अमेरिका में कोविड-19 के नए 'सिकाडा' वेरिएंट की दस्तक: क्या यह पिछली लहरों से अधिक खतरनाक है?

कोरोना वायरस के इस नए वंश, BA.3.2 को 'सिकाडा' उपनाम इसलिए दिया गया है क्योंकि यह कीटों की उस प्रजाति की तरह व्यवहार कर रहा है जो

Mar 31, 2026 - 12:46
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अमेरिका में कोविड-19 के नए 'सिकाडा' वेरिएंट की दस्तक: क्या यह पिछली लहरों से अधिक खतरनाक है?
अमेरिका में कोविड-19 के नए 'सिकाडा' वेरिएंट की दस्तक: क्या यह पिछली लहरों से अधिक खतरनाक है?
  • BA.3.2 वेरिएंट का बढ़ता प्रकोप: चिकित्सा विशेषज्ञों ने दी सावधानी बरतने और टीकाकरण पर ध्यान देने की सलाह
  • नए वेरिएंट के 70 से अधिक म्यूटेशन ने बढ़ाई चिंता: डॉक्टर से समझें सुरक्षा के उपाय और लक्षणों की पहचान

कोरोना वायरस के इस नए वंश, BA.3.2 को 'सिकाडा' उपनाम इसलिए दिया गया है क्योंकि यह कीटों की उस प्रजाति की तरह व्यवहार कर रहा है जो लंबे समय तक जमीन के नीचे रहने के बाद अचानक सतह पर दिखाई देते हैं। यह वेरिएंट वास्तव में ओमिक्रॉन के पुराने BA.3 वंश से विकसित हुआ है, जो वर्ष 2022 के आसपास सक्रिय था और फिर गायब हो गया था। अब, लगभग दो वर्षों के बाद, यह 70 से 75 नए आनुवंशिक बदलावों के साथ वापस लौटा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतने अधिक म्यूटेशन वायरस को शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली यानी इम्यून सिस्टम से बचने में मदद कर सकते हैं, जिससे उन लोगों में भी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है जिन्हें पहले कोविड हो चुका है या जिन्होंने वैक्सीन लगवाई है।

संयुक्त राज्य अमेरिका के 25 से अधिक राज्यों में सीवेज (Wastewater) की निगरानी और क्लीनिकल नमूनों में इस वेरिएंट की पुष्टि हो चुकी है। स्वास्थ्य केंद्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इसके संक्रमण के मामले कैलिफोर्निया, न्यूयॉर्क और फ्लोरिडा जैसे बड़े राज्यों में अधिक देखे जा रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इसके फैलने की गति पिछले 'JN.1' वेरिएंट की तुलना में कुछ अधिक हो सकती है, लेकिन राहत की बात यह है कि अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में वैसी भयावह वृद्धि नहीं देखी गई है जैसी डेल्टा वेरिएंट के समय देखी गई थी। यह मुख्य रूप से ऊपरी श्वसन तंत्र (Upper Respiratory Tract) को प्रभावित कर रहा है, जिससे इसके लक्षण सामान्य सर्दी-जुकाम से मिलते-जुलते महसूस होते हैं।

लक्षणों की बात करें तो BA.3.2 से संक्रमित मरीजों में बुखार, लगातार खांसी, थकान और गले में तेज खराश जैसे आम लक्षण देखे जा रहे हैं। कुछ मामलों में मरीजों ने रात में पसीना आने (Night Sweats) और शरीर पर हल्के चकत्ते (Rashes) की भी शिकायत की है। दिलचस्प बात यह है कि इस वेरिएंट में स्वाद और गंध जाने की समस्या बहुत कम देखी जा रही है, जो शुरुआती कोविड वेरिएंट्स की मुख्य पहचान थी। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आपको सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द या नाक बहने जैसे लक्षण महसूस हों, तो इसे हल्के में न लें और तुरंत जांच कराएं, ताकि समय रहते इसके प्रसार को रोका जा सके। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बुजुर्गों और पहले से किसी गंभीर बीमारी (जैसे मधुमेह या हृदय रोग) से जूझ रहे व्यक्तियों के लिए यह वेरिएंट जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे लोगों को भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मास्क का उपयोग अनिवार्य रूप से करना चाहिए।

टीकाकरण और इसकी प्रभावशीलता को लेकर भी वैज्ञानिक समुदाय में गहन शोध चल रहा है। वर्तमान में उपलब्ध 2025-2026 के अपडेटेड बूस्टर डोज इस वेरिएंट के खिलाफ कितनी सुरक्षा देंगे, इस पर प्रयोगशालाओं में परीक्षण किए जा रहे हैं। शुरुआती परिणामों से पता चलता है कि हालांकि यह वेरिएंट एंटीबॉडीज को चकमा देने में माहिर है, लेकिन टीकों द्वारा तैयार की गई 'टी-सेल' मेमोरी अभी भी वायरस को पहचानने और शरीर को गंभीर स्थिति में जाने से बचाने में कारगर है। इसलिए, डॉक्टर अभी भी यही सलाह दे रहे हैं कि जिन लोगों ने अभी तक अपना वार्षिक बूस्टर शॉट नहीं लिया है, उन्हें बिना देरी किए इसे लगवा लेना चाहिए।

रोकथाम के उपायों में कोई विशेष बदलाव नहीं आया है, लेकिन उनकी सख्ती से पालना अब और भी जरूरी हो गई है। हाथों को बार-बार साबुन से धोना, सार्वजनिक स्थानों पर उचित दूरी बनाए रखना और वेंटिलेशन का ध्यान रखना इस वायरस की चेन तोड़ने में मददगार साबित हो सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि बंद कमरों में जहां हवा का आवागमन कम हो, वहां संक्रमण फैलने का खतरा सबसे अधिक होता है। इसलिए, यदि संभव हो तो बाहरी गतिविधियों को प्राथमिकता दें और सामूहिक आयोजनों में मास्क के प्रयोग को फिर से अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। इस नए वेरिएंट के उदय ने एक बार फिर वैश्विक स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली की महत्ता को प्रमाणित कर दिया है। अपशिष्ट जल (Wastewater) की निगरानी तकनीक ने स्वास्थ्य अधिकारियों को संक्रमण की लहर आने से हफ्तों पहले ही चेतावनी दे दी थी। वैज्ञानिकों का तर्क है कि जब तक वायरस दुनिया के किसी भी हिस्से में सक्रिय है, वह अपने स्वरूप बदलता रहेगा। इसलिए, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डेटा साझा करना और जीनोम सीक्वेंसिंग को बढ़ावा देना भविष्य की किसी भी बड़ी महामारी को रोकने के लिए अनिवार्य है। जनता को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक स्वास्थ्य बुलेटिन पर ही भरोसा करें और भ्रामक जानकारियों से बचें।

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