उत्तर प्रदेश में हार्ट अटैक मरीजों के लिए मुफ्त इंजेक्शन: योगी सरकार ने मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में स्टेप्टोकाइनेज उपलब्ध कराया, बाजार मूल्य है 40-50 हजार रुपये
उत्तर प्रदेश में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। सर्दी के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। ऐसे में योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक
उत्तर प्रदेश में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। सर्दी के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। ऐसे में योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और प्रमुख सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में हार्ट अटैक के मरीजों के लिए जीवन रक्षक इंजेक्शन स्टेप्टोकाइनेज उपलब्ध कराया जा रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह इंजेक्शन मरीजों को पूरी तरह मुफ्त लगाया जाएगा। बाजार में इसकी कीमत 40 से 50 हजार रुपये तक होती है। यह फैसला स्वास्थ्य विभाग के निर्देश पर लिया गया है ताकि ग्रामीण और शहरी इलाकों में समय पर इलाज मिल सके। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को महंगे इलाज की चिंता न हो। यह योजना राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में एक और कदम है।
हार्ट अटैक यानी मायोकार्डियल इन्फार्क्शन आजकल युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक में आम हो गया है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में हर साल लाखों मामले दर्ज होते हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में राज्य में हार्ट अटैक से जुड़े मामलों में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई। सर्दियों में ठंडी हवाओं और प्रदूषण के कारण जोखिम दोगुना हो जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षण दिखने पर अगर समय रहते इलाज न हो तो जान जा सकती है। स्टेप्टोकाइनेज इंजेक्शन एक थ्रोम्बोलिटिक दवा है जो रक्त के थक्के को घोल देती है। यह एसटी सेगमेंट इलिवेशन मायोकार्डियल इन्फार्क्शन (एसटीईएमआई) के मामलों में बहुत कारगर साबित होती है। इंजेक्शन को हमले के पहले घंटे में लगाने से मरीज की जान बचने की संभावना 80 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। लेकिन इसकी ऊंची कीमत आम आदमी के लिए बाधा बनती है।
योगी सरकार ने इस समस्या का समाधान निकाल लिया है। स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने 15 नवंबर 2025 को घोषणा की कि राज्य के 75 जिलों के सभी प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों में यह इंजेक्शन स्टॉक किया जाएगा। इसमें 44 सरकारी मेडिकल कॉलेज, दो एआईआईएमएस (गोरखपुर और रायबरेली), जिला अस्पताल और 2500 से अधिक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं। राज्य सरकार ने दवा कंपनियों से अनुबंध किया है ताकि इंजेक्शन सस्ते दामों पर उपलब्ध हो। मरीजों को केवल डॉक्टर की सलाह पर यह इंजेक्शन लगाया जाएगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सहयोग से यह योजना चलाई जा रही है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि यह कदम आयुष्मान भारत योजना का हिस्सा है। अब तक 3.4 करोड़ लोगों को टेलीकंसल्टेशन सेवा मिल चुकी है।
यह योजना कैसे काम करेगी, इसका विवरण सरल है। हार्ट अटैक का शक होने पर मरीज को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया जाए। वहां ईसीजी टेस्ट होगा। अगर एसटीईएमआई की पुष्टि हुई तो इंजेक्शन तुरंत लगाया जाएगा। राज्य में 2270 एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस उपलब्ध हैं जो मरीज को जल्दी अस्पताल पहुंचा सकती हैं। ग्रामीण इलाकों में एएसएचए कार्यकर्ता जागरूकता फैला रही हैं। वे लक्षणों जैसे सीने में दर्द, सांस फूलना और पसीना आना के बारे में बताती हैं। अगर इंजेक्शन न लग सके तो पेरक्यूटेनियस कोरोनरी इंटरवेंशन (पीसीआई) या एंजियोप्लास्टी का विकल्प होगा। लेकिन इंजेक्शन सस्ता और तेज है। स्वास्थ्य विभाग ने 100 नए सीटी स्कैन मशीनें भी लगाई हैं।
उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में पिछले आठ वर्षों में जबरदस्त सुधार हुआ है। 2017 में सत्ता संभालते समय केवल 13 मेडिकल कॉलेज थे। अब 61 हो चुके हैं और 2025 तक सभी 75 जिलों में एक-एक मेडिकल कॉलेज होगा। महाराजगंज में केएमसी मेडिकल कॉलेज का उद्घाटन हाल ही में हुआ। एमबीबीएस सीटें दोगुनी हो गई हैं। गोरखपुर का बीआरडी मेडिकल कॉलेज अब एआईआईएमएस के बराबर है। सरकार ने 30 क्रिटिकल केयर ब्लॉक बनाए हैं और 4000 नए डॉक्टर नियुक्त किए हैं। वेक्टर-बोर्न बीमारियों के लिए 14 फ्री टेस्ट उपलब्ध हैं। आयुष्मान कार्ड से 5 करोड़ परिवार कवर हैं। कोविड काल में रेमडेसिविर इंजेक्शन मुफ्त बांटा गया था। अब हार्ट अटैक पर फोकस है।
यह फैसला ग्रामीण इलाकों के लिए वरदान है। जहां पहले मरीज दिल्ली या मुंबई जाते थे, अब नजदीक इलाज मिलेगा। कानपुर के हार्ट डिसीज इंस्टीट्यूट में पहले से टेनेक्टेप्लेज इंजेक्शन मुफ्त लगाया जा रहा है। वहां हमले के 6 घंटे के अंदर इंजेक्शन से कई जानें बची हैं। इसी तरह लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में स्टेप्टोकाइनेज का इस्तेमाल बढ़ा है। आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में भी स्टॉक हो गया है। स्वास्थ्य विभाग ने ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किया है ताकि नर्स और डॉक्टर सही तरीके से इंजेक्शन लगा सकें। जोखिम जैसे ब्लीडिंग को रोकने के उपाय भी सिखाए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्वास्थ्य सबका अधिकार है। उन्होंने हेल्थकेयर कॉनक्लेव 2025 में कहा कि एआई और नई तकनीक से सुधार होगा, लेकिन मरीज की गोपनीयता सुरक्षित रहेगी। निजी निवेश को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। नई स्वास्थ्य नीति में 57 जिला मुख्यालयों पर 200 बेड के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल बनेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में मॉडल सी के तहत सुविधाएं बढ़ेंगी। 14416 हेल्पलाइन पर साइकोलॉजिकल काउंसलिंग उपलब्ध है।
यह कदम अन्य राज्यों के लिए मिसाल है। आंध्र प्रदेश में भी स्टेप्टोकाइनेज मुफ्त योजना चल रही है। लेकिन उत्तर प्रदेश की पहुंच व्यापक है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे हार्ट अटैक की मृत्यु दर 30 प्रतिशत कम हो सकती है। जागरूकता अभियान से लोग समय पर अस्पताल पहुंचेंगे। गरीब परिवारों को अब महंगे इंजेक्शन की फिक्र न होगी।
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