Andaman: बेरन द्वीप के सक्रिय ज्वालामुखी में आठ दिनों के अंतराल पर दो हल्के विस्फोट, कोई खतरा नहीं।

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के बेरन द्वीप पर स्थित भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी फिर से गरजा है। पिछले आठ दिनों के भीतर यहां दो बार हल्के विस्फोट हुए हैं। ये विस्फोट

Sep 24, 2025 - 14:36
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Andaman: बेरन द्वीप के सक्रिय ज्वालामुखी में आठ दिनों के अंतराल पर दो हल्के विस्फोट, कोई खतरा नहीं।
बेरन द्वीप के सक्रिय ज्वालामुखी में आठ दिनों के अंतराल पर दो हल्के विस्फोट, कोई खतरा नहीं।

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के बेरन द्वीप पर स्थित भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी फिर से गरजा है। पिछले आठ दिनों के भीतर यहां दो बार हल्के विस्फोट हुए हैं। ये विस्फोट 13 सितंबर और 20 सितंबर को दर्ज किए गए। दोनों ही घटनाएं मामूली स्तर की थीं, जिनमें लावा का हल्का प्रवाह और राख का उत्सर्जन देखा गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इससे आसपास के क्षेत्रों या हवाई यात्रा पर कोई खतरा नहीं है। बेरन द्वीप पोर्ट ब्लेयर से समुद्री रास्ते से लगभग 140 किलोमीटर दूर स्थित है। यह निर्जन द्वीप भारतीय और बर्मी टेक्टोनिक प्लेटों के जंक्शन पर बसा हुआ है। इसका कुल क्षेत्रफल करीब 8.34 वर्ग किलोमीटर है। निकटतम बसे हुए द्वीप स्वराज द्वीप (हेवलॉक) और नारकोडम द्वीप हैं, जो इससे 140 से 150 किलोमीटर दूर हैं। भारतीय नौसेना ने 20 सितंबर के विस्फोट का वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसमें लावा की नदी बहती हुई दिखाई दे रही है। यह घटना वैज्ञानिकों के लिए रोचक है, लेकिन आम लोगों के लिए चिंता का विषय नहीं।

बेरन द्वीप का ज्वालामुखी स्ट्रोम्बोलियन प्रकार का है, जो हल्के लेकिन लगातार विस्फोट करता रहता है। 13 सितंबर को पहला विस्फोट हुआ, जिसमें राख के गुबार निकले। इसके सात दिन बाद 20 सितंबर को दूसरा विस्फोट हुआ, जो पहले से थोड़ा कम तीव्र था। अंडमान और निकोबार प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि ये विस्फोट ज्वालामुखी की सामान्य गतिविधि का हिस्सा हैं। वोल्कैनिक एक्सप्लोसिविटी इंडेक्स (वीईआई) के अनुसार, ये विस्फोट स्तर 2 के थे, जो हल्के श्रेणी में आते हैं। इसमें लावा का प्रवाह धीमा था और राख की ऊंचाई ज्यादा नहीं बढ़ी। भारतीय तटर रक्षक ने भी निगरानी बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि विस्फोट की तीव्रता घट रही है, लेकिन सतर्कता बरती जा रही है। सैटेलाइट डेटा से 25 सितंबर को राख उत्सर्जन और उत्तरी ढलान पर लावा या टेफ्रा की पुष्टि हुई। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह ज्वालामुखी कम तीव्रता वाली सक्रिय अवस्था में है। जुलाई 2025 में भी यहां गतिविधि देखी गई थी, जो इसकी सक्रियता को दर्शाती है।

यह ज्वालामुखी दक्षिण एशिया का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है। यह सुमात्रा से म्यांमार तक फैले ज्वालामुखीय चाप का हिस्सा है। द्वीप का व्यास करीब 3 किलोमीटर है और यह समुद्र तल से 2250 मीटर की गहराई से उभरा हुआ है। मुख्य क्रेटर की ऊंचाई 354 मीटर है। यहां की मिट्टी काली और उपजाऊ है, लेकिन कठोर परिस्थितियों के कारण घनी वनस्पति नहीं है। राख जमा होने से भूमि बंजर दिखती है। द्वीप पर कोई मानव बस्ती नहीं है, लेकिन कुछ जंगली जानवर जैसे बकरियां, चूहे, कबूतर और कीड़े-मकोड़े पाए जाते हैं। 1991 के विस्फोट ने स्थानीय पक्षियों की संख्या और प्रजातियों को कम कर दिया था। एक सर्वे में पाया गया कि 16 ज्ञात पक्षी प्रजातियों में से सिर्फ 6 बचीं। पायड इम्पीरियल पिजन सबसे अधिक संख्या में देखा गया। रात के सर्वे में एक चूहा प्रजाति और 51 प्रकार के कीड़े मिले। विस्फोट के बाद भी गैस उत्सर्जन जारी रहता है, जो पर्यावरण को प्रभावित करता है।

बेरन द्वीप का इतिहास रोचक है। पहला दर्ज विस्फोट 1787 में हुआ था। इसके बाद 1789, 1803-04 में गतिविधि देखी गई। 19वीं सदी में कई छोटे विस्फोट हुए। 1991 में यह 150 साल की शांति के बाद जागा, जो जानवरों के लिए हानिकारक साबित हुआ। 1994-95 में लगातार विस्फोट हुए। 2005-07 के विस्फोट 2004 के हिंद महासागर भूकंप से जुड़े माने जाते हैं। 2017 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशनोग्राफी (एनआईओ) की टीम ने जनवरी में राख उत्सर्जन देखा। वे 1.6 किलोमीटर दूर थे और 5-10 मिनट के छोटे एपिसोड नोट किए। दिन में राख बादल दिखे, रात में लाल लावा फव्वारे। 2022 में हल्के विस्फोट हुए। जुलाई 2024 में राख कॉलम दिखे। अब सितंबर 2025 के विस्फोट ने इसे फिर चर्चा में ला दिया। आर्गन-आर्गन डेटिंग से पता चला कि सबसे पुरानी लावा धाराएं 1.6 मिलियन साल पुरानी हैं। द्वीप महाद्वीपीय क्रस्ट पर नहीं, बल्कि 106 मिलियन साल पुरानी महासागरीय क्रस्ट पर स्थित है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह टेक्टोनिक प्लेटों के मूवमेंट से सक्रिय रहता है।

अंडमान प्रशासन ने पर्यटकों को द्वीप पर जाने से मना किया है। लैंडिंग निषिद्ध है। दूरी से ही देखा जा सकता है। निजी नाव या कैटामरन से घूमना पड़ता है। भारतीय नौसेना और तटर रक्षक नियमित निगरानी करते हैं। 1993 में बना लाइटहाउस विस्फोटों से नष्ट हो चुका है। वैज्ञानिक अध्ययन के लिए एनआईओ जैसी संस्थाएं सैंपल लेती रहती हैं। हाल के विस्फोटों से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। राख आसपास के समुद्र में फैली, लेकिन हवाई अड्डे या द्वीपों पर असर नहीं। विश्व स्तर पर 46 ज्वालामुखी लगातार सक्रिय हैं, लेकिन बेरन का विस्फोट शांतिपूर्ण रहा। स्मिथसोनियन इंस्टीट्यूट के ग्लोबल वोल्कैनिज्म प्रोग्राम ने इसे मॉनिटर किया। विशेषज्ञों का अनुमान है कि भविष्य में भी हल्के विस्फोट संभव हैं। यह ज्वालामुखी पृथ्वी की आंतरिक गतिविधियों का प्रमाण है।

ये विस्फोट पर्यावरण पर असर डालते हैं। राख से समुद्री जीवन प्रभावित होता है। लेकिन द्वीप की मिट्टी उपजाऊ बनती है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी कि अप्रत्याशित गतिविधि हो सकती है। प्रशासन ने सतर्कता बरतने को कहा। अंडमान में भूकंप भी आम हैं। हाल ही में 4.2 तीव्रता का झटका आया, जो ज्वालामुखी से जुड़ा माना जा रहा। नारकोडम द्वीप पर सुप्त ज्वालामुखी है। अल्कॉक और सेवेल जैसे समुद्री ज्वालामुखी भी हैं। बेरन की गतिविधि इनकी निगरानी बढ़ाती है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए वीडियो और फोटो शेयर किए जाते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने लोगों को आकर्षित किया। एक यूजर ने लिखा कि प्रकृति का चमत्कार देखने लायक है। लेकिन सुरक्षा पहले।

वैज्ञानिकों के अनुसार, ज्वालामुखी विस्फोट पृथ्वी की ऊर्जा रिलीज करते हैं। बेरन का स्थान टेक्टोनिक प्लेटों के कारण महत्वपूर्ण है। भारत सरकार ने यहां रिसर्च सेंटर स्थापित करने की योजना बनाई है। एनआईओ की टीम नियमित विजिट करती है। 2017 के विस्फोट में उन्होंने लावा सैंपल लिए। अब सितंबर 2025 के सैंपल विश्लेषण हो रहा। इससे ज्वालामुखी के इतिहास का पता चलेगा। द्वीप पर वनस्पति कम है, लेकिन कुछ पौधे अनुकूलित हैं। विस्फोट के बाद नई प्रजातियां आ सकती हैं। जानवरों की संख्या बढ़ाने के प्रयास हो रहे। पक्षी संरक्षण के लिए सर्वे होते हैं।

कुल मिलाकर, बेरन द्वीप के विस्फोट भारत की भूवैज्ञानिक विविधता को दर्शाते हैं। ये हल्के रहे, लेकिन सतर्कता जरूरी। अंडमान प्रशासन ने शांति बनाए रखने को कहा। वैज्ञानिक अध्ययन जारी है। उम्मीद है कि अगले विस्फोट सुरक्षित रहेंगे। यह प्रकृति का संदेश है कि पृथ्वी जीवित है।

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