मध्य प्रदेश के भिंड, बैतूल और दमोह में SIR ड्यूटी वाले बीएलओ को हार्ट अटैक, परिजनों ने लगाया दबाव का आरोप। 

मध्य प्रदेश में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान ने बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) पर भारी दबाव डाल दिया है। मतदाता सूची को अपडेट

Nov 27, 2025 - 11:48
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मध्य प्रदेश के भिंड, बैतूल और दमोह में SIR ड्यूटी वाले बीएलओ को हार्ट अटैक, परिजनों ने लगाया दबाव का आरोप। 
मध्य प्रदेश के भिंड, बैतूल और दमोह में SIR ड्यूटी वाले बीएलओ को हार्ट अटैक, परिजनों ने लगाया दबाव का आरोप। 

मध्य प्रदेश में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान ने बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) पर भारी दबाव डाल दिया है। मतदाता सूची को अपडेट करने के इस ड्राइव के दौरान तीन जिलों भिंड, दमोह और बैतूल में BLO को हार्ट अटैक आने की घटनाएं सामने आई हैं। भिंड के शिक्षक रविंद्र शाक्य को ड्यूटी जाते समय हार्ट अटैक आया, जबकि दमोह के सीताराम गोंड की ड्यूटी के दौरान तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। बैतूल में भी एक BLO की हालत गंभीर बताई जा रही है। परिजनों ने इन घटनाओं के लिए अतिरिक्त काम का बोझ, लक्ष्य पूरा न करने पर निलंबन का डर और अधिकारियों की ओर से लगाए गए दबाव को जिम्मेदार ठहराया है। राज्य में पिछले 10 दिनों में छह BLO की मौत हो चुकी है, जो SIR प्रक्रिया की कठिनाइयों को उजागर कर रही हैं। कर्मचारी संगठनों ने चुनाव आयोग से समय सीमा बढ़ाने, मुआवजा देने और बीमार कर्मचारियों को राहत प्रदान करने की मांग की है।

SIR अभियान चुनाव आयोग का एक महत्वपूर्ण कदम है, जो बिहार विधानसभा चुनाव के बाद शुरू हुआ। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को साफ-सुथरा बनाना है, जिसमें मृत, डुप्लीकेट या स्थानांतरित नामों को हटाया जाता है। मध्य प्रदेश के 230 विधानसभा क्षेत्रों में 5.74 करोड़ मतदाताओं के लिए 65,014 BLO तैनात हैं। ये ज्यादातर सरकारी स्कूल शिक्षक हैं, जिन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। अभियान 4 नवंबर से शुरू हुआ और 25 नवंबर तक 72.73 प्रतिशत डिजिटाइजेशन पूरा हो चुका है। BLO को हर बूथ पर फॉर्म भरवाने, दस्तावेज सत्यापित करने और डेटा ऑनलाइन अपलोड करने का काम सौंपा गया है। लेकिन छोटी समय सीमा, रोजाना 100 मतदाताओं का लक्ष्य और स्मार्टफोन पर निर्भरता ने कई BLO को परेशान कर दिया है। कुछ BLO बुजुर्ग हैं या पहले से बीमार, फिर भी उन्हें छुट्टी नहीं मिली।

भिंड जिले में सबसे ताजा मामला 25 नवंबर का है। शहर के रहने वाले 55 वर्षीय शिक्षक रविंद्र शाक्य लंबे समय से हार्ट की समस्या से जूझ रहे थे। वे प्राथमिक स्कूल में तैनात थे और SIR ड्यूटी पर भिंड शहर के एक बूथ के लिए जिम्मेदार थे। सुबह करीब नौ बजे ड्यूटी के लिए निकले, लेकिन रास्ते में ही छाती में तेज दर्द शुरू हो गया। उन्होंने सहकर्मियों को फोन कर कहा, 'मैं बीमार हूं, आज काम नहीं कर पाऊंगा।' लेकिन अधिकारियों ने कथित तौर पर अनसुना कर दिया और लक्ष्य पूरा करने का दबाव बनाया। रविंद्र रास्ते में गिर पड़े। परिजनों ने उन्हें तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने हार्ट अटैक की पुष्टि की। उनका इलाज जारी है, लेकिन हालत नाजुक बनी हुई है। रविंद्र के बेटे ने बताया कि पिता को सुबह नौ बजे से रात 11 बजे तक काम करने को कहा जाता था। निलंबन का डर सताता था। वे कहते, 'लक्ष्य पूरा न हुआ तो नौकरी चली जाएगी।' परिवार ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। भिंड कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

दमोह जिले में स्थिति और गंभीर है। यहां 21 नवंबर को 50 वर्षीय शिक्षक सीताराम गोंड की मौत हो गई। वे रंजरा गांव के BLO थे और दो गांवों में फॉर्म भरने का काम कर रहे थे। 20 नवंबर की शाम को फॉर्म भरते समय अचानक बेसब्र हो गए। उन्हें पहले जिला अस्पताल ले जाया गया, फिर जबलपुर रेफर किया गया। लेकिन रास्ते में ही इलाज के दौरान उनकी सांसें थम गईं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हार्ट अटैक कारण बताया गया। सीताराम के बेटे आदित्य ने कहा कि पिता ने कई बार अधिकारियों को अपनी बीमारी बताई, लेकिन छुट्टी नहीं मिली। वे रोज रात देर तक डेटा एंट्री करते थे। परिवार का आरोप है कि SIR का दबाव ही मौत का कारण बना। दमोह में इससे पहले BLO श्याम सुंदर शर्मा की सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी थी। परिजनों ने कहा कि वे भी दबाव में तेज गाड़ी चला रहे थे। जिला शिक्षा अधिकारी एसके नेमा ने बताया कि सीताराम पहले से बीमार थे, लेकिन परिवार दबाव का हवाला दे रहा है। दमोह कलेक्टर ने शोक व्यक्त किया और परिवार को सहायता का आश्वासन दिया।

बैतूल जिले में भी SIR ड्यूटी से जुड़ी एक घटना ने हलचल मचा दी है। यहां 23 नवंबर को एक BLO को ड्यूटी के दौरान हल्का हार्ट अटैक आया। उनका नाम गोपनीय रखा गया है, लेकिन वे आंगनवाड़ी कार्यकर्ता थे। वे ग्रामीण इलाके में फॉर्म वितरण कर रही थीं। अचानक सीने में दर्द हुआ और वे गिर पड़ीं। सहकर्मियों ने उन्हें नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। डॉक्टरों ने आराम की सलाह दी, लेकिन परिवार ने दबाव का आरोप लगाया। बैतूल के एक BLO ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि जिले में 500 से ज्यादा BLO तैनात हैं, लेकिन संसाधनों की कमी है। स्मार्टफोन न चलाने वाले BLO को ट्रेनिंग भी पर्याप्त नहीं मिली। बैतूल कलेक्टर ने कहा कि बीमार BLO को दूसरों से सहायता लेने को कहा जाता है, लेकिन जमीन पर अमल नहीं हो रहा।

ये घटनाएं मध्य प्रदेश में SIR अभियान की व्यापक समस्या का हिस्सा हैं। राज्य में 11 नवंबर से अब तक छह BLO की मौत हो चुकी है। रीवा में विजय पांडे को ब्रेन हेमरेज हुआ, झाबुआ में भुवन सिंह चौहान को निलंबन के सदमे में हार्ट अटैक आया। शहडोल में मनीराम नापित रास्ते में गिर पड़े। भोपाल में दो BLO कीर्ति कौशल और मोहम्मद लईक अस्पताल में भर्ती हैं। बालाघाट में अनीता नागेश्वर की पीलिया से मौत हुई। परिजन एक स्वर में कहते हैं कि दबाव ने स्वास्थ्य बिगाड़ दिया। एक BLO की पत्नी ने कहा, 'रात को फोन आते थे, लक्ष्य पूरा करो वरना सस्पेंड। नींद नहीं आती थी।' कर्मचारी संगठन मध्य प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने चुनाव आयुक्त को पत्र लिखा। महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने मांग की कि मृत BLO के परिवार को 15 लाख मुआवजा मिले, बीमारों का इलाज सरकारी खर्च पर हो। समय सीमा बढ़ाई जाए। उन्होंने कहा कि चुनाव ड्यूटी में जो सुविधाएं मिलती हैं, वही SIR में भी दें।

राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने SIR को 'जानलेवा डेडलाइन' कहा। नेता ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'BLO की मौतें पीड़ादायक हैं। दबाव कम करें।' पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि सरकार BLO की पीड़ा समझे। बीजेपी ने सफाई दी कि मौतें पहले से बीमारी से हुईं, दबाव नहीं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनुपम राजा ने कहा कि प्रक्रिया सुचारू है, लेकिन स्वास्थ्य जांच के निर्देश दिए। विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही। विशेषज्ञों का कहना है कि SIR जरूरी है, लेकिन BLO की संख्या बढ़ानी चाहिए। डिजिटल फॉर्म भरना ग्रामीण इलाकों में मुश्किल है। ट्रेनिंग और सहायक स्टाफ दें।

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