यूजर ने लिखा, '12 मिलियन डॉलर में सोने का टॉयलेट? यह कला है या पागलपन?' दूसरा बोला, 'कैटेलन ने फिर बाजार को बेवकूफ बनाया।' मीम्स की बाढ़ आ गई, जहां लोग इसे डोनाल्ड ट्रंप से जोड़ रहे हैं। 2018 में कैटेलन ने ट्रंप को यह टॉयलेट व्हाइट हाउस में दान करने की पेशकश की थी, लेकिन ट्रंप ने इसे 'घृणित' कहा। अब यह बिक्री उस व्यंग्य को ताजा कर रही है। इंस्टाग्राम पर आर्ट क्रिटिक्स ने इसे सराहा, कहा कि यह कला की स्वतंत्रता दिखाता है। लेकिन कुछ ने आलोचना की कि अमीरों की यह फिजूलखर्ची गरीबी पर तंज कस रही है। फेसबुक ग्रुप्स में बहस छिड़ी कि क्या यह वाकई कला है या केवल प्रचार।
कैटेलन की कला हमेशा विवादों में रही। 2001 में उन्होंने वेटिकन के कैथेड्रल में 'हिम' नामक मूर्ति लगाई, जो हिटलर का मोम का पुतला था। 2011 में 'डैड' नामक कार्य में उन्होंने पोंटिफ के चेहरे पर चॉकलेट से बने अंग बने। ये सभी रचनाएं धार्मिक और राजनीतिक संवेदनाओं को छूती हैं। 'अमेरिका' भी इसी श्रृंखला का हिस्सा है। विशेषज्ञों का कहना है कि कैटेलन कला बाजार की आलोचना करते हैं, जहां मूल्यांकन भावनाओं पर आधारित होता है। नीलामी के बाद सोथबीज ने कहा कि यह समकालीन कला का मील का पत्थर है। कैटेलन को इससे 10 मिलियन डॉलर का लाभ हुआ, जो उनकी अगली रचना के लिए प्रेरणा बनेगा।
यह घटना कला की परिभाषा पर सवाल उठाती है। क्या एक टॉयलेट कला हो सकता है? कैटेलन कहते हैं, 'कला वह है जो सोचने पर मजबूर करे।' दुनिया के कई संग्रहालयों में ऐसी विचित्र रचनाएं हैं, जैसे मार्सेल दुशां का 'फॉन्टेन' यूरिनल। 'अमेरिका' अब किसी निजी संग्रह में होगा, लेकिन इसकी कहानी जारी रहेगी। भारत में भी कला प्रेमी इसे चर्चा का विषय बना रहे हैं। दिल्ली के आर्ट गैलरी में प्रदर्शनियों में इसे उदाहरण दिया जा रहा है। विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसी कला समाज को आईना दिखाती है। सोने का मूल्य बढ़ने से इसकी कीमत और ऊंची हो सकती है।
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