नागपुर विश्वविद्यालय में मार्कशीट में गड़बड़ी, BBA छात्रों को दी गई B.Com की मार्कशीट, कई को गैरहाजिर दिखाकर फेल किया, विरोध प्रदर्शन। 

Trending News: महाराष्ट्र के नागपुर में राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय (आरटीएमएनयू) में एक अजीबोगरीब घटना सामने आई है, जिसने छात्रों और अभिभावकों में आक्रोश पैदा कर

Aug 22, 2025 - 12:38
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नागपुर विश्वविद्यालय में मार्कशीट में गड़बड़ी, BBA छात्रों को दी गई B.Com की मार्कशीट, कई को गैरहाजिर दिखाकर फेल किया, विरोध प्रदर्शन। 
नागपुर विश्वविद्यालय में मार्कशीट में गड़बड़ी, BBA छात्रों को दी गई B.Com की मार्कशीट, कई को गैरहाजिर दिखाकर फेल किया, विरोध प्रदर्शन। 

महाराष्ट्र के नागपुर में राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय (आरटीएमएनयू) में एक अजीबोगरीब घटना सामने आई है, जिसने छात्रों और अभिभावकों में आक्रोश पैदा कर दिया है। विश्वविद्यालय की परीक्षा विभाग की लापरवाही के कारण बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (BBA) के छात्रों को बैचलर ऑफ कॉमर्स (B.Com) की मार्कशीट जारी कर दी गई। इतना ही नहीं, कई छात्रों को उन विषयों में गैरहाजिर दिखाया गया, जिनकी परीक्षा उन्होंने दी थी, और उन्हें फेल कर दिया गया। इस गंभीर गड़बड़ी के खिलाफ गुस्साए छात्रों ने 20 अगस्त 2025 को विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर तत्काल सुधार की मांग की। यह मामला तब सामने आया जब BBA के दूसरे सेमेस्टर (एनईपी) के परिणाम 5 अगस्त 2025 को विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर घोषित किए गए। परिणाम देखने के बाद कई छात्र हैरान रह गए, क्योंकि उनकी मार्कशीट पर BBA की बजाय B.Com लिखा था। कुछ मार्कशीट पर विषय “इंट्रोडक्शन टू कॉमर्स” में गैरहाजिर दिखाया गया, जिसके कारण छात्रों को फेल घोषित कर दिया गया। इसके अलावा, कई छात्रों ने शिकायत की कि उनकी मार्कशीट पर गलत कोर्स और विषयों का उल्लेख है, जैसे कि “बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन” को B.Com के तहत दिखाया गया। इस गड़बड़ी से प्रभावित छात्रों में से अधिकांश तीन संबद्ध कॉलेजों लेडी अमृतबाई दागा कॉलेज, डॉ. अंबेडकर कॉलेज, और हिसलॉप कॉलेज के हैं।

छात्रों का नेतृत्व नागपुर शहर कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष वसीम खान ने किया, जिन्होंने विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग की लापरवाही की कड़ी निंदा की। वसीम खान ने कहा, “छात्रों ने मेहनत से परीक्षा दी, लेकिन परिणाम में उन्हें गैरहाजिर दिखाया गया या गलत कोर्स की मार्कशीट दी गई। यह विश्वविद्यालय की विफलता और लापरवाही का सबूत है।” उन्होंने मांग की कि विश्वविद्यालय तुरंत इन गलतियों को सुधारे और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करे। छात्रों ने यह भी बताया कि इस तरह की गड़बड़ी उनके भविष्य और करियर को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि गलत मार्कशीट और फेल होने का रिकॉर्ड उनकी आगे की पढ़ाई और नौकरी की संभावनाओं पर असर डाल सकता है। विश्वविद्यालय के उप-कुलसचिव मनीष जोडपे ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गैरहाजिरी की गलतियों को सुधार लिया गया है। उन्होंने दावा किया कि तकनीकी त्रुटि के कारण कुछ छात्रों की मार्कशीट में गलत कोर्स का उल्लेख हुआ, और विश्वविद्यालय इसे ठीक करने के लिए काम कर रहा है। हालांकि, छात्रों और कॉलेज प्राचार्यों ने इस बयान पर असंतोष जताया और कहा कि यह पहली बार नहीं है जब विश्वविद्यालय ने ऐसी लापरवाही दिखाई है। पहले भी परिणामों में देरी, गलत मार्कशीट, और प्रशासनिक खामियों के मामले सामने आ चुके हैं।

इस साल विश्वविद्यालय ने पहली बार 50:50 मूल्यांकन प्रणाली लागू की थी, जिसमें आंतरिक मूल्यांकन और सेमेस्टर अंत की परीक्षाओं का वेटेज बराबर रखा गया। इसके अलावा, नई मार्कशीट में नौ मूल्यांकन मॉड्यूल शामिल किए गए हैं, जिससे छात्रों को नई प्रणाली को समझने में भी दिक्कत हो रही है। कई छात्रों का कहना है कि नई प्रणाली और तकनीकी त्रुटियों के कारण परिणामों में गड़बड़ी हुई। एक प्रभावित छात्र ने कहा, “हमने BBA की परीक्षा दी थी, लेकिन मार्कशीट पर B.Com लिखा है। यह हमारी मेहनत का अपमान है।”

यह घटना नागपुर विश्वविद्यालय की प्रशासनिक कमियों को उजागर करती है। राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय, जिसे 1923 में स्थापित किया गया था, भारत के सबसे पुराने विश्वविद्यालयों में से एक है। यह 800 से अधिक संबद्ध कॉलेजों के साथ विदर्भ क्षेत्र में शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र है। विश्वविद्यालय कला, वाणिज्य, विज्ञान, इंजीनियरिंग, कानून, प्रबंधन, और सामाजिक विज्ञान जैसे कई क्षेत्रों में पाठ्यक्रम प्रदान करता है। इसके बावजूद, परिणामों में देरी, गलत मार्कशीट, और प्रशासनिक लापरवाही की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई छात्रों और अभिभावकों ने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। एक यूजर ने लिखा, “यह शर्मनाक है कि इतने बड़े विश्वविद्यालय में ऐसी गलतियां हो रही हैं। छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ क्यों?” एक अन्य यूजर ने लिखा, “विश्वविद्यालय को तुरंत इन गलतियों को सुधारना चाहिए और भविष्य में ऐसी गड़बड़ियां रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए।” कुछ यूजर्स ने नई मूल्यांकन प्रणाली को भी जिम्मेदार ठहराया और कहा कि इसे लागू करने से पहले कर्मचारियों को प्रशिक्षण देना चाहिए था। कॉलेज प्राचार्यों ने भी इस मामले में अपनी नाराजगी जताई। लेडी अमृतबाई दागा कॉलेज की प्राचार्या ने कहा, “हमारे छात्रों ने मेहनत की, लेकिन विश्वविद्यालय की गलती के कारण उन्हें परेशानी हो रही है। यह गलती तुरंत सुधारी जानी चाहिए।” कई प्राचार्यों ने यह भी मांग की कि विश्वविद्यालय को ऐसी गलतियों के लिए जवाबदेह बनाया जाए और भविष्य में इसे रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि गलत मार्कशीट को तुरंत सुधारा जाए और गैरहाजिर दिखाए गए छात्रों के परिणामों को अपडेट किया जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि विश्वविद्यालय इस गड़बड़ी के लिए माफी मांगे और प्रभावित छात्रों को मुफ्त में सही मार्कशीट प्रदान करे। कुछ छात्रों ने रिवैल्यूएशन के लिए आवेदन करने की बात कही, लेकिन उनका कहना है कि गलती विश्वविद्यालय की है, इसलिए रिवैल्यूएशन की फीस नहीं ली जानी चाहिए। विश्वविद्यालय प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि सभी गलतियों को जल्द से जल्द सुधार लिया जाएगा। उप-कुलसचिव ने कहा कि तकनीकी त्रुटियों को ठीक करने के लिए एक विशेष टीम बनाई गई है, और प्रभावित छात्रों को नई मार्कशीट जल्द जारी की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी गलतियां न हों, इसके लिए सिस्टम में सुधार किया जाएगा। यह घटना न केवल छात्रों के लिए एक झटका है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था में विश्वास को भी प्रभावित करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि विश्वविद्यालयों को अपनी प्रशासनिक प्रक्रियाओं को और पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत करना होगा। एक शिक्षाविद ने कहा, “छात्रों का भविष्य विश्वविद्यालयों के हाथ में होता है। ऐसी गलतियां उनके करियर को नुकसान पहुंचा सकती हैं।”

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