Kanwar Yatra 2025: दिल्ली में कांवड़ यात्रा के दौरान मीट और मछली की दुकानें बंद- सावन में धार्मिक भावनाओं का सम्मान, सरकार देगी शिविरों को आर्थिक मदद।
Sawaan 2025: दिल्ली सरकार और नगर निगम (MCD) ने सावन महीने में कांवड़ यात्रा के दौरान बड़ा फैसला लिया है। 11 जुलाई से 25 जुलाई 2025 तक कांवड़ यात्रा...
दिल्ली के संस्कृति और पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने 8 जुलाई 2025 को घोषणा की कि कांवड़ यात्रा के दौरान, जो 11 जुलाई से 25 जुलाई तक चलेगी, दिल्ली में यात्रा मार्गों पर मीट और मछली की दुकानें बंद रहेंगी। यह फैसला दिल्ली सरकार और MCD ने मिलकर लिया है, ताकि कांवड़ियों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान हो और यात्रा सुचारू रूप से संपन्न हो। मिश्रा ने कहा, “दिल्ली में हर साल 2.5 से 3 करोड़ कांवड़िए यात्रा में हिस्सा लेते हैं। अधिकांश मीट की दुकानें अवैध हैं, और इन्हें बंद करना धार्मिक सौहार्द के लिए जरूरी है।”
हालांकि, MCD ने 10 जुलाई 2025 को स्पष्ट किया कि दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 के तहत दुकानें बंद करने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। MCD ने कहा कि दुकानदारों से स्वेच्छा से दुकानें बंद करने का अनुरोध किया जाएगा, खासकर उन दुकानों से जो यात्रा मार्गों पर हैं। दिल्ली मेयर राजा इकबाल सिंह ने कहा, “हम दुकानदारों से धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए अपनी दुकानें बंद करने की अपील करेंगे। बिना वैध लाइसेंस वाली दुकानों को किसी भी हाल में चलने नहीं दिया जाएगा।”
कांवड़ यात्रा सावन महीने में होने वाली एक प्रमुख हिंदू तीर्थयात्रा है, जिसमें लाखों शिवभक्त हरिद्वार, गंगोत्री, और अन्य पवित्र स्थानों से गंगा जल लेकर पैदल अपने गंतव्य पर स्थित शिव मंदिरों में जल चढ़ाते हैं। यह यात्रा दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, और राजस्थान जैसे राज्यों से गुजरती है। दिल्ली में मुख्य मार्गों में अप्सरा बॉर्डर, दिलशाद गार्डन, सीलमपुर, शास्त्री पार्क, कश्मीरी गेट, और करोल बाग शामिल हैं। इस साल यात्रा 11 जुलाई से शुरू होकर 25 जुलाई तक चलेगी, और अनुमान है कि 2.5 से 3 करोड़ कांवड़िए दिल्ली से गुजरेंगे।
कांवड़ यात्रा के दौरान धार्मिक भावनाएं बहुत संवेदनशील होती हैं, क्योंकि श्रद्धालु मांसाहार और शराब से परहेज करते हैं। इसीलिए दिल्ली सरकार ने यात्रा मार्गों पर मीट और मछली की दुकानें बंद करने का फैसला लिया, ताकि कोई विवाद न हो और यात्रा की पवित्रता बनी रहे। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में पहले से ही इस तरह का नियम लागू है, और दिल्ली ने भी इसे अपनाने का निर्णय लिया।
- MCD का रुख और दुकानदारों की प्रतिक्रिया
MCD ने स्पष्ट किया कि कानूनी रूप से दुकानें बंद करने का आदेश नहीं दिया जा सकता, लेकिन धार्मिक सौहार्द के लिए दुकानदारों से सहयोग की अपील की जाएगी। पिछले कुछ वर्षों में देखा गया है कि कई दुकानदार स्वेच्छा से अपनी दुकानें बंद कर देते हैं। MCD ने यह भी निर्देश दिया है कि यात्रा मार्गों पर मीट की दुकानों को ढककर रखा जाए, ताकि श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत न हों।
हालांकि, कुछ दुकानदारों ने इस फैसले पर चिंता जताई है। दिल्ली के एक मीट दुकानदार विवेक कुमार ने कहा, “हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं, लेकिन सरकार को धार्मिक आयोजनों के साथ कारोबार को नहीं जोड़ना चाहिए। यह एक दिन का उत्सव नहीं है, बल्कि कई दिनों तक चलता है। हमारी दुकानें बंद रहने से परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी।” दुकानदारों का कहना है कि सरकार को वैकल्पिक उपाय, जैसे आर्थिक सहायता, देनी चाहिए।
- सरकार और MCD की तैयारियां
दिल्ली सरकार और MCD ने कांवड़ यात्रा को ऐतिहासिक बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की हैं। कपिल मिश्रा ने अप्सरा बॉर्डर से करोल बाग तक यात्रा मार्गों का निरीक्षण किया और कई व्यवस्थाओं की घोषणा की:
शिविर और सुविधाएं: दिल्ली में 25 कांवड़ शिविर स्थापित किए गए हैं, जहां 22 डॉक्टर नियमित शिफ्ट में और 10 डॉक्टर ऑन-कॉल उपलब्ध रहेंगे। 12 मोबाइल डेंटल वैन भी तैनात की गई हैं।
आर्थिक सहायता: कांवड़ समितियों को 50,000 से 10 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद दी जाएगी, जिसमें 50% राशि पहले और बाकी यात्रा के बाद दी जाएगी।
मुफ्त बिजली: प्रत्येक शिविर को 1,200 यूनिट मुफ्त बिजली दी जाएगी।
स्वागत व्यवस्था: यात्रा मार्गों पर भव्य स्वागत द्वार बनाए जाएंगे, और कांवड़ियों पर फूलों की वर्षा की जाएगी।
साफ-सफाई और ट्रैफिक: साफ-सफाई के लिए अतिरिक्त कर्मचारी और उपकरण तैनात किए गए हैं। सड़कों पर पानी के जमाव को रोकने के लिए वाटर टैंकर और सक्शन मशीनें रखी गई हैं। दिल्ली पुलिस ने अप्सरा बॉर्डर से राजोकरी बॉर्डर, भोपुरा से सिंघु और टीकरी बॉर्डर, और अन्य मार्गों पर ट्रैफिक व्यवस्था सुनिश्चित की है।
मिश्रा ने कहा, “दिल्ली सावन के उत्सव में डूबने के लिए तैयार है। इस बार का स्वागत ऐतिहासिक होगा।” उन्होंने चार विधायकों—अनिल शर्मा, तिलक राम गुप्ता, संजय गोयल, और प्रद्युम्न राजपूत—के साथ एक संयुक्त निरीक्षण दल भी बनाया है, जो यात्रा की व्यवस्थाओं पर नजर रखेगा।
इस फैसले को लेकर दिल्ली में सियासत तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद एसटी हसन ने उत्तर प्रदेश में मीट दुकानों पर प्रतिबंध की तुलना में शराब की बिक्री को अनुमति देने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “मांस और शराब दोनों ही यात्रा की पवित्रता को प्रभावित करते हैं। अगर मीट दुकानें बंद हैं, तो शराब की दुकानों को भी बंद करना चाहिए।” उन्होंने इसे भेदभावपूर्ण नीति बताया।
X पर कई यूजर्स ने इस फैसले का समर्थन किया। एक यूजर ने लिखा, “कांवड़ियों की आस्था का सम्मान करना जरूरी है। यह फैसला सही है।” हालांकि, कुछ यूजर्स ने इसे दुकानदारों के लिए अन्यायपूर्ण बताया। ये पोस्ट्स लोगों की भावनाओं को दर्शाती हैं, लेकिन तथ्यों की पुष्टि के लिए विश्वसनीय नहीं हैं।
भाजपा विधायक तरविंदर सिंह मारवाह ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर शराब और मीट दुकानों को अस्थायी रूप से बंद करने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि इससे यात्रा की पवित्रता बनी रहेगी और कोई अप्रिय घटना नहीं होगी।
यह पहली बार है जब दिल्ली में कांवड़ यात्रा के लिए मीट और मछली की दुकानों को बंद करने का निर्णय लिया गया है। हालांकि, MCD की स्पष्टता कि कोई कानूनी प्रावधान नहीं है, ने इस फैसले को विवादास्पद बना दिया है। 2024 में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में इसी तरह के निर्देशों को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था, जब उसने कहा था कि दुकानदारों को अपने नाम प्रदर्शित करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, हालांकि वे बेचे जाने वाले खाने की जानकारी दे सकते हैं।
कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला धार्मिक सौहार्द को बढ़ावा दे सकता है, लेकिन यह दुकानदारों की आजीविका को प्रभावित कर सकता है। दिल्ली में मीट और मछली की दुकानों पर कई परिवार निर्भर हैं, और लंबे समय तक दुकानें बंद रहने से उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो सकती है। सरकार को ऐसे दुकानदारों के लिए आर्थिक सहायता या वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार करना चाहिए।
दिल्ली सरकार और MCD का कांवड़ यात्रा मार्गों पर मीट और मछली की दुकानें बंद करने का फैसला धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने की दिशा में एक कदम है। हालांकि, MCD ने स्पष्ट किया है कि यह स्वैच्छिक होगा, क्योंकि इसके लिए कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। सरकार ने कांवड़ियों के लिए भव्य स्वागत, शिविरों में सुविधाएं, और आर्थिक सहायता की व्यवस्था की है, ताकि यात्रा ऐतिहासिक और सुचारू हो। यह फैसला उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की तर्ज पर लिया गया है, लेकिन दुकानदारों की चिंताओं को भी संबोधित करना जरूरी है।
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