स्विगी डिलीवरी बॉय बना डिप्टी कलेक्टर, पढ़िए झारखंड की मिसाल बनी एक कामयाब इंसान की प्रेरणादायक कहानी। 

Jharkhand News: झारखंड के गिरिडीह जिले के एक छोटे से गांव कपिलो के सूरज यादव की कहानी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास का जीवंत उदाहरण....

Jul 30, 2025 - 12:38
 0  132
स्विगी डिलीवरी बॉय बना डिप्टी कलेक्टर, पढ़िए झारखंड की मिसाल बनी एक कामयाब इंसान की प्रेरणादायक कहानी। 
स्विगी डिलीवरी बॉय बना डिप्टी कलेक्टर, पढ़िए झारखंड की मिसाल बनी एक कामयाब इंसान की प्रेरणादायक कहानी। 

झारखंड के गिरिडीह जिले के एक छोटे से गांव कपिलो के सूरज यादव की कहानी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास का जीवंत उदाहरण है। आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी के बावजूद सूरज ने स्विगी और रैपिडो में डिलीवरी बॉय के रूप में काम करते हुए अपनी पढ़ाई जारी रखी और झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2023 पास कर डिप्टी कलेक्टर बनने का सपना पूरा किया। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार और गांव का नाम रोशन किया, बल्कि हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर उभरी है। सूरज की कहानी यह साबित करती है कि अगर इरादे पक्के हों, तो कोई भी मुश्किल सपनों को रोक नहीं सकती।

सूरज यादव का जन्म गिरिडीह के बिरनी प्रखंड के सरकी टोला गांव में हुआ था। उनके पिता द्वारिका प्रसाद यादव एक राज मिस्त्री हैं, जो रोजाना मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि कई बार दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो जाता था। सूरज की मां एक गृहिणी हैं, जिन्होंने हमेशा अपने बच्चों को बेहतर भविष्य के लिए प्रोत्साहित किया। सूरज ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के एक सरकारी स्कूल से पूरी की। बचपन से ही पढ़ाई में होनहार सूरज का सपना सरकारी अधिकारी बनने का था, लेकिन आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी ने उनके सामने कई चुनौतियां खड़ी कीं।

स्कूल के बाद सूरज ने रांची के एक कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इस दौरान उन्हें अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ा। किताबें, कोचिंग और अन्य खर्चों के लिए उनके पास पर्याप्त पैसे नहीं थे। लेकिन सूरज ने हार नहीं मानी और अपने सपने को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत शुरू की।

  • स्विगी और रैपिडो में काम

पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए सूरज ने रांची में स्विगी और रैपिडो जैसी डिलीवरी कंपनियों में काम शुरू किया। शुरुआत में उनके पास अपनी बाइक तक नहीं थी। इस मुश्किल समय में उनके दोस्तों, राजेश नायक और संदीप मंडल, ने उनकी मदद की। दोनों दोस्तों ने अपनी स्कॉलरशिप का पैसा देकर सूरज को एक सेकेंड-हैंड बाइक खरीदने में सहायता की। इस बाइक की मदद से सूरज ने रोजाना 5 से 6 घंटे डिलीवरी का काम किया और बाकी समय पढ़ाई के लिए निकाला।

सूरज का दिनचर्या बेहद कठिन था। वह सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई करते, फिर दिन में डिलीवरी का काम करते और रात को फिर से किताबें खोलकर पढ़ाई में जुट जाते। इस दौरान उनकी बहन और पत्नी ने भी उनका पूरा साथ दिया। सूरज की पत्नी ने घर की जिम्मेदारियां संभालीं, ताकि वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे सकें। उनकी बहन ने भी उन्हें प्रोत्साहित किया और मुश्किल समय में हौसला बढ़ाया। सूरज ने बताया कि परिवार और दोस्तों का साथ उनकी सबसे बड़ी ताकत था।

  • JPSC की तैयारी और चुनौतियां

सूरज ने JPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए किसी महंगी कोचिंग का सहारा नहीं लिया। उन्होंने सेल्फ-स्टडी और ऑनलाइन संसाधनों का उपयोग किया। यूट्यूब पर उपलब्ध मुफ्त कोचिंग वीडियो, खासकर ‘डीएसपी की पाठशाला’ जैसे चैनलों ने उनकी तैयारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सूरज ने बताया कि वह रोजाना 8 से 10 घंटे पढ़ाई करते थे और सिलेबस के अनुसार अपनी रणनीति बनाते थे। वह अखबार पढ़कर सामान्य ज्ञान को मजबूत करते और पिछले सालों के प्रश्नपत्र हल करके अपनी तैयारी का आकलन करते।

परीक्षा के दौरान सूरज को कई बार आर्थिक और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा। डिलीवरी के काम में कई बार ग्राहकों के गलत व्यवहार और समय की कमी ने उन्हें परेशान किया। लेकिन सूरज ने इन सभी चुनौतियों को अपने लक्ष्य के सामने छोटा समझा। इंटरव्यू के दौरान जब उनसे डिलीवरी के काम से जुड़े तकनीकी सवाल पूछे गए, तो सूरज ने इतने आत्मविश्वास और सटीकता से जवाब दिए कि परीक्षकों का शक यकीन में बदल गया। उनकी इस स्पष्टता और मेहनत ने उन्हें डिप्टी कलेक्टर के पद तक पहुंचाया।

  • JPSC में सफलता

29 जुलाई 2025 को JPSC ने 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा 2023 का परिणाम घोषित किया। इस परीक्षा में कुल 342 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की, जिनमें सूरज यादव का नाम भी शामिल था। सूरज ने डिप्टी कलेक्टर के पद के लिए चयनित होकर अपने गांव और जिले का नाम रोशन किया। उनकी इस उपलब्धि पर गिरिडीह में खुशी का माहौल छा गया। स्थानीय लोगों ने उनके घर पर जाकर बधाई दी और उनके संघर्ष की कहानी को प्रेरणादायक बताया।

सूरज की सफलता की खबर सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हुई। कई लोगों ने उनकी कहानी को साझा करते हुए लिखा कि सूरज ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी परिस्थिति सपनों को रोक नहीं सकती। सूरज ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार, दोस्तों और अपनी मेहनत को दिया। उन्होंने कहा, “मेरे लिए यह केवल एक नौकरी नहीं है, बल्कि अपने गांव और समाज के लिए कुछ करने का मौका है।”

सूरज की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो आर्थिक तंगी या संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों को छोड़ देते हैं। सूरज ने दिखाया कि मेहनत और लगन से हर मुश्किल को पार किया जा सकता है। उनकी कहानी यह भी बताती है कि दोस्तों और परिवार का साथ कितना महत्वपूर्ण होता है। सूरज ने कहा, “मेरे दोस्तों ने मेरी बाइक खरीदने में मदद की, और मेरे परिवार ने मुझे कभी हार मानने नहीं दिया। यह मेरी अकेले की जीत नहीं है, बल्कि उन सभी की जीत है, जिन्होंने मुझ पर भरोसा किया।”

गिरिडीह के कई अन्य युवाओं ने भी इस परीक्षा में सफलता हासिल की, जिससे जिले में उत्साह का माहौल है। सूरज की तरह ही, इन युवाओं ने कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई करके अपने सपनों को साकार किया। सूरज अब अपने गांव के लिए एक रोल मॉडल बन गए हैं और युवाओं को प्रोत्साहित करते हैं कि वे पढ़ाई पर ध्यान दें और कड़ी मेहनत करें।

डिप्टी कलेक्टर बनने के बाद सूरज का सपना अपने क्षेत्र के विकास में योगदान देना है। वह चाहते हैं कि उनके गांव और जिले के बच्चों को बेहतर शिक्षा और संसाधन मिलें, ताकि वे भी अपने सपनों को पूरा कर सकें। सूरज ने यह भी बताया कि वह यूपीएससी की परीक्षा में एक बार और कोशिश करना चाहते हैं, क्योंकि उनका अंतिम लक्ष्य भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में शामिल होना है। उन्होंने कहा, “मैंने अभी तक जो हासिल किया है, वह मेरे लिए बहुत बड़ा है, लेकिन मैं और आगे जाना चाहता हूं।”

सूरज ने युवाओं को सलाह दी कि वे अपनी पढ़ाई में नियमितता बनाए रखें और छोटी-छोटी असफलताओं से हार न मानें। उन्होंने कहा, “पढ़ाई के लिए समय और संसाधन की कमी हो सकती है, लेकिन अगर आप मेहनत करते हैं, तो सफलता जरूर मिलती है।”

सूरज की कहानी ने न केवल उनके गांव, बल्कि पूरे झारखंड में एक सकारात्मक संदेश फैलाया है। उनकी सफलता ने यह दिखाया कि ग्रामीण क्षेत्रों के युवा भी कठिन परिस्थितियों में बड़े मुकाम हासिल कर सकते हैं। झारखंड सरकार और स्थानीय प्रशासन ने भी सूरज की उपलब्धि की सराहना की है। गिरिडीह के जिला अधिकारी ने सूरज को बधाई देते हुए कहा कि उनकी कहानी अन्य युवाओं को प्रेरित करेगी।

सूरज की कहानी सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है। कई लोग उनकी मेहनत और लगन की तारीफ कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “सूरज ने दिखा दिया कि स्कूटी से डिलीवरी करने वाला भी अफसर बन सकता है। यह झारखंड की मिसाल है।” इस तरह की प्रतिक्रियाएं दर्शाती हैं कि सूरज की कहानी ने लोगों के दिलों को छू लिया है।

सूरज यादव की कहानी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास की जीत है। एक छोटे से गांव से निकलकर, आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी के बावजूद, सूरज ने स्विगी और रैपिडो में डिलीवरी का काम करते हुए अपनी पढ़ाई पूरी की और JPSC परीक्षा पास कर डिप्टी कलेक्टर बने।

Also Read- Special: इश्क या साजिश? 5 साल में 785 पतियों की हत्या, पत्नियों की बेवफाई और प्रेम ने लिया खौफनाक मोड़।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow