हरियाणा में 2779 पुरुषों की दो या उससे अधिक पत्नियां, नूंह ज़िला शीर्ष पर, सबसे ज़्यादा 353 मामले।

Haryana : हरियाणा सरकार की परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) योजना के तहत जुटाए गए आंकड़ों ने एक चौंकाने वाली जानकारी सामने लाई...

Aug 2, 2025 - 12:03
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हरियाणा में 2779 पुरुषों की दो या उससे अधिक पत्नियां, नूंह ज़िला शीर्ष पर, सबसे ज़्यादा 353 मामले।
हरियाणा में 2779 पुरुषों की दो या उससे अधिक पत्नियां, नूंह ज़िला शीर्ष पर, सबसे ज़्यादा 353 मामले।

Haryana : हरियाणा सरकार की परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) योजना के तहत जुटाए गए आंकड़ों ने एक चौंकाने वाली जानकारी सामने लाई है। राज्य में 2779 पुरुषों ने अपनी फैमिली आईडी में दो या उससे अधिक पत्नियों की जानकारी दर्ज की है। इनमें से सबसे अधिक मामले नूंह जिले से सामने आए हैं, जहां 353 पुरुषों ने अपने एकल परिवार में दो पत्नियों का जिक्र किया है। इस आंकड़े ने समाज में बहुपत्नी विवाह की स्थिति और सरकारी योजनाओं के डेटा संग्रह की प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े किए हैं। यह जानकारी स्वघोषित है, यानी लोगों ने स्वेच्छा से अपनी पत्नियों और बच्चों का ब्योरा दर्ज किया है। हरियाणा सरकार ने इस डेटा को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन पत्नियों की संख्या का सत्यापन नहीं किया जाता, जिसके कारण यह आंकड़े चर्चा का विषय बन गए हैं।

हरियाणा सरकार ने 2020 में परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) योजना शुरू की थी, जिसका मकसद राज्य के सभी परिवारों का प्रामाणिक और सत्यापित डेटा तैयार करना है। इस योजना के तहत प्रत्येक परिवार को एक आठ अंकों की विशिष्ट फैमिली आईडी दी जाती है। यह आईडी जन्म, मृत्यु और विवाह जैसे महत्वपूर्ण जीवन घटनाओं के रिकॉर्ड के साथ जोड़ी जाती है ताकि डेटा स्वचालित रूप से अपडेट हो सके। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं और सेवाओं को पारदर्शी तरीके से जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाना है। इसके लिए परिवार के सभी सदस्यों, जैसे पति, पत्नी और बच्चों की जानकारी दर्ज करना अनिवार्य है। यह योजना हरियाणा में सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए अनिवार्य बन चुकी है, जिसके बिना पेंशन, राशन कार्ड, या अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल सकता।

परिवार पहचान प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा में 2779 पुरुषों ने अपनी फैमिली आईडी में दो या उससे अधिक पत्नियों की जानकारी दी है। इसमें 2761 पुरुषों ने दो पत्नियों, 15 ने तीन पत्नियों, और तीन पुरुषों ने तीन से अधिक पत्नियों का जिक्र किया है। ये आंकड़े 29 जुलाई 2025 को सार्वजनिक किए गए और तब से यह चर्चा का विषय बने हुए हैं।

जिलेवार आंकड़ों की बात करें तो नूंह जिला इस मामले में सबसे आगे है, जहां 353 पुरुषों ने अपनी फैमिली आईडी में दो पत्नियों की जानकारी दी है। इसके बाद फरीदाबाद में 267, पलवल में 178, और करनाल में 171 मामले दर्ज किए गए हैं। अन्य जिलों में भी यह संख्या उल्लेखनीय है, जैसे गुरुग्राम में 157, हिसार में 152, जींद में 147, सोनीपत में 134, और पानीपत में 129 पुरुषों ने दो पत्नियों का ब्योरा दिया है। इसके अलावा, भिवानी, फरीदाबाद, और करनाल जैसे जिलों में कुछ पुरुषों ने तीन पत्नियों की जानकारी भी दी है।

परिवार पहचान प्राधिकरण के स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. सतीश खोला ने स्पष्ट किया कि फैमिली आईडी एक धर्मनिरपेक्ष प्रणाली है, जिसमें धर्म से संबंधित कोई कॉलम नहीं है। हालांकि, सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए जाति और आय का सत्यापन अनिवार्य है। पत्नियों और बच्चों की जानकारी का कोई औपचारिक सत्यापन नहीं किया जाता, और यह डेटा पूरी तरह से व्यक्तियों द्वारा दी गई स्वघोषित जानकारी पर आधारित है। इसका मतलब है कि लोग जो जानकारी दर्ज करते हैं, उसे सही मान लिया जाता है। इस प्रक्रिया ने बहुपत्नी विवाह के इन आंकड़ों को सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन सत्यापन की कमी के कारण इन आंकड़ों की सटीकता पर सवाल भी उठ रहे हैं।

नूंह जिला, जो हरियाणा का एक पिछड़ा क्षेत्र माना जाता है, में बहुपत्नी विवाह के सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक कारकों को इसका कारण माना जा रहा है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि नूंह में सामुदायिक परंपराएं और कम जागरूकता इस प्रथा को बढ़ावा दे सकती हैं। हालांकि, यह डेटा पूरी तरह से स्वघोषित है, इसलिए यह जरूरी नहीं कि यह क्षेत्र में बहुपत्नी विवाह की पूरी तस्वीर को दर्शाता हो। नूंह में 353 पुरुषों ने दो पत्नियों और एक व्यक्ति ने तीन पत्नियों की जानकारी दी है।

भारत में बहुपत्नी विवाह को लेकर कानून अलग-अलग समुदायों के लिए अलग-अलग हैं। हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत हिंदुओं के लिए बहुपत्नी विवाह गैरकानूनी है, और इसे आपराधिक कृत्य माना जाता है। हालांकि, कुछ समुदायों में, खासकर जहां व्यक्तिगत कानून लागू होते हैं, बहुपत्नी विवाह की अनुमति हो सकती है। हरियाणा में फैमिली आईडी के आंकड़ों ने इस मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह डेटा सामाजिक जागरूकता और कानूनी सुधारों की जरूरत को दर्शाता है।

परिवार पहचान प्राधिकरण ने यह स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य केवल डेटा एकत्र करना है, न कि किसी की निजी जिंदगी में हस्तक्षेप करना। फिर भी, इन आंकड़ों ने समाज में बहुपत्नी विवाह की प्रथा पर नई बहस छेड़ दी है। कुछ लोग इसे सामाजिक पिछड़ेपन का संकेत मानते हैं, जबकि अन्य का कहना है कि यह व्यक्तिगत पसंद और सांस्कृतिक परंपराओं का मामला है।

हरियाणा सरकार ने सभी कल्याणकारी योजनाओं को फैमिली आईडी से जोड़ दिया है। इसके तहत राशन कार्ड, पेंशन, छात्रवृत्ति, और अन्य सरकारी लाभ लेने के लिए फैमिली आईडी अनिवार्य है। इस प्रणाली ने भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने में मदद की है। उदाहरण के लिए, 2023 में परिवार पहचान पत्र की मदद से ग्रुप डी भर्ती परीक्षा में अपात्र उम्मीदवारों द्वारा अतिरिक्त अंक मांगने के मामले पकड़े गए। इस योजना ने सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये की बचत भी कराई है।

हालांकि, फैमिली आईडी में गलत जानकारी, जैसे आय या जन्म तिथि में त्रुटियां, की शिकायतें भी सामने आई हैं। सरकार ने इसके लिए सुधार प्रक्रिया शुरू की है, जिसमें जन्म प्रमाणपत्र, दसवीं का सर्टिफिकेट, या मतदाता पहचान पत्र जैसे दस्तावेजों के आधार पर डेटा ठीक किया जा सकता है।

फरवरी 2025 में हरियाणा सरकार ने पीपीपी से जुड़े नियमों में बदलाव किया। अब उन परिवारों की फैमिली आईडी रद्द की जा सकती है, जो हरियाणा छोड़कर दूसरे राज्य में चले गए हैं या जिनके सभी सदस्य जीवित नहीं हैं। इसके अलावा, डेटा की गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए गैर-सरकारी कार्यों के लिए पीपीपी डेटा साझा करने पर रोक लगा दी गई है। केवल सरकारी योजनाओं, सब्सिडी, और भर्ती प्रक्रियाओं के लिए ही डेटा का उपयोग हो सकता है।

हरियाणा की परिवार पहचान पत्र योजना ने न केवल सरकारी योजनाओं को पारदर्शी बनाया है, बल्कि सामाजिक रुझानों को समझने में भी मदद की है। 2779 पुरुषों द्वारा दो या अधिक पत्नियों की जानकारी देना एक ऐसी हकीकत को सामने लाता है, जो समाज में अभी भी मौजूद है।

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