UIDAI की बड़ी कार्रवाई: 2 करोड़ से अधिक आधार नंबर डीएक्टिवेट, पहचान चोरी और फ्रॉड रोकने के लिए डेटाबेस सफाई। 

यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 2 करोड़ से अधिक मृत व्यक्तियों के आधार नंबरों

Nov 27, 2025 - 11:53
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UIDAI की बड़ी कार्रवाई: 2 करोड़ से अधिक आधार नंबर डीएक्टिवेट, पहचान चोरी और फ्रॉड रोकने के लिए डेटाबेस सफाई। 
UIDAI की बड़ी कार्रवाई: 2 करोड़ से अधिक आधार नंबर डीएक्टिवेट, पहचान चोरी और फ्रॉड रोकने के लिए डेटाबेस सफाई। 

यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 2 करोड़ से अधिक मृत व्यक्तियों के आधार नंबरों को डीएक्टिवेट कर दिया है। यह कार्रवाई देशव्यापी डेटाबेस सफाई अभियान का हिस्सा है, जो आधार प्रोग्राम की शुरुआत के बाद से अब तक की सबसे बड़ी पहल है। 26 नवंबर 2025 को इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी मिनिस्ट्री ने इसकी जानकारी दी। UIDAI का कहना है कि मृत व्यक्ति का आधार नंबर सक्रिय रहने से पहचान चोरी, धोखाधड़ी और सरकारी योजनाओं के लाभों की गलत प्राप्ति जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, पेंशन का गलत निकासी या सब्सिडी का दुरुपयोग। इस अभियान से आधार डेटाबेस की सटीकता बढ़ेगी और लाखों करोड़ रुपये के सरकारी फंड की बचत होगी। UIDAI ने परिवारों से अपील की है कि वे myAadhaar पोर्टल पर मृतक रिश्तेदारों की जानकारी अपडेट करें। यह प्रक्रिया 2024 से चल रही थी और 2025 में तेज हुई, जिससे जुलाई तक 1.17 करोड़, सितंबर तक 1.4 करोड़ और अब 2 करोड़ नंबर डीएक्टिवेट हो चुके हैं।

आधार योजना 2009 में शुरू हुई थी, जो अब 138 करोड़ से अधिक भारतीयों की पहचान का आधार है। यह 12 अंकों का यूनिक नंबर है, जो बायोमेट्रिक डेटा से जुड़ा होता है। लेकिन मृतकों के नंबरों को सक्रिय रखना एक बड़ी चुनौती था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर साल करीब 1 करोड़ मौतें दर्ज होती हैं, लेकिन इनमें से कई आधार से लिंक नहीं होतीं। इससे फर्जी क्लेम्स बढ़ते हैं। UIDAI ने इस समस्या को हल करने के लिए रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (RGI), राज्य सरकारें, यूनियन टेरिटरी, पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) और नेशनल सोशल असिस्टेंस प्रोग्राम (NSAP) जैसे स्रोतों से डेटा लिया। इन एजेंसियों से मिली मौतों की सत्यापित जानकारी के आधार पर नंबरों को डीएक्टिवेट किया गया। UIDAI ने स्पष्ट किया कि आधार नंबर कभी किसी अन्य व्यक्ति को दोबारा असाइन नहीं किए जाते। लेकिन मृत्यु के बाद डीएक्टिवेशन जरूरी है, ताकि अनधिकृत उपयोग न हो।

यह अभियान डिजिटल इंडिया की दिशा में महत्वपूर्ण है। आधार से जुड़ी 300 से अधिक सरकारी योजनाएं चल रही हैं, जैसे पीएम किसान, उज्ज्वला और राशन। अगर मृतक का नंबर सक्रिय रहे, तो फर्जी लाभार्थी इनका दुरुपयोग कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, एक रिपोर्ट के मुताब्तक PDS में 5 लाख से अधिक फर्जी कार्ड पाए गए, जिनमें से कई मृतकों के नाम पर थे। इसी तरह, NSAP के तहत पेंशन योजनाओं में गलत निकासी की शिकायतें आईं। UIDAI का यह कदम इन जोखिमों को कम करेगा। मिनिस्ट्री ने कहा कि डेटाबेस को अपडेट रखने के लिए नियमित फीड्स लिए जा रहे हैं। भविष्य में बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों के साथ साझेदारी बढ़ाई जाएगी, ताकि मौत की जानकारी तुरंत मिल सके। इससे फाइनेंशियल फ्रॉड भी रुकेगा।

परिवारों के लिए प्रक्रिया सरल बनाई गई है। जनवरी 2025 में myAadhaar पोर्टल पर 'रिपोर्टिंग ऑफ डेथ ऑफ ए फैमिली मेंबर' सुविधा शुरू की गई। यह 25 राज्यों और यूनियन टेरिटरीज में लागू है, जहां सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) से मौतें दर्ज होती हैं। उपयोग करने के लिए परिवार का सदस्य पोर्टल पर लॉगिन करे, मृतक का आधार नंबर, डेथ रजिस्ट्रेशन नंबर और बेसिक डिटेल्स सबमिट करे। UIDAI वेरिफिकेशन के बाद डीएक्टिवेशन करता है। मौत का सर्टिफिकेट स्थानीय रजिस्ट्रार से प्राप्त करना जरूरी है। अगर गलती से कोई जीवित व्यक्ति का नंबर डीएक्टिवेट हो गया, तो रीएक्टिवेशन की प्रक्रिया है। इसके लिए प्रमाण-पत्र जमा कर आवेदन करें। UIDAI ने कहा कि वेरिफिकेशन के बिना कोई कार्रवाई नहीं होती।

इस अभियान की शुरुआत 2024 में हुई, जब UIDAI ने पायलट प्रोजेक्ट चलाया। जुलाई 2025 तक 1.17 करोड़ नंबर बंद हुए। सितंबर में यह 1.4 करोड़ हो गया। अब नवंबर के अंत तक 2 करोड़ का आंकड़ा पार हो गया। UIDAI का लक्ष्य साल के अंत तक इसे और बढ़ाना है। राज्य स्तर पर भी जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे बड़े राज्यों में ग्रामीण क्षेत्रों में कैंप लगाए गए। वहां परिवारों को पोर्टल का उपयोग सिखाया जा रहा है। मिनिस्ट्री ने कहा कि यह डेटा प्राइवेसी को मजबूत करेगा। आधार एक्ट के तहत बायोमेट्रिक डेटा सुरक्षित है, लेकिन अपडेटेड डेटाबेस से दुरुपयोग रुकेगा।

सोशल मीडिया पर इस खबर ने चर्चा छेड़ दी। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर AadhaarCleanup ट्रेंड हुआ। कई यूजर्स ने सराहना की, कहा कि यह फ्रॉड रोकने का अच्छा कदम है। एक पोस्ट में लिखा, 'अंत में UIDAI ने सफाई शुरू की। अब पेंशन चोरों का क्या होगा?' लेकिन कुछ ने चिंता जताई कि ग्रामीण इलाकों में जागरूकता कम है। एक यूजर ने पूछा, 'अगर परिवार नहीं जानता तो नंबर कैसे डीएक्टिवेट होगा?' UIDAI ने जवाब दिया कि वे हेल्पलाइन 1940 पर सहायता दे रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह डिजिटल गवर्नेंस का उदाहरण है। लेकिन और सुधार की जरूरत है, जैसे सभी राज्यों में CRS को पूरी तरह लिंक करना।

यह कार्रवाई अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर डालेगी। सरकारी सब्सिडी का सही वितरण होगा, जिससे कल्याण योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ेगी। एक अनुमान के अनुसार, फर्जी क्लेम्स से सालाना 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान होता था। अब यह कम होगा। UIDAI ने परिवारों से अपील की कि मौत के बाद 30 दिनों में रिपोर्ट करें। पोर्टल पर आसान स्टेप्स हैं: लॉगिन, फॉर्म भरें, डॉक्यूमेंट अपलोड। अगर समस्या हो, तो नजदीकी आधार सेंटर जाएं। गलत डीएक्टिवेशन पर शिकायत दर्ज कराएं।

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