साल की आखिरी कैबिनेट बैठक में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के शामिल न होने से महाराष्ट्र की सियासत में हलचल।
महाराष्ट्र सरकार की साल की आखिरी कैबिनेट बैठक में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की गैरहाजिरी ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा को जन्म
31 दिसंबर 2025 को महाराष्ट्र सरकार की साल की आखिरी कैबिनेट बैठक में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की गैरहाजिरी ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा को जन्म दे दिया। यह बैठक मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई, जिसमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने थे, लेकिन शिंदे की कुर्सी खाली रही। इस अनुपस्थिति को महायुति गठबंधन में चल रही खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है, खासकर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) और अन्य निकाय चुनावों में सीट बंटवारे को लेकर। महायुति में शामिल भाजपा और शिंदे गुट की शिवसेना के बीच सीटों को लेकर लंबे समय से बातचीत चल रही थी, और दिसंबर महीने में यह मुद्दा कई बार सुर्खियों में रहा। शिंदे गुट ने BMC की 227 सीटों में से 100 से अधिक सीटों की मांग की थी, जबकि भाजपा शुरू में कम सीटें देने को तैयार थी। इस खींचतान के बीच कई बैठकों का दौर चला, जिसमें ठाणे, कल्याण-डोंबिवली, नवी मुंबई सहित अन्य महानगरपालिकाओं के लिए भी सीट बंटवारे पर चर्चा हुई। दिसंबर के अंतिम दिनों में दोनों दलों के बीच मैराथन बैठकों के बाद BMC में सीट बंटवारे पर सहमति बनी, जिसमें भाजपा को 137 सीटें और शिंदे गुट को 90 सीटें मिलीं।
अन्य निकायों में भी इसी तरह का समझौता हुआ, लेकिन कुछ क्षेत्रों में गठबंधन टूटने की खबरें आईं, जहां दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़ने की तैयारी में जुट गए। इस पूरे प्रक्रिया में शिंदे गुट की नाराजगी की खबरें सामने आईं, क्योंकि ठाणे जैसे उनके गढ़ में भाजपा की सक्रियता बढ़ी थी। साल की आखिरी कैबिनेट बैठक में शिंदे की अनुपस्थिति को इसी पृष्ठभूमि से जोड़ा गया। बैठक में केवल 14-15 मंत्री ही उपस्थित रहे, जबकि कई अधिकारी नए साल की छुट्टियों पर थे। इस बैठक में अनिवार्य उपस्थिति के निर्देश के बावजूद कम भागीदारी ने गठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठाए। शिवसेना (शिंदे गुट) की ओर से सफाई दी गई कि एकनाथ शिंदे नाराज नहीं हैं, बल्कि बीमार हैं और ठाणे स्थित अपने घर पर आराम कर रहे हैं। पार्टी के नेताओं ने कहा कि स्वास्थ्य कारणों से वे बैठक में शामिल नहीं हो सके, और यह कोई राजनीतिक संदेश नहीं है। इस सफाई के बावजूद अनुपस्थिति ने अटकलों को बढ़ावा दिया, क्योंकि निकाय चुनावों से पहले गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर तनाव पहले से था।
BMC चुनावों में महायुति ने अंततः समझौता किया, जिसमें भाजपा को अधिक सीटें मिलीं, जबकि शिंदे गुट को उनकी मांग से कम सीटें स्वीकार करनी पड़ीं। अन्य निकायों जैसे पुणे, नाशिक और ठाणे में भी सीटों पर बातचीत अंतिम चरण में पहुंची, लेकिन कुछ जगहों पर गठबंधन नहीं बन सका। इस पूरे घटनाक्रम ने महायुति की आंतरिक चुनौतियों को उजागर किया, जहां सीट बंटवारे की रस्साकशी ने कई बैठकों को प्रभावित किया। साल की आखिरी बैठक में शिंदे की गैरहाजिरी ने इन अटकलों को और बल दिया कि गठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं है। शिवसेना की सफाई के अनुसार शिंदे ठाणे में घर पर हैं और स्वास्थ्य ठीक होने पर सक्रिय हो जाएंगे। निकाय चुनाव जनवरी 2026 में होने वाले हैं, और सीट बंटवारे का अंतिम फॉर्मूला दिसंबर के अंत में ही तय हुआ। BMC में 227 सीटों पर भाजपा और शिंदे गुट ने संयुक्त रूप से प्रचार करने का निर्णय लिया, लेकिन अन्य जगहों पर अलग-अलग लड़ने की स्थिति बनी। इस बैठक की कम उपस्थिति ने प्रशासनिक अनुशासन पर भी सवाल उठाए, क्योंकि मुख्यमंत्री ने हर बुधवार को बैठक अनिवार्य की थी।
शिंदे की अनुपस्थिति को स्वास्थ्य से जोड़कर पार्टी ने मामले को शांत करने की कोशिश की। महायुति में भाजपा, शिंदे गुट की शिवसेना और अजित पवार गुट शामिल हैं, लेकिन BMC में अजित पवार गुट अलग लड़ने का फैसला कर चुका था। सीट बंटवारे की यह प्रक्रिया कई देर रात तक चली बैठकों के बाद पूरी हुई। साल की आखिरी कैबिनेट बैठक सामान्य रूप से हुई, लेकिन शिंदे की कुर्सी खाली रहने से राजनीतिक चर्चा बढ़ गई। पार्टी ने दोहराया कि शिंदे बीमार हैं और ठाणे में आराम कर रहे हैं, न कि कोई नाराजगी है। निकाय चुनावों की तैयारी में यह अनुपस्थिति एक संयोग मात्र थी। इस घटना ने 2026 के निकाय चुनावों से पहले महायुति की एकता पर ध्यान केंद्रित किया। सीट बंटवारे में शिंदे गुट को BMC में 90 सीटें मिलीं, जो उनकी शुरुआती मांग से कम थी। ठाणे और अन्य क्षेत्रों में भी समझौते हुए।
शिवसेना की ओर से बार-बार कहा गया कि शिंदे स्वास्थ्य कारणों से घर पर हैं। यह बैठक नए साल से पहले की आखिरी थी, और इसमें कई प्रस्ताव पारित हुए। शिंदे की गैरहाजिरी ने हालांकि हलचल पैदा की। गठबंधन में सीटों की खींचतान दिसंबर भर चली, और अंत में समझौता हुआ। पार्टी नेताओं ने शिंदे के जल्द सक्रिय होने की बात कही। यह घटना महाराष्ट्र की सियासत में निकाय चुनावों की पृष्ठभूमि में हुई। BMC और अन्य निकायों में सीट बंटवारा अंतिम रूप ले चुका था। शिंदे ठाणे में घर पर आराम कर रहे थे। कैबिनेट बैठक में उनकी अनुपस्थिति स्वास्थ्य से जुड़ी थी। महायुति ने चुनावी तैयारी जारी रखी। यह साल का अंतिम कैबिनेट सत्र था। सीट बंटवारे पर सहमति के बाद भी कुछ तनाव बाकी था। शिवसेना ने सफाई दी कि कोई नाराजगी नहीं है। शिंदे बीमार हैं और घर पर हैं। निकाय चुनाव जनवरी में हैं। गठबंधन की एकता बनाए रखने के प्रयास जारी हैं। यह अनुपस्थिति सामान्य थी।
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