मेडिकल कॉलेज के चार छात्रों की मौत, अमरोहा में ट्रक और कार की टक्कर में गाड़ी के उड़े परखच्चे। 

उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में दिल्ली-लखनऊ नेशनल हाईवे पर बुधवार देर रात एक भयावह सड़क हादसा घटित हो गया, जिसमें एक

Dec 4, 2025 - 12:11
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मेडिकल कॉलेज के चार छात्रों की मौत, अमरोहा में ट्रक और कार की टक्कर में गाड़ी के उड़े परखच्चे। 
मेडिकल कॉलेज के चार छात्रों की मौत, अमरोहा में ट्रक और कार की टक्कर में गाड़ी के उड़े परखच्चे। 

उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में दिल्ली-लखनऊ नेशनल हाईवे पर बुधवार देर रात एक भयावह सड़क हादसा घटित हो गया, जिसमें एक तेज रफ्तार कार सड़क किनारे खड़े डीसीएम ट्रक से जा टकराई। इस टक्कर के भयंकर प्रभाव से कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और इसमें सवार चार युवा चिकित्सकों की मौके पर ही मौत हो गई। ये सभी युवा श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय के एमबीबीएस कोर्स के छात्र थे, जिन्होंने हाल ही में अपनी स्नातक डिग्री पूरी की थी और इंटर्नशिप के दौरान सेवा के क्षेत्र में कदम रखने की तैयारी कर रहे थे। हादसा रजबपुर थाना क्षेत्र के अतरासी गांव के पास फ्लाईओवर के निकट रेस्टोरेंट के सामने लगभग दस बजे हुआ, जब कार मेरठ से गाजियाबाद की ओर बढ़ रही थी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और शवों को बाहर निकालने के लिए घंटों की मशक्कत करनी पड़ी। पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है, जबकि विश्वविद्यालय के अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे।

हादसे की जानकारी के अनुसार, कार में सवार चारों युवा दिल्ली और अन्य राज्यों के निवासी थे। मृतकों में आयुष शर्मा का नाम प्रमुख है, जो दिल्ली के द्वारका सेक्टर-16 के निवासी महेश शर्मा के पुत्र थे। आयुष ने एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद इंटर्नशिप के चरण में प्रवेश किया था और भविष्य में चिकित्सा सेवा को समर्पित होने की दिशा में अग्रसर थे। इसी तरह, सप्त ऋषि दास, जो त्रिपुरा के रामनगर अर्थला वार्ड नंबर 12 के शुशांत शेखर दास के पुत्र थे, भी इस हादसे का शिकार हो गए। सप्त ऋषि ने भी अपनी डिग्री हासिल कर ली थी और अस्पतालों में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे थे। अर्णव चक्रवर्ती और श्रेष्ठ पंचोली के नाम भी मृतकों की सूची में शामिल हैं, जो क्रमशः पश्चिम बंगाल और अन्य क्षेत्रों से संबंधित थे। ये सभी 2020 बैच के छात्र थे और विश्वविद्यालय के मेडिकल कॉलेज से जुड़े हुए थे। हादसे के समय वे कार में एक साथ यात्रा कर रहे थे, जो सामान्यतः उनके दैनिक आवागमन का हिस्सा थी।

घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया। चश्मदीदों के बयानों से पता चला कि कार की गति अत्यधिक थी, जिसके कारण चालक सड़क किनारे खड़े ट्रक को समय रहते देख पाने में असमर्थ रहा। ट्रक दिल्ली की ओर से आ रहा था और फ्लाईओवर के पास रुक गया था, संभवतः आराम या अन्य कारणों से। अंधेरे और हाईवे की व्यस्तता के बीच यह टक्कर हुई, जिससे कार का अगला हिस्सा पूरी तरह चूर-चूर हो गया। शवों को निकालने के लिए कटिंग मशीनों का सहारा लेना पड़ा, जो हादसे की तीव्रता का संकेत देता है। पुलिस ने डीसीएम चालक को हिरास्थपन किया है और मामले की गहन जांच के लिए फॉरेंसिक टीम को बुलाया गया है। प्रारंभिक रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि कार की अत्यधिक गति और सड़क किनारे वाहन की अनुचित पार्किंग दोनों ही कारक थे।

श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय के मेडिकल विभाग से जुड़े इन छात्रों की मौत ने पूरे संस्थान में शोक की लहर दौड़ा दी है। विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि घटनास्थल पर पहुंचे और मृतकों के परिजनों से संपर्क स्थापित करने का प्रयास किया। ये छात्र न केवल अपनी पढ़ाई में उत्कृष्ट थे, बल्कि इंटर्नशिप के दौरान विभिन्न चिकित्सा गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभा रहे थे। आयुष शर्मा जैसे छात्र दिल्ली से अमरोहा आते-जाते थे, जो उनकी दृढ़ता का प्रमाण था। सप्त ऋषि दास त्रिपुरा से दूर रहकर भी अपनी पढ़ाई को गंभीरता से ले रहे थे। अर्णव चक्रवर्ती और श्रेष्ठ पंचोली भी इसी तरह समर्पित थे, जो चिकित्सा क्षेत्र में योगदान देने के लिए तैयार हो चुके थे। हादसे के बाद शवों को नजदीकी अस्पताल की मोर्चरी में रखा गया, जहां पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपा जाएगा।

इस घटना ने नेशनल हाईवे-9 की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमरोहा जिले में इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही अत्यधिक रहती है, खासकर रात्रि के समय जब ट्रक और कारें दिल्ली-लखनऊ के बीच दौड़ती हैं। सड़क किनारे वाहनों को खड़ा करने की प्रवृत्ति पहले भी कई हादसों का कारण बनी है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ट्रक चालकों को निर्देश दिए जाते हैं कि वे निर्धारित रेस्ट एरिया का उपयोग करें, लेकिन इसका पालन हमेशा नहीं होता। हादसे के बाद ट्रैफिक पुलिस ने हाईवे पर विशेष चेकिंग अभियान चलाया, जिसमें ओवरस्पीडिंग वाहनों पर नजर रखी जा रही है। इसके अलावा, साइनेज और लाइटिंग की व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

मृतकों के परिजनों को सूचना मिलने पर वे विभिन्न स्थानों से अमरोहा पहुंचे। दिल्ली से आयुष शर्मा के परिवार वाले शव प्राप्त करने के लिए अस्पताल पहुंचे, जबकि त्रिपुरा से सप्त ऋषि दास के परिजनों को यात्रा करनी पड़ी। अर्णव चक्रवर्ती के परिवार ने भी तत्काल यात्रा शुरू की। पुलिस ने शवों की पहचान दस्तावेजों के आधार पर की, जो कार से बरामद हुए। विश्वविद्यालय ने मृतकों के लिए विशेष व्यवस्था की घोषणा की, जिसमें शैक्षणिक सहायता और औपचारिक श्रद्धांजलि शामिल है। हादसे की जांच में यह भी शामिल है कि कार में कोई तकनीकी खराबी तो नहीं थी, हालांकि प्रारंभिक जांच में स्पष्ट किया गया है कि मुख्य कारण गति और ट्रक की स्थिति थे।

अमरोहा जिले में इस रात एक अन्य हादसा भी घटित हुआ, जो सड़क सुरक्षा की कमियों को उजागर करता है। गजरौला थाना क्षेत्र के नेशनल हाईवे-9 पर लगभग आठ बजकर पैंतालीस मिनट पर एक ट्रक ने बाइक सवार दो युवकों को रौंद दिया। इस टक्कर में दोनों युवकों की मौके पर मौत हो गई। ट्रक की तेज रफ्तार के कारण बाइक सवार बच पाने में असमर्थ रहे। पुलिस ने ट्रक चालक को गिरफ्तार किया और मामले की जांच शुरू की। ये दोनों हादसे एक ही रात में होने से जिले में सतर्कता बढ़ गई है। कुल छह मौतों ने स्थानीय प्रशासन को सड़क सुरक्षा पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया।

हाईवे पर होने वाले ऐसे हादसों की संख्या को देखते हुए, अधिकारियों ने वाहन चालकों को सलाह दी है कि वे रात्रि यात्रा के दौरान विशेष सावधानी बरतें। ओवरटेकिंग के समय दूरी बनाए रखना और सड़क किनारे खड़े वाहनों पर नजर रखना आवश्यक बताया गया है। एम्बुलेंस और क्रेन की तैनाती को बढ़ाया गया है ताकि भविष्य में बचाव कार्य तेजी से हो सके। विश्वविद्यालय के छात्रों की इस घटना ने चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में भी चिंता पैदा की है, जहां युवा प्रतिभाएं सड़क हादसों का शिकार हो रही हैं।

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