ऑपरेशन सिंदूर और सीजफायर: पीएम मोदी ने ट्रंप के दावों पर दिया जबाव, राहुल गांधी ने कहा कि झूठ .....

Political News: पाकिस्तान के साथ हाल के सैन्य तनाव और सीजफायर को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बार-बार किए गए दावों ने...

Jul 30, 2025 - 12:51
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ऑपरेशन सिंदूर और सीजफायर: पीएम मोदी ने ट्रंप के दावों पर दिया जबाव, राहुल गांधी ने कहा कि झूठ .....
ऑपरेशन सिंदूर और सीजफायर: पीएम मोदी ने ट्रंप के दावों पर दिया जबाव, राहुल गांधी ने कहा कि झूठ .....

Political News: पाकिस्तान के साथ हाल के सैन्य तनाव और सीजफायर को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बार-बार किए गए दावों ने भारत में राजनीतिक बहस को जन्म दिया है। ट्रंप ने कई बार दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए सीजफायर में मध्यस्थता की थी। इस पर विपक्ष, खासकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखे सवाल उठाए। राहुल गांधी ने संसद में कहा कि अगर ट्रंप का दावा झूठा है, तो पीएम मोदी को स्पष्ट रूप से कहना चाहिए कि ट्रंप झूठ बोल रहे हैं। जवाब में, 29 जुलाई 2025 को लोकसभा में बोलते हुए पीएम मोदी ने साफ किया कि दुनिया के किसी भी नेता ने भारत के ऑपरेशन सिंदूर को रोकने के लिए नहीं कहा था।

ऑपरेशन सिंदूर भारत की सशस्त्र सेनाओं द्वारा 7 मई 2025 को शुरू किया गया एक सैन्य अभियान था। यह अभियान जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया, जिसमें 26 लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे। भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद को जिम्मेदार ठहराया। हमले के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आतंकी ठिकानों पर हवाई और जमीनी हमले किए। इस अभियान में नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट किया गया और करीब 100 आतंकवादियों के मारे जाने की खबर थी।

पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए भारत के सैन्य और नागरिक ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। चार दिन तक चले इस तनाव के बाद 10 मई 2025 को दोनों देशों ने सीजफायर पर सहमति जताई। भारत का कहना है कि यह सीजफायर दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों (डीजीएमओ) के बीच सीधी बातचीत के बाद हुआ, जो पाकिस्तान की पहल पर था।

  • ट्रंप के दावे और भारत का जवाब

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 10 मई 2025 को दावा किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर उनकी मध्यस्थता और व्यापार बंद करने की धमकी के कारण हुआ। उन्होंने अपनी सोशल मीडिया साइट ट्रुथ सोशल पर लिखा, “लंबी रात की बातचीत के बाद, जिसमें अमेरिका ने मध्यस्थता की, भारत और पाकिस्तान ने तत्काल और पूर्ण सीजफायर पर सहमति जताई है। दोनों देशों को बधाई।” इसके बाद ट्रंप ने कई मौकों पर, कम से कम 20 बार, यह दावा दोहराया कि उनकी मध्यस्थता और व्यापारिक दबाव ने दोनों देशों को युद्ध रोकने के लिए मजबूर किया।

भारत ने इन दावों को बार-बार खारिज किया। विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने 18 जून 2025 को एक बयान में कहा कि पीएम मोदी ने ट्रंप के साथ 35 मिनट की फोन कॉल में साफ किया कि सीजफायर के लिए कोई अमेरिकी मध्यस्थता नहीं थी। मिश्री ने बताया कि मोदी ने ट्रंप को स्पष्ट किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य कार्रवाई को रोकने की बातचीत दोनों देशों के सैन्य चैनलों के माध्यम से हुई थी, और यह पाकिस्तान की पहल पर था। भारत ने यह भी कहा कि इस दौरान अमेरिका के साथ कोई व्यापारिक सौदे या कश्मीर मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई।

29 जुलाई 2025 को लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर बहस के दौरान पीएम मोदी ने फिर दोहराया, “दुनिया के किसी भी नेता ने भारत से ऑपरेशन सिंदूर को रोकने के लिए नहीं कहा।” उन्होंने बताया कि 9 मई की रात को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने उन्हें फोन कर पाकिस्तान के संभावित बड़े हमले की चेतावनी दी थी। मोदी ने जवाब में कहा कि अगर पाकिस्तान ऐसा करता है, तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ट्रंप के दावों को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। 19 जुलाई 2025 को राहुल ने ट्रंप के एक बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पांच जेट विमान मार गिराए गए थे। राहुल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मोदी जी, पांच विमानों का सच क्या है? देश को जानने का हक है!” उन्होंने 29 जुलाई को लोकसभा में कहा कि अगर ट्रंप का दावा गलत है, तो पीएम मोदी को संसद में खुलकर कहना चाहिए कि ट्रंप झूठ बोल रहे हैं।

राहुल ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सैन्य बलों के हाथ बांध दिए थे। उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के एक बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत ने 7 मई को रात 1:35 बजे पाकिस्तान को फोन कर बताया कि हम गैर-सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहे हैं और तनाव नहीं बढ़ाना चाहते। राहुल ने इसे सैन्य रणनीति की कमजोरी करार दिया।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भी सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने 73 दिनों में 25 बार सीजफायर का श्रेय लिया, लेकिन पीएम मोदी ने इसका खंडन करने में देरी की। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी पूछा कि क्या वाकई पांच जेट विमान मार गिराए गए, और सरकार को इस पर स्पष्टता देनी चाहिए।

लोकसभा में अपने भाषण में पीएम मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर को भारत की सैन्य ताकत और आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि पहलगाम हमले का मकसद धार्मिक आधार पर तनाव पैदा करना था, और भारत ने इसका जवाब आतंकी ठिकानों को नष्ट करके दिया। मोदी ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारत से सीजफायर की गुहार लगाई थी, क्योंकि भारत की कार्रवाई ने उनके आतंकी ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया था।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी संसद में कहा कि 22 अप्रैल से 17 जून तक पीएम मोदी और ट्रंप के बीच कोई फोन कॉल नहीं हुई थी। उन्होंने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए कहा कि सीजफायर की बातचीत भारत और पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों के बीच हुई थी।

पाकिस्तान ने भी ट्रंप के मध्यस्थता के दावों को खारिज किया। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने मई 2025 में कहा कि सीजफायर भारत के डीजीएमओ के साथ उनकी पहल पर हुआ था, और इसमें अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी। हालांकि, पाकिस्तान ने दावा किया कि उसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तीन राफेल विमान मार गिराए, लेकिन इसके लिए कोई सबूत नहीं दिया।

ट्रंप के दावों और भारत के खंडन ने कई सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार की चुप्पी और देरी से जवाब देने की रणनीति भारत की कूटनीतिक स्थिति को कमजोर करती है। राहुल गांधी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत को अंतरराष्ट्रीय समर्थन नहीं मिला, जिसे उन्होंने विदेश नीति की विफलता बताया।

दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद के खिलाफ भारत की मजबूत नीति का प्रतीक है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने हमेशा आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है, और ऑपरेशन सिंदूर इसका उदाहरण है।

ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद हुए सीजफायर को लेकर भारत और अमेरिका के बीच मतभेद ने एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म दिया है। ट्रंप के बार-बार दावों ने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और सैन्य रणनीति पर सवाल उठाए, जिनका जवाब पीएम मोदी और उनकी सरकार ने संसद में दिया। राहुल गांधी और विपक्ष ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाकर सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की। 

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