प्रशांत किशोर की प्रियंका गांधी से दिल्ली में मुलाकात: कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें तेज, लेकिन मीडिया से बचते नजर आये।
जन सुराज पार्टी के संस्थापक और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने हाल ही में दिल्ली में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात
जन सुराज पार्टी के संस्थापक और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने हाल ही में दिल्ली में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात की। यह मुलाकात बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों के लगभग एक महीने बाद हुई, जिसमें जन सुराज पार्टी ने 238 सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन एक भी सीट नहीं जीती और अधिकांश उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। कांग्रेस ने भी 61 सीटों पर चुनाव लड़कर केवल छह सीटें जीतीं, जो 2020 के चुनाव की तुलना में 13 सीटों की कमी थी। दोनों पक्षों के सूत्रों ने इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया और इसके राजनीतिक महत्व को कम करने की कोशिश की, लेकिन यह घटना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है।
प्रशांत किशोर और कांग्रेस के संबंध वर्षों पुराने हैं। 2017 में उन्होंने पंजाब में कांग्रेस की जीत में भूमिका निभाई, जहां अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में पार्टी सत्ता में आई, लेकिन उसी साल उत्तर प्रदेश में कांग्रेस-सपा गठबंधन की हार हुई। 2021 में जदयू से अलग होने के बाद प्रशांत किशोर ने कांग्रेस को पुनर्जीवित करने का रोडमैप प्रस्तुत किया। अप्रैल 2022 में सोनिया गांधी के 10 जनपथ आवास पर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की मौजूदगी में उन्होंने विस्तृत प्रस्तुति दी। उस समय कांग्रेस ने एम्पावर्ड एक्शन ग्रुप 2024 गठित किया और प्रशांत किशोर को इसमें शामिल होने का न्योता दिया, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया क्योंकि वे पार्टी में अधिक अधिकार और स्वतंत्रता चाहते थे। उसके बाद से प्रशांत किशोर ने कांग्रेस की आलोचना की, विशेष रूप से बिहार चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी द्वारा उठाए गए वोट चोरी और मतदाता सूची के विशेष संशोधन जैसे मुद्दों को राज्य में चुनावी मुद्दा नहीं माना। इस हालिया मुलाकात की जानकारी सूत्रों से मिली और दोनों पक्षों ने इसके विवरण सार्वजनिक नहीं किए। कुछ रिपोर्टों में इसे दो घंटे तक चली बंद कमरे की बैठक बताया गया। मुलाकात के बाद कांग्रेस में प्रशांत किशोर के शामिल होने या किसी राजनीतिक तालमेल की अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन दोनों पक्षों ने इसे सामान्य भेंट बताया। बिहार चुनाव में दोनों की कमजोर स्थिति के बाद यह मुलाकात हुई, जिसमें जन सुराज और कांग्रेस दोनों को नुकसान उठाना पड़ा। प्रशांत किशोर ने बिहार में महागठबंधन और भाजपा दोनों के खिलाफ चुनाव लड़ा था, जबकि कांग्रेस महागठबंधन का हिस्सा थी।
प्रशांत किशोर का राजनीतिक सफर चुनावी रणनीति से शुरू होकर स्वयं की पार्टी बनाने तक पहुंचा। उन्होंने जन सुराज पार्टी की स्थापना की और बिहार में नया विकल्प देने का प्रयास किया, लेकिन चुनावी परिणाम निराशाजनक रहे। कांग्रेस भी बिहार में अपनी स्थिति मजबूत करने में असफल रही। मुलाकात के संदर्भ में 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और पंजाब जैसे राज्यों के विधानसभा चुनावों की चर्चा की संभावना जताई गई, लेकिन कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। दोनों पक्षों ने मुलाकात को गोपनीय रखा और मीडिया के सवालों पर टिप्पणी करने से बचते दिखे। प्रशांत किशोर और गांधी परिवार के बीच पुराने संपर्क रहे हैं। 2021-2022 की बातचीत के दौरान भी प्रियंका गांधी की भूमिका महत्वपूर्ण थी। उस समय प्रशांत किशोर पार्टी में शामिल होने के करीब थे, लेकिन मतभेदों के कारण बात नहीं बनी। अब बिहार चुनाव के बाद हुई यह मुलाकात राजनीतिक संवाद के दरवाजे खुले होने का संकेत देती है, हालांकि दोनों पक्षों ने इसे सामान्य बताया। जन सुराज पार्टी के प्रदर्शन के बाद प्रशांत किशोर की आगे की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं, और यह मुलाकात उन सवालों को और बढ़ावा दे रही है।
मुलाकात दिल्ली में हुई और इसके बाद प्रशांत किशोर बिहार लौट आए। कांग्रेस की ओर से इसे कोई विशेष महत्व नहीं दिया गया, जबकि जन सुराज पक्ष ने भी चुप्पी साधी रखी। बिहार चुनाव में जन सुराज के 238 में से 236 उम्मीदवारों की जमानत जब्त होना पार्टी के लिए बड़ा झटका था। इसी तरह कांग्रेस की सीटें घटकर छह रह जाना भी पार्टी की स्थिति को दर्शाता है। इस पृष्ठभूमि में हुई मुलाकात को राजनीतिक विकल्पों की तलाश के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन कोई ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं है। प्रशांत किशोर ने पहले कांग्रेस के साथ काम किया और पार्टी की संगठनात्मक संरचना पर सुझाव दिए थे। 2022 में प्रस्तुति के बाद पार्टी ने समिति गठित की, लेकिन प्रशांत किशोर ने शामिल होने से इनकार कर दिया। उसके बाद उन्होंने जन सुराज की ओर रुख किया। अब यह मुलाकात पुराने संबंधों को फिर से जोड़ने का प्रयास हो सकती है, लेकिन दोनों पक्षों ने इसे शिष्टाचार तक सीमित बताया। बिहार चुनाव के परिणामों ने दोनों को सोचने पर मजबूर किया है, और यह मुलाकात उसी संदर्भ में हुई।
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