यूपी में योगी कैबिनेट विस्तार की तेज हलचल, 2027 चुनावों से पहले आधा दर्जन नए मंत्रियों की एंट्री संभावित।
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी संगठन और सरकार दोनों स्तर पर बदलाव की प्रक्रिया
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी संगठन और सरकार दोनों स्तर पर बदलाव की प्रक्रिया में जुटी हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास पर 30 दिसंबर 2025 को बीजेपी कोर कमेटी की लंबी बैठक हुई जिसमें मंत्रिमंडल विस्तार, संगठन को मजबूत करने और आयोग-निगमों में नियुक्तियों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक तथा संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह सहित अन्य प्रमुख नेता शामिल हुए। बैठक करीब डेढ़ घंटे से अधिक समय तक चली जिसमें 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए रणनीति पर गहन मंथन हुआ। सूत्रों के अनुसार सबसे ज्यादा समय मंत्रिमंडल विस्तार पर चर्चा में लगा। वर्तमान में योगी सरकार में मुख्यमंत्री सहित 54 मंत्री हैं जबकि संवैधानिक नियमों के अनुसार अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इस तरह लगभग आधा दर्जन पद खाली हैं जिन्हें भरने की योजना बनाई गई है।
बैठक के बाद प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी देर रात दिल्ली रवाना हो गए। माना जा रहा है कि वे पार्टी हाईकमान के साथ चर्चा करेंगे और कोर कमेटी में हुई चर्चाओं तथा प्रस्तावों की जानकारी देंगे। दिल्ली से हरी झंडी मिलते ही मंत्रिमंडल विस्तार का ऐलान किसी भी समय हो सकता है। कुछ सूत्रों ने कहा कि जनवरी के तीसरे सप्ताह या मकर संक्रांति के बाद विस्तार लागू किया जा सकता है। विस्तार में नए चेहरों की एंट्री के साथ कुछ पुराने मंत्रियों की छुट्टी भी संभव है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी का नाम संभावित मंत्रियों की सूची में प्रमुखता से शामिल है। वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश और जाट समुदाय के प्रभावशाली नेता हैं। इसके अलावा क्षेत्रीय और जातीय संतुलन बनाने के लिए पश्चिमी यूपी, ब्रज और बुंदेलखंड से प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। वर्तमान में पूर्वांचल का प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत अधिक है।
यह विस्तार 2027 के चुनावों के लिए पार्टी की रणनीति का हिस्सा है। 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी को मिले परिणामों से सबक लेते हुए जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। विस्तार के बाद संगठन में भी बड़े स्तर पर फेरबदल की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। पार्टी का लक्ष्य राज्य में तीसरी बार सरकार बनाना है। कोर कमेटी की बैठक में संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल पर भी जोर दिया गया ताकि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाएं जनता तक प्रभावी रूप से पहुंच सकें। बैठक में आरएसएस के पदाधिकारियों की मौजूदगी भी रही जिससे निर्णयों में उनके विचारों का महत्व स्पष्ट है। विस्तार से पहले कुछ मंत्री पदों पर चर्चा तेज है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को फिर मंत्री बनाए जाने की संभावना मजबूत है। साथ ही अन्य प्रभावशाली नेताओं को जगह देने पर विचार चल रहा है। दिल्ली में अंतिम फैसला होने के बाद नामों का ऐलान होगा।
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